
Murder In UP: दो महिलाओं के समलैंगिक इश्क ने पति की कर दी हत्या, चार बच्चों की मां कैसे बनी कातिल
फतेहपुर में रिश्तों की मर्यादा टूट गई. चार बच्चों की मां ने अपनी महिला प्रेमिका के साथ मिलकर पति की 60 हजार रुपये में सुपारी देकर हत्या करा दी. पुलिस सर्विलांस और एसओजी की जांच में इस सनसनीखेज हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ.
Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से सामने आया यह मामला बताता है कि जब इश्क जिम्मेदारी भूल जाए, तो वह अपराध का रूप ले लेता है. यहां एक महिला ने अपने समलैंगिक प्रेम संबंध को बचाने के लिए पति की हत्या करवा दी. नाती के जन्मदिन की रात हुई इस वारदात का पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए खुलासा किया है.
जब प्यार रिश्तों से बड़ा और इंसान छोटा हो गया

यह रिश्ता कब दोस्ती से आगे बढ़ गया, यह दोनों को भी शायद समझ नहीं आया. तीन महीने पहले जब रामसुमेर ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया, तो उसने पति होने के नाते इस पर रोक लगा दी. यही रोक उसके लिए आखिरी फैसला साबित हुई. यहां पति गुनहगार नहीं था, बस इश्क की राह में खड़ा था.
चोरी छिपे मोबाइल और साजिश की नींव

नाती के जन्मदिन पर लिखी गई मौत की पटकथा

सर्विलांस ने खोली इश्क और कत्ल की परतें

इसके बाद पुलिस की नजर पत्नी और उसकी महिला मित्र पर गई. कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें घटना से पहले और बाद में दोनों के बीच लगातार बातचीत सामने आई. पूछताछ में मालती देवी टूट गई और उसने पूरी साजिश स्वीकार कर ली.
सहेलियों की आपसी मोहब्बत बना हत्या की वजह

एसपी अनूप कुमार सिंह के मुताबिक, रेनू देवी और मालती देवी के बीच समलैंगिक प्रेम संबंध थे, जो करीब डेढ़-दो साल से चल रहे थे. पति के विरोध के बाद दोनों ने 60 हजार रुपये में सुपारी देकर हत्या की साजिश रची. पुलिस ने दो मोबाइल फोन, हत्या में प्रयुक्त लाल रस्सी और खून लगे कपड़े बरामद किए हैं. रेनू देवी, मालती देवी और राजू सोनकर को जेल भेजा गया है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है.
जेल में प्यार, बाहर बच्चों का सन्नाटा
इस कहानी में सबसे ज्यादा सवाल उन चार बच्चों का है, जिनकी मां अब कातिल के तौर पर पहचानी जाएगी. पुलिस के लिए यह एक सुलझा हुआ केस है, लेकिन समाज के लिए एक खुला सवाल. जब प्यार जिम्मेदारी भूल जाए और रिश्ते बोझ लगने लगें, तो अंजाम सिर्फ जेल, लाश और उम्र भर का सन्नाटा होता है. फतेहपुर का यह हत्याकांड बताता है कि इश्क अगर इंसानियत छोड़ दे, तो वह सिर्फ अपराध बनकर रह जाता है.
