फतेहपुर:सावन स्पेशल-जब पाताली शिवलिंग को एक राजा ने जंजीरों से बांध हांथी से खिंचवाने का प्रयास किया!

युगान्तर प्रवाह की सावन स्पेशल सीरीज में आज पढ़े अशोथर गाजीपुर मार्ग में सरकी गाँव मे स्थित जागेश्वर धाम मन्दिर के बारे में।

फतेहपुर:सावन का महीना हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार बेहद ही पवित्र माना जाता है।जिले भर में अलग अलग क्षेत्रो में बने शिवमंदिरों में पूरे सावन भर भक्तों का तांता लगा रहता है।ऐसा ही एक शिवमंदिर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर गाजीपुर अशोथर मार्ग पर सरकी गाँव मे स्थित है।जिसे लोग जागेश्वर धाम के नाम से जानते हैं।यह शिवमंदिर अपने आप मे कई रहस्यों को सहेजे हुए हैं।जागेश्वर धाम मे वैसे तो लोग साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है लेक़िन सावन माह के सोमवार को तो मन्दिर में भारी भीड़ जुटती है।

क्या है मन्दिर का इतिहास..?

जागेश्वर मन्दिर का इतिहास क़रीब 150 वर्ष पुराना है।स्थानीय लोग बताते हैं कि यहाँ कभी घनघोर जंगल हुआ करता था लोग इस जंगल में अपने मवेशियों को चराते थे।और शिवलिंग को मात्र एक पत्थर समझते थे।धीरे धीरे लोगों को जब यह पता चला कि यह कोई साधारण पत्थर नहीं पाताल से निकली साक्षात भगवान शिव की मूर्ति शिवलिंग है तो लोगों ने पूजना शुरू कर दिया औऱ यह बात धीरे धीरे पूरे क्षेत्र भर में फैल गई।

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शिवलिंग की जानकारी जब तत्कालीन अशोथर स्टेट के राजा को हुई तो उन्होंने शिवलिंग को अपने राज्य अशोथर में ले जाने की सोची और कई लोगों से शिवलिंग को निकलवाने की कोशिश की इतना ही नहीं उन्होंने शिवलिंग में जंजीरों को बांधकर हांथी से भी खिंचवाया फ़िर भी वह शिवलिंग को निकलवाने में असफ़ल साबित हुए।इसके बाद बताया जाता है कि शिवलिंग को खींचने का प्रयास करने वाले हाथी की वापस लौटते समय रास्ते मे ही मौत हो गई थी।इसके बाद शिवलिंग की महिमा को देखते हुए शिवलिंग की स्थापना मन्दिर निर्माण करवाकर भागलपुर के एक व्यवसायी ने करीब 125 बरस पहले कराई थी।

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जागेश्वर धाम में प्रतिवर्ष 15 दिनों तक चलने वाले मेले का आयोजन होता है।यह मेला शिवरात्रि के दिन से शुरू होकर होली के दिन तक चलता है।जागेश्वर का मेला पूरे ज़िले के साथ साथ पड़ोसी जनपदों तक प्रसिद्ध है।मेले में काफ़ी दूर दूर से लोग खरीददारी करने और शिवमंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं।

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