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Premanand Maharaj ji: भक्त ने सवाल किया महाराज मृत्यु भोज करना चाहिए या नहीं ! प्रेमानन्द महाराज जी ने बताई ये बात

Premanand Maharaj ji: भक्त ने सवाल किया महाराज मृत्यु भोज करना चाहिए या नहीं ! प्रेमानन्द महाराज जी ने बताई ये बात इस संसार में जिसने जन्म लिया है. उसकी मृत्यु निश्चित है हिंदू धर्म और मान्यताओं की माने तो इंसान के शरीर त्यागने के बाद उसकी आत्मा शांति व मोक्ष को लेकर कई विधि-विधान बनाए गए हैं. जिसमें से एक संस्कार तेरहवीं संस्कार यानी मृत्यु भोज (Death Feast) है. अब लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इस भोज को पाना चाहिए या नहीं. वृंदावन वाले प्रेमानन्द महाराज जी (Premanand Maharaj ji) ने इस बारे में विशेष जानकारी दी है.
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Vijaya Ekadashi Kab Hai 2024: कब है विजया एकादशी ! जानिये सही तारीख-शुभ मुहूर्त और महत्व

Vijaya Ekadashi Kab Hai 2024: कब है विजया एकादशी ! जानिये सही तारीख-शुभ मुहूर्त और महत्व फाल्गुन माह की शुरुआत हो चुकी है. मार्च माह में पड़ने वाली एकादशी जिसे विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi) कहा जाता है. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी विजया एकादशी नाम से जानी जाती है. इस एकादशी का व्रत 6 मार्च को रखा जाएगा. भगवान श्री हरि की पूजा फलदायी मानी गयी है. व्रत और पूजन से सौभाग्य और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
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Mahashivratri Kab Hai 2024: कब हैं 'महाशिवरात्रि' का महापर्व? क्या है इसके पीछे की कहानी, जानिए पौराणिक महत्व

Mahashivratri Kab Hai 2024: कब हैं 'महाशिवरात्रि' का महापर्व? क्या है इसके पीछे की कहानी, जानिए पौराणिक महत्व हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा (Worship Lord Shiva) बेहद शुभ व फलदायी मानी गई है. देश व दुनिया भर में भोलेनाथ के बहुत ही प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं. फाल्गुन की शुरुआत हो चुकी है महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का पर्व नजदीक आ रहा है. यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महापर्व के रूप में मनाया जाता है. इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 8 मार्च को है. विधि-विधान से शिव जी का पूजन और व्रत करना फलदायी माना गया है.
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Katni-Mohas Hanuman Mandir: मध्यप्रदेश के कटनी में है एक ऐसा चमत्कारिक हनुमान मन्दिर ! जहां दूर-दूर से टूटी हड्डियों का इलाज कराने पहुंचते हैं भक्त, राम-नाम जप व बूटी ग्रहण करने से जुड़ जाती है टूटी हड्डियां

Katni-Mohas Hanuman Mandir: मध्यप्रदेश के कटनी में है एक ऐसा चमत्कारिक हनुमान मन्दिर !  जहां दूर-दूर से टूटी हड्डियों का इलाज कराने पहुंचते हैं भक्त, राम-नाम जप व बूटी ग्रहण करने से जुड़ जाती है टूटी हड्डियां हमारे देश में ऐसे कई रहस्यमयी व प्रसिद्ध चमत्कारिक मंदिर (Miraculous Temple) हैं. जिनकी अद्भभुत मान्यता है. इन्हीं में से एक मध्य प्रदेश के कटनी (Katni) जिले के मुहास गांव (Village Muhas) में स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर है. जहां मान्यता है कि संकटमोचन हनुमान जी स्वयं डॉक्टर बनकर भक्तों की टूटी हुई हड्डियों का इलाज कर उन्हें जोड़ देते हैं. इस मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक भारी संख्या में भक्तों का आना लगा रहता है. भक्त सीता-राम का जप करते हैं यहां आये हुए भक्तो को बूटी खिलायी जाती है. यह मंदिर हड्डी जोड़ने वाले हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.
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Sant Ravidas Jayanti: 'मन चंगा तो कठौती में गंगा', जानिए संत रविदास कौन थे ! क्यों मनाई जाती है रविदास जयंती?

