
ईरान-इजरायल युद्ध से हिला तेल बाजार, 80 डॉलर पहुंचा कच्चा तेल…क्या भारत में महंगा होने वाला है पेट्रोल-डीजल?
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है. ब्रेंट क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इस संकट से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है.
Petrol Diesel Hike In India: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करने लगा है. इजरायल के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के करीब पहुंच गया है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि तेल महंगा होने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत मार्च 2026 में करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. वहीं अमेरिकी कच्चा तेल भी करीब 8.6 प्रतिशत की तेजी के साथ 72.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो कुछ दिन पहले लगभग 67 डॉलर के आसपास था.

भारत पर क्यों पड़ सकता है सीधा असर?


क्या तुरंत बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी की संभावना कम है. अप्रैल 2022 से देश में खुदरा ईंधन कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं.

सरकार की नीति भी इसी संतुलन पर आधारित है. जब तेल सस्ता होता है तो कंपनियों को लाभ कमाने दिया जाता है और जब कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की जाती है. इसलिए फिलहाल पंप पर कीमतों में तुरंत बदलाव की उम्मीद कम बताई जा रही है.
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा खतरा
इस पूरे संकट में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है. दुनिया के तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है और भारत के लगभग आधे तेल आयात भी इसी रास्ते से आते हैं.
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर के फेलो हेमंत मल्या के अनुसार यदि ईरान इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित करता है या इसे बंद करने की कोशिश करता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है.
ऐसी स्थिति में भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक समाधान के रूप में भारत को रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है.
तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति फिलहाल मजबूत?
भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल मजबूत वित्तीय स्थिति में हैं. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने पिछले वर्षों में अच्छा मुनाफा कमाया है.
वित्त वर्ष 2024 में इन कंपनियों ने मिलकर लगभग 81,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया था. वहीं चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में ही तीनों कंपनियों का संयुक्त मुनाफा 23,743 करोड़ रुपये रहा.
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत वित्तीय स्थिति के कारण ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक आए उछाल को कुछ समय तक झेलने में सक्षम हैं.
सरकार हालात पर रख रही नजर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में तेल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की है. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और उनकी वहनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए तैयार है.
फिलहाल आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि तुरंत पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है. हालांकि यदि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते हैं या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भविष्य में कीमतों में बदलाव से इनकार भी नहीं किया जा सकता.
