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Murder In UP: दो महिलाओं के समलैंगिक इश्क ने पति की कर दी हत्या, चार बच्चों की मां कैसे बनी कातिल

Murder In UP: दो महिलाओं के समलैंगिक इश्क ने पति की कर दी हत्या, चार बच्चों की मां कैसे बनी कातिल
फतेहपुर में दो महिलाओं के समलैंगिक रिश्तों ने पति की कर दी हत्या (दाएं मृतक रामसुमेर फाइल फोटो): Image Credit Original Source

फतेहपुर में रिश्तों की मर्यादा टूट गई. चार बच्चों की मां ने अपनी महिला प्रेमिका के साथ मिलकर पति की 60 हजार रुपये में सुपारी देकर हत्या करा दी. पुलिस सर्विलांस और एसओजी की जांच में इस सनसनीखेज हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ.

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से सामने आया यह मामला बताता है कि जब इश्क जिम्मेदारी भूल जाए, तो वह अपराध का रूप ले लेता है. यहां एक महिला ने अपने समलैंगिक प्रेम संबंध को बचाने के लिए पति की हत्या करवा दी. नाती के जन्मदिन की रात हुई इस वारदात का पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए खुलासा किया है.

जब प्यार रिश्तों से बड़ा और इंसान छोटा हो गया

असोथर थाना क्षेत्र के टीकर गांव निवासी किसान रामसुमेर सिंगरौर एक साधारण जीवन जी रहा था. न किसी से दुश्मनी, न किसी विवाद में नाम. लेकिन उसके ही घर में एक ऐसा रिश्ता पनप रहा था, जो आगे चलकर उसकी मौत की वजह बना. पत्नी रेनू देवी और पड़ोस में रहने वाली मालती देवी उर्फ बुद्धी के बीच पिछले डेढ़-दो वर्षों से गहरा संबंध था.

यह रिश्ता कब दोस्ती से आगे बढ़ गया, यह दोनों को भी शायद समझ नहीं आया. तीन महीने पहले जब रामसुमेर ने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया, तो उसने पति होने के नाते इस पर रोक लगा दी. यही रोक उसके लिए आखिरी फैसला साबित हुई. यहां पति गुनहगार नहीं था, बस इश्क की राह में खड़ा था.

चोरी छिपे मोबाइल और साजिश की नींव

पति की सख्ती के बाद भी रेनू और मालती का संपर्क नहीं टूटा. मालती ने चोरी छिपे एक कीपैड मोबाइल खरीदा और अपने नाम से सिम लेकर रेनू को दे दिया. दोनों घंटों बात करती थीं. इन बातचीतों में अब भावनाएं कम और फैसले ज्यादा थे.

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मालती ने अपने हाथ पर रेनू का नाम गुदवा रखा था, जैसे यह रिश्ता अमर हो. लेकिन यही अमरता रामसुमेर की मौत की कीमत पर खरीदी जानी थी. दोनों ने तय कर लिया कि अगर साथ रहना है, तो बीच से पति को हटाना ही होगा. इश्क अब कविता नहीं, साजिश बन चुका था.

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नाती के जन्मदिन पर लिखी गई मौत की पटकथा

14 जनवरी की रात रामसुमेर अपनी बेटी कोमल के पुत्र के जन्मदिन में शामिल होकर नलकूप गया. उसे क्या पता था कि यह उसका आखिरी सफर है. साजिश के तहत ई-रिक्शा चालक जितेंद्र गुप्ता अपने साथियों राजू सोनकर और रामप्रकाश उर्फ मद्दू के साथ पहले से मौके पर छिपा था. जैसे ही रामसुमेर पहुंचा, पीछे से पकड़कर रस्सी से गला घोंटा गया और फिर चाकू से गला रेत दिया गया. यह कोई अचानक हुआ अपराध नहीं था, बल्कि 60 हजार रुपये में तय की गई ठंडी सुपारी थी. अगली सुबह अरहर के खेत में खून से सना शव मिला और गांव सन्न रह गया.

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सर्विलांस ने खोली इश्क और कत्ल की परतें

असोथर पुलिस ने शव मिलने के बाद अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अनूप कुमार सिंह के निर्देश पर इंटेलिजेंस विंग, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम गठित की गई. जांच में साफ हुआ कि न तो रामसुमेर का किसी से प्रेम प्रसंग था और न ही कोई भूमि विवाद.

इसके बाद पुलिस की नजर पत्नी और उसकी महिला मित्र पर गई. कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें घटना से पहले और बाद में दोनों के बीच लगातार बातचीत सामने आई. पूछताछ में मालती देवी टूट गई और उसने पूरी साजिश स्वीकार कर ली.

सहेलियों की आपसी मोहब्बत बना हत्या की वजह

एएसपी महेंद्र पाल सिंह और सीओ थरियांव वीर सिंह ने बताया कि रामसुमेर ने मालती का घर आना-जाना बंद करा दिया था, जिससे दोनों महिलाओं में नाराजगी बढ़ती चली गई. मालती ने चोरी छिपे मोबाइल दिलाकर संपर्क बनाए रखा.

एसपी अनूप कुमार सिंह के मुताबिक, रेनू देवी और मालती देवी के बीच समलैंगिक प्रेम संबंध थे, जो करीब डेढ़-दो साल से चल रहे थे. पति के विरोध के बाद दोनों ने 60 हजार रुपये में सुपारी देकर हत्या की साजिश रची. पुलिस ने दो मोबाइल फोन, हत्या में प्रयुक्त लाल रस्सी और खून लगे कपड़े बरामद किए हैं. रेनू देवी, मालती देवी और राजू सोनकर को जेल भेजा गया है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश जारी है.

जेल में प्यार, बाहर बच्चों का सन्नाटा

इस कहानी में सबसे ज्यादा सवाल उन चार बच्चों का है, जिनकी मां अब कातिल के तौर पर पहचानी जाएगी. पुलिस के लिए यह एक सुलझा हुआ केस है, लेकिन समाज के लिए एक खुला सवाल. जब प्यार जिम्मेदारी भूल जाए और रिश्ते बोझ लगने लगें, तो अंजाम सिर्फ जेल, लाश और उम्र भर का सन्नाटा होता है. फतेहपुर का यह हत्याकांड बताता है कि इश्क अगर इंसानियत छोड़ दे, तो वह सिर्फ अपराध बनकर रह जाता है.

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