Sant Ravidas Jayanti: 'मन चंगा तो कठौती में गंगा', जानिए संत रविदास कौन थे ! क्यों मनाई जाती है रविदास जयंती? हमारा देश संत-महात्माओं और महापुरुषों से जुड़ा हुआ है. एक से एक प्रभावशाली सन्त-महात्माओं के मार्गदर्शन की बदौलत लोगों ने अपने जीवन की नई दिशा चुनी. बिना संतों और गुरुओं के आशीर्वाद से जीवन की कल्पना करना ही बेकार है. एक ऐसे महान संत जो राम और कृष्ण के परम भक्त थे संत रविदास जी (Saint रविदास ji) आज उनकी जयंती है उन्होंने जात-पात और ऊंच-नीच के भेदभाव को दूर कर समाज को एकता सूत्र में बांधने का कार्य किया.
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Rambhadracharya Biography In Hindi: बचपन से नेत्रहीन होने के बावजूद 22 भाषाओं का ज्ञान व 80 ग्रंथों की रचना करने वाले जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य कौन हैं? प्रधानमंत्री से लेकर बागेश्वर सरकार मानते हैं गुरु

Rambhadracharya Biography In Hindi: बचपन से नेत्रहीन होने के बावजूद 22 भाषाओं का ज्ञान व 80 ग्रंथों की रचना करने वाले जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य कौन हैं? प्रधानमंत्री से लेकर बागेश्वर सरकार मानते हैं गुरु हिन्दू धर्म में साधू, सन्यासी व महात्माओं का बड़ा महत्व है. हमारे सनातन धर्म में बड़े तेजस्वी साधु-संत रहे हैं. रामानंद संप्रजाय के चार प्रमुख जगद्गुरुओं में से एक जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य (Shri Rambhadracharya) हैं. जो बचपन से नेत्रहीन (Blind) होने के बावजूद उन्हें 22 भाषाओं का ज्ञान व 80 ग्रन्थों की रचना कर चुके हैं. प्रभू राम के अनन्य भक्त व आध्यात्मिक गुरु श्री रामभद्राचार्य के नाम कई बड़े सम्मान दर्ज हैं. हाल ही में उनका नाम ज्ञानपीठ अवार्ड (Gyanpith Award) के लिए नामित हुआ है.
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Magh Purnima 2024 Kab Hai: कब है माघ पूर्णिमा ! गंगा स्नान और दान का बताया गया महत्व, जानें तारीख और शुभमुहूर्त

Magh Purnima 2024 Kab Hai: कब है माघ पूर्णिमा ! गंगा स्नान और दान का बताया गया महत्व, जानें तारीख और शुभमुहूर्त माघ पूर्णिमा (Magha Purnima) का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है. यह पर्व हिन्दू धर्म के लिए काफी बड़ा पर्व मनाया जाता है. माघ मास का अंतिम दिन कहा जाता है. खास तौर पर इस पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान के साथ ही भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के पूजन का महत्व है. कोई जातक विधि-विधान से पूजन करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. हालांकि इस बार यह माघ पूर्णिमा जिसे माघी पूर्णिमा भी कहते हैं वह 24 फरवरी को पड़ रही है.
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Jaya Ekadashi (2024) Kab Hai: कब है जया एकादशी ! शुभ मुहूर्त के साथ जानिए जया एकादशी की व्रत कथा का महत्व

Jaya Ekadashi (2024) Kab Hai: कब है जया एकादशी ! शुभ मुहूर्त के साथ जानिए जया एकादशी की व्रत कथा का महत्व हिन्दू धर्म के अनुसार साल में कई एकादशी पड़ती है, हाल ही में षटतिला एकादशी पड़ी थी. अब 20 फरवरी मंगलवार को जया एकादशी (Jaya Ekadashi) का व्रत रखा जाएगा. एकादशी का व्रत भगवान श्री हरि (Lord Vishnu) को समर्पित है. विधिवत पूजन व व्रत कथा करने से जातक के सभी दुख दूर हो जाते हैं और घर में सुख समृद्धि आती है. इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति (Attainment Of Salvation) भी होती है.
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Abu Dhabi Hindu Mandir: अबूधाबी में पहले हिन्दू मन्दिर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन ! नागर शैली तर्ज व 27 एकड़ क्षेत्र में बना है यह भव्य मंदिर, 1 मार्च से कर सकेंगे दर्शन

