Fatehpur News: बच्चों के भविष्य की नींव क्यों हैं आंगनबाड़ी केंद्र, फतेहपुर पहुंचीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने फतेहपुर दौरे के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के भविष्य की बुनियाद बताया. उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को देशहित में आवश्यक बताते हुए इसके विरोध को अनुचित कहा. कार्यक्रम में विद्यालय भवन लोकार्पण, किट वितरण और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का सम्मान किया गया. राज्यपाल के मंच पर पहुंचते ही शंख ध्वनि से उनका अभिनन्दन किया गया.
Fatehpur News: यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को फतेहपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने शिक्षा, पोषण और बाल स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की. सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी व्यवस्था, एसआईआर प्रक्रिया और बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़ी सरकारी प्राथमिकताओं को विस्तार से सामने रखा.
अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ, निगरानी जरूरी
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का फतेहपुर दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक देखने को मिली. सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में आयोजित समारोह में उन्होंने विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण किया, जिससे छात्राओं को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध होगा.
इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को उपयोगी किट वितरित की गईं, जिनमें बच्चों की देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े आवश्यक संसाधन शामिल थे. महिलाओं को पोषण किट देकर सरकार की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया. साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया.
बच्चों के लिए क्यों जरूरी हैं आंगनबाड़ी केंद्र
अपने संबोधन में राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शून्य से छह वर्ष की आयु बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है. इसी उम्र में पोषण, संस्कार और प्रारंभिक शिक्षा की नींव पड़ती है. आंगनबाड़ी केंद्र इस नींव का सबसे मजबूत आधार हैं, लेकिन लंबे समय तक इन्हें वह प्राथमिकता नहीं मिली जिसकी जरूरत थी.
उन्होंने कहा कि बड़े कॉलेज, विश्वविद्यालय और अधिकारियों के भवन तो सुविधाओं से लैस होते हैं, लेकिन जहां छोटे बच्चे आते हैं, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी रही. यही कारण है कि अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उनका कहना था कि यदि आंगनबाड़ी मजबूत होंगी तो बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होगा और आगे चलकर यही बच्चे देश की प्रगति में योगदान देंगे.
2019 के बाद निरीक्षण से सामने आई हकीकत
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बताया कि वर्ष 2019 में पदभार संभालने के बाद जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया, तो कई कमियां सामने आईं. संसाधनों की कमी, भवनों की स्थिति और बच्चों की सुविधाओं को लेकर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी था. सीमित बजट के कारण सरकार ने जनसहयोग का रास्ता अपनाया. इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए.
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 50 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में 22 से 25 हजार रुपये मूल्य के करीब 22 प्रकार के आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा चुके हैं. इन संसाधनों में बच्चों की पढ़ाई, खेल और पोषण से जुड़ी सामग्री शामिल है. राज्यपाल ने इसे समाज और सरकार की साझी जिम्मेदारी का सफल उदाहरण बताया.
एसआईआर पर राज्यपाल का स्पष्ट संदेश, विरोध पर सवाल
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट रुख रखा. उन्होंने कहा कि एसआईआर का कार्य लगातार चल रहा है और यह साफ हो चुका है कि देश में अवैध रूप से घुसे लोगों की पहचान की जा रही है. जो घुसपैठिए हैं, उन्हें बाहर निकालने का काम सरकारें कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है, इसलिए इसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए. राज्यपाल ने कहा कि जब व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का प्रयास हो रहा है, तो सभी को सहयोग करना चाहिए. उन्होंने प्रशासन से भी इस प्रक्रिया को संवेदनशीलता और नियमों के अनुरूप पूरा करने की अपील की.
स्वास्थ्य पर फोकस, एचपीवी वैक्सीनेशन को प्राथमिकता
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर चल रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान पर विशेष जोर दिया. उन्होंने जिला अधिकारी से आग्रह किया कि जनसहयोग के माध्यम से सरस्वती विद्या मंदिर और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्ययनरत सभी पात्र छात्राओं को प्राथमिकता के आधार पर यह टीका लगाया जाए.
इसके साथ ही पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए गए कि पुलिस कॉलोनियों का सर्वे कर 9 से 15 वर्ष की आयु की बच्चियों की सूची तैयार की जाए और उनका टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए. राज्यपाल ने कहा कि पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सुरक्षा में लगे रहते हैं, इसलिए उनके परिवारों और बेटियों की सुरक्षा भी समाज और सरकार का दायित्व है. इस अभियान का उद्देश्य बेटियों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाना और उन्हें स्वस्थ भविष्य देना है.
Fatehpur News: बच्चों के भविष्य की नींव क्यों हैं आंगनबाड़ी केंद्र, फतेहपुर पहुंचीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने क्या कहा?
Fatehpur News: यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को फतेहपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने शिक्षा, पोषण और बाल स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की. सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी व्यवस्था, एसआईआर प्रक्रिया और बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़ी सरकारी प्राथमिकताओं को विस्तार से सामने रखा.
अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ, निगरानी जरूरी
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का फतेहपुर दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक देखने को मिली. सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में आयोजित समारोह में उन्होंने विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण किया, जिससे छात्राओं को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध होगा.
इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को उपयोगी किट वितरित की गईं, जिनमें बच्चों की देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े आवश्यक संसाधन शामिल थे. महिलाओं को पोषण किट देकर सरकार की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया. साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया.
राज्यपाल ने कहा कि जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचता है, तभी शासन की सार्थकता सिद्ध होती है. उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से निरंतर निगरानी और संवेदनशीलता के साथ काम करने का आह्वान किया.
बच्चों के लिए क्यों जरूरी हैं आंगनबाड़ी केंद्र
अपने संबोधन में राज्यपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शून्य से छह वर्ष की आयु बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है. इसी उम्र में पोषण, संस्कार और प्रारंभिक शिक्षा की नींव पड़ती है. आंगनबाड़ी केंद्र इस नींव का सबसे मजबूत आधार हैं, लेकिन लंबे समय तक इन्हें वह प्राथमिकता नहीं मिली जिसकी जरूरत थी.
उन्होंने कहा कि बड़े कॉलेज, विश्वविद्यालय और अधिकारियों के भवन तो सुविधाओं से लैस होते हैं, लेकिन जहां छोटे बच्चे आते हैं, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी रही. यही कारण है कि अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उनका कहना था कि यदि आंगनबाड़ी मजबूत होंगी तो बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होगा और आगे चलकर