
Fatehpur News: प्रधानी की खूनी रंजिश का 16 साल बाद फैसला, 18 लोगों को उम्रकैद, 5 की हो चुकी है मौत
फतेहपुर के हथगाम ब्लॉक स्थित पट्टीशाह गांव में वर्ष 2009 में हुई चर्चित हत्या के मामले में 16 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया. अपर जिला जज पूजा विश्वकर्मा ने 18 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी. मुख्य आरोपी बसपा नेता मजहर हैदर नकवी समेत पांच की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में प्रधानी चुनाव की रंजिश से उपजा एक खूनी संघर्ष आखिरकार न्याय के मुकाम तक पहुंच गया. 24 नवंबर 2009 को दिनदहाड़े हुई नफीस की हत्या के मामले में अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद 18 लोगों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. यह मामला कभी दोस्ती से दुश्मनी और फिर खून की जंग में बदल गया था. मामले में सुनवाई के दौरान 5 आरोपियों की मौत भी हो चुकी है.
दोस्ती से दुश्मनी तक, गांव की राजनीति बनी खूनी संघर्ष

24 नवंबर 2009, दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया नफीस
पुत्र और गनर की हत्या से आक्रोशित बसपा नेता ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर 24 नवंबर 2009 को साजिश रची. गांव के बाहर पहले से घेरेबंदी की गई. जैसे ही शरीफ सेठ का भाई नफीस वहां पहुंचा, उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी गई. नफीस की मौके पर ही मौत हो गई जबकि शरीफ सेठ गंभीर रूप से घायल हो गए. दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया और पट्टीशाह गांव सुर्खियों में आ गया.
अदालत में 16 साल तक चली कानूनी जंग
इन दोषियों को मिली उम्रकैद लगा जुर्माना
अदालत ने शाहिद रजा, सिकंदर, सलमान, सीमाब, मोबीन, गय्यूर, मशरूर, फरहान अब्बास, असगर अली, रुकनुद्दीन निवासी पट्टीशाह तथा रमेश और मोहम्मद हई निवासी नरौली थाना सुल्तानपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई. सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत 3-3 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया.
मुख्य आरोपी समेत पांच की हो चुकी मौत
इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी बसपा नेता मजहर हैदर नकवी उर्फ मज्जू मियां समेत सगीर, अमीन, तेग अली, नसीम घोषी और चंद्रभूषण की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी. अदालत के रिकॉर्ड में इन्हें भी दोषी माना. 16 साल पहले इस घटना ने क्षेत्र को झकझोर दिया था.
नाबालिग आरोपी का मामला जुवेनाइल कोर्ट में लंबित
मामले में एक आरोपी नाबालिग भी था. कानून के प्रावधानों के अनुसार उसका मुकदमा जुवेनाइल कोर्ट में अलग से चल रहा है. इसी कारण उसे इस फैसले में शामिल नहीं किया गया. अब उसकी सजा जुवेनाइल न्याय बोर्ड के निर्णय पर निर्भर करेगी. अदालत ने कहा कि न्याय प्रक्रिया उम्र और कानूनी प्रावधानों के अनुसार अलग-अलग लागू होती है.
मजबूत पैरवी से 16 साल बाद मिला न्याय
अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता तारिक फरीदी, जगदीश सिंह उर्फ जालिम, दीपक सिंह चौहान और जितेंद्र सिंह चौहान ने प्रभावी दलीलें दीं. शासकीय अधिवक्ता प्रमिल श्रीवास्तव और देवेंद्र भदौरिया ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर मजबूत पक्ष रखा. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को न्याय मिला और 16 साल पुरानी खूनी रंजिश का पटाक्षेप हुआ.