Abu Dhabi Hindu Mandir: अबूधाबी में पहले हिन्दू मन्दिर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन ! नागर शैली तर्ज व 27 एकड़ क्षेत्र में बना है यह भव्य मंदिर, 1 मार्च से कर सकेंगे दर्शन बसंत पंचमी (Basant Panchami) के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने संयुक्त अरब अमीरात (Uae) के अबूधाबी (Abudhabi) में बने पहले नवनिर्मित हिन्दू मन्दिर का उद्घाटन किया. इस भव्य मंदिर का निर्माण अद्भुत वास्तुकला व नागर शैली के साथ ही राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थरों से किया गया है. इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है. आगामी 1 मार्च से श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मन्दिर खोल दिया जाएगा. इस मंदिर को बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संस्था (Baps) ने तैयार किया है.
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Magh Gupt Navratri 2024: जानिए कब से शुरू हो रही माघ 'गुप्त नवरात्रि'? कौन सी दस महाविद्याओं की उपासना का है महत्व, किस तरह से की जाती है मां की उपासना

 Magh Gupt Navratri 2024: जानिए कब से शुरू हो रही माघ 'गुप्त नवरात्रि'? कौन सी दस महाविद्याओं की उपासना का है महत्व, किस तरह से की जाती है मां की उपासना माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) की शुरुआत हो रही है. यह गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी से शुरू हो रही है. नवरात्रि का नाम आते ही सभी लोग उन दो नवरात्रि की ओर पहुंच जाते हैं. हालांकि यह नवरात्रि चैत्र और शारदीय वाली नहीं है यह तो गुप्त नवरात्रि है. मां दुर्गा की इस गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओ के पूजन का महत्व (importance है. मां दुर्गा की इस नवरात्रि में उपासना गुप्त तरह से की जाती (Worshipping Mother Secretly) है. गुप्त पूजन करने से माँ प्रसन्न होती हैं. खास तौर पर तांत्रिकों की साधना के लिए यह दिन विशेष माने गए हैं.
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Basant Panchami 2024: जानिए देश के इन राज्यों में कैसे मनायी जाती है बसंत पंचमी ! हर जगह का अलग ही महत्व

Basant Panchami 2024: जानिए देश के इन राज्यों में कैसे मनायी जाती है बसंत पंचमी ! हर जगह का अलग ही महत्व हिन्दू धर्म में बसन्त पँचमी पर्व (Basant Panchami) धूमधाम से मनाए जाने की परम्परा है. 14 फरवरी को बसन्त पंचमी पड़ रही है. इस दिन ज्ञान की आराध्य देवी मां सरस्वती (Maa Saraswati) की उपासना का महत्व है. देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरह से बसंत पंचमी मनाए जाने की परंपरा है.
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Basant Panchami (2024) Kab Hai: कब है बसंत पंचमी का पर्व? क्यों मनायी जाती है बसंत पंचमी ! जानिए क्या है इसके पीछे का पौराणिक महत्व और कथा

Basant Panchami (2024) Kab Hai: कब है बसंत पंचमी का पर्व? क्यों  मनायी जाती है बसंत पंचमी ! जानिए क्या है इसके पीछे का पौराणिक महत्व और कथा ज्ञान व विद्या की देवी माँ सरस्वती (Mother Saraswati Goddess Of Knowledge) की पूजा (Worshipped) का बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन विशेष महत्व है. खेतों में फसलें लहलहाने लगे तो समझ लें बसंत ऋतु (Basant Ritu) का आगमन होने वाला है. बसंत ऋतु के आते ही ठंड में परिर्वतन हो जाता है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पँचमी का पर्व मनाया जाता है. इस बार यह पर्व 14 फरवरी को मनाया जाएगा. पीले वस्त्र धारण कर सरस्वती माता की उपासना करें. मां की कृपा से आपके अंदर अच्छी बुद्धि का विकास और जीवन में प्रगति की नई दिशा बनती है.
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