होली की भाई दूज 2026: कब है भारत्य द्वितीया, बहन के घर भोजन करने की परंपरा क्यों है खास? जानिए शुभ मुहूर्त
होली के बाद मनाई जाने वाली भाई दूज को भारत्य द्वितीया कहा जाता है. यह पर्व भाई-बहन के स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक है. साल 2026 में यह त्योहार 5 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई बहन के घर भोजन करते हैं.
Holi Bhai Dooj Kab Hai: रंगों के त्योहार होली के बाद आने वाला भाई-बहन के प्रेम का खास पर्व है होली भाई दूज, जिसे भारत्य द्वितीया भी कहा जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं. कई जगहों पर इस दिन भाई का बहन के घर भोजन करना भी शुभ माना जाता है. साल 2026 में यह पर्व 5 मार्च को मनाया जाएगा.
साल में दो बार आता है भाई दूज का पर्व
हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज साल में दो बार मनाया जाता है. पहला भाई दूज दीपावली के समय आता है जबकि दूसरा होली की परेवा के दूसरे दिन मनाया जाता है. होली के बाद आने वाले भाई दूज को भारत्य द्वितीया कहा जाता है. यह पर्व फाल्गुन पूर्णिमा के दो दिन बाद द्वितीया तिथि को पड़ता है.
हालांकि दिवाली के भाई दूज के बारे में लोग ज्यादा जानते हैं, लेकिन होली के बाद आने वाला भाई दूज भी उतना ही धार्मिक और पारिवारिक महत्व रखता है. इस दिन भाई-बहन के रिश्ते को सम्मान देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और परिवारों में इसे बेहद श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाया जाता है.
होली भाई दूज 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में होली भाई दूज 5 मार्च, गुरुवार को मनाया जाएगा. ये तिथि फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वितीया को पड़ रही है. पंचांग के अनुसार द्वितीया तिथि 4 मार्च 2026 को शाम 4:48 बजे से शुरू होगी और 5 मार्च को शाम 5:03 बजे तक रहेगी.
हिंदू परंपरा के अनुसार सूर्योदय के आधार पर त्योहार मनाया जाता है, इसलिए इस बार भाई दूज का पर्व 5 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं. कई स्थानों पर पूजा के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार भी देते हैं.
भाई के बहन के घर भोजन करने की परंपरा क्यों है खास
होली या दीपावली के भाई दूज के दिन भाई का बहन के घर जाकर भोजन करना विशेष शुभ माना जाता है. यह परंपरा भाई-बहन के स्नेह और सम्मान को दर्शाती है. माना जाता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई को सुख, समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है.
कई परिवारों में बहनें अपने भाई के लिए विशेष पकवान बनाती हैं और पूरे विधि-विधान से उनका स्वागत करती हैं. यह परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का भी माध्यम है. इस दिन परिवारों में प्रेम, अपनापन और रिश्तों की गर्माहट साफ दिखाई देती है.
यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा है यह पर्व
होली भाई दूज से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है. मान्यता है कि एक बार यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आमंत्रित किया. जब यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे तो यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया, तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन कराया.
अपनी बहन के प्रेम और सेवा से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाएगा और उसका सम्मान करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होगी. तभी से यह परंपरा शुरू हुई और भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक बन गया.
चित्रगुप्त पूजा और धार्मिक महत्व
कुछ व्यापारी और कायस्थ समुदायों में इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है. चित्रगुप्त को यमराज का सचिव माना जाता है, जो मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं. इसलिए इस दिन लोग अपने कार्यों की शुद्धता और अच्छे कर्मों की प्रार्थना करते हैं. कई स्थानों पर कलम-दवात और लेखन सामग्री की पूजा भी की जाती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भाई-बहन का मिलन केवल पारिवारिक संबंध नहीं बल्कि आध्यात्मिक आशीर्वाद का भी प्रतीक होता है. यही कारण है कि भारत के कई राज्यों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है.
होली की भाई दूज 2026: कब है भारत्य द्वितीया, बहन के घर भोजन करने की परंपरा क्यों है खास? जानिए शुभ मुहूर्त
Holi Bhai Dooj Kab Hai: रंगों के त्योहार होली के बाद आने वाला भाई-बहन के प्रेम का खास पर्व है होली भाई दूज, जिसे भारत्य द्वितीया भी कहा जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं. कई जगहों पर इस दिन भाई का बहन के घर भोजन करना भी शुभ माना जाता है. साल 2026 में यह पर्व 5 मार्च को मनाया जाएगा.
साल में दो बार आता है भाई दूज का पर्व
हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज साल में दो बार मनाया जाता है. पहला भाई दूज दीपावली के समय आता है जबकि दूसरा होली की परेवा के दूसरे दिन मनाया जाता है. होली के बाद आने वाले भाई दूज को भारत्य द्वितीया कहा जाता है. यह पर्व फाल्गुन पूर्णिमा के दो दिन बाद द्वितीया तिथि को पड़ता है.
हालांकि दिवाली के भाई दूज के बारे में लोग ज्यादा जानते हैं, लेकिन होली के बाद आने वाला भाई दूज भी उतना ही धार्मिक और पारिवारिक महत्व रखता है. इस दिन भाई-बहन के रिश्ते को सम्मान देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और परिवारों में इसे बेहद श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाया जाता है.
होली भाई दूज 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में होली भाई दूज 5 मार्च, गुरुवार को मनाया जाएगा. ये तिथि फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वितीया को पड़ रही है. पंचांग के अनुसार द्वितीया तिथि 4 मार्च 2026 को शाम 4:48 बजे से शुरू होगी और 5 मार्च को शाम 5:03 बजे तक रहेगी.
हिंदू परंपरा के अनुसार सूर्योदय के आधार पर त्योहार मनाया जाता है, इसलिए इस बार भाई दूज का पर्व 5 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं. कई स्थानों पर पूजा के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार भी देते हैं.
भाई के बहन के घर भोजन करने की परंपरा क्यों है खास
होली या दीपावली के भाई दूज के दिन भाई का बहन के घर जाकर भोजन करना विशेष शुभ माना जाता है. यह परंपरा भाई-बहन के स्नेह और सम्मान को दर्शाती है. माना जाता है कि इस दिन बहन के घर भोजन करने से भाई को सुख, समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है.
कई परिवारों में बहनें अपने भाई के लिए विशेष पकवान बनाती हैं और पूरे विधि-विधान से उनका स्वागत करती हैं. यह परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का भी माध्यम है. इस दिन परिवारों में प्रेम, अपनापन और रिश्तों की गर्माहट साफ दिखाई देती है.
यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा है यह पर्व
होली भाई दूज से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है. मान्यता है कि एक बार यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आमंत्रित किया. जब यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे तो यमुना ने उनका आदर-सत्कार किया, तिलक लगाया और स्वादिष्ट भोजन कराया.
अपनी बहन के प्रेम और सेवा से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाएगा और उसका सम्मान करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होगी. तभी से यह परंपरा शुरू हुई और भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक बन गया.
चित्रगुप्त पूजा और धार्मिक महत्व
कुछ व्यापारी और कायस्थ समुदायों में इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है. चित्रगुप्त को यमराज का सचिव माना जाता है, जो मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं. इसलिए इस दिन लोग अपने कार्यों की शुद्धता और अच्छे कर्मों की प्रार्थना करते हैं. कई स्थानों पर कलम-दवात और लेखन सामग्री की पूजा भी की जाती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भाई-बहन का मिलन केवल पारिवारिक संबंध नहीं बल्कि आध्यात्मिक आशीर्वाद का भी प्रतीक होता है. यही कारण है कि भारत के कई राज्यों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है.