
Uttar Pradesh ARTO Action: फतेहपुर समेत तीन जिलों के एआरटीओ सस्पेंड, STF जांच में और नाम आने के संकेत
उत्तर प्रदेश में ओवरलोडेड ट्रकों को रिश्वत लेकर पास कराने के मामले में परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है. STF की FIR के बाद फतेहपुर, लखनऊ और रायबरेली के तीन ARTO प्रवर्तन निलंबित कर दिए गए हैं. जांच के दायरे में और अधिकारियों के आने के संकेत हैं.
UP ARTO Suspended: यूपी के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. STF की जांच में सामने आए ओवरलोडिंग और रिश्वतखोरी के मामले में फतेहपुर समेत तीन जिलों के ARTO प्रवर्तन को निलंबित कर दिया गया है. विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और संकेत हैं कि आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और भी व्यापक हो सकती है.
फतेहपुर समेत तीन जिलों के ARTO निलंबित, विभाग में हड़कंप

इन पर आरोप है कि इन्होंने मौरंग और गिट्टी से लदे ओवरलोडेड ट्रकों को अवैध वसूली के बदले पास कराया. निलंबन के साथ ही तीनों अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है. इस कार्रवाई से परिवहन विभाग के भीतर हड़कंप मचा हुआ है और मैदानी स्तर पर तैनात अन्य अधिकारियों में भी खलबली देखी जा रही है.
STF की FIR ने खोली ओवरलोडिंग सिंडीकेट की परतें
12 नवंबर को STF ने बुंदेलखंड क्षेत्र में सक्रिय ओवरलोडिंग सिंडीकेट के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी. इस कार्रवाई में हमीरपुर, महोबा समेत कई जिलों का नाम सामने आया. लखनऊ के मड़ियांव, रायबरेली के लालगंज और उन्नाव जिले में दर्ज तीन अलग-अलग FIR में परिवहन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी लोगों सहित 25 लोगों को नामजद किया गया.
आरोप है कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए तय रकम लेकर ओवरलोडेड ट्रकों को बिना कार्रवाई के पास कराया जाता था. STF की जांच में इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका उजागर हुई.
केस दर्ज होने के बाद 48 दिन तक गायब रहे नामजद अधिकारी
FIR दर्ज होने के बाद नामजद कई अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय तक कार्यालयों से नदारद रहे. करीब 48 दिनों तक न तो वे नियमित ड्यूटी पर पहुंचे और न ही जांच में सहयोग करते नजर आए. इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग के विशेष सचिव केपी सिंह ने निलंबन का आदेश जारी किया.
विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच से बचने की कोशिश करने वाले अधिकारियों के खिलाफ यह कड़ा संदेश है. अब ऐसे मामलों में अनुपस्थिति को भी गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा.
झांसी के उप परिवहन आयुक्त को सौंपी गई विभागीय जांच
तीनों ARTO प्रवर्तन के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. झांसी के उप परिवहन आयुक्त केडी सिंह गौर को जांच अधिकारी नामित किया गया है. जांच में यह देखा जाएगा कि ओवरलोडेड वाहनों को पास कराने की प्रक्रिया कैसे चल रही थी, कितनी रकम वसूली जाती थी और किन-किन स्तरों पर मिलीभगत थी.
विभागीय जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे और भी कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, यदि आरोप साबित होते हैं तो सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है.
पहले भी कई अधिकारी और कर्मचारी हो चुके हैं निलंबित
इस पूरे प्रकरण में यह पहली कार्रवाई नहीं है. इससे पहले 29 नवंबर को परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने लखनऊ के पीटीओ मनोज कुमार, रायबरेली की रेहाना बानो और फतेहपुर के अखिलेश चतुर्वेदी को निलंबित किया था.
इसके अलावा लखनऊ के प्रवर्तन पर्यवेक्षक अनुज, उन्नाव के प्रवर्तन पर्यवेक्षक इंद्रजीत सिंह, उन्नाव के प्रवर्तन सिपाही रणजीत कुमार और प्रदीप सिंह तथा रायबरेली के प्रवर्तन चालक नौशाद को भी निलंबित किया जा चुका है. लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि STF जांच के दायरे में अभी कई और नाम आ सकते हैं.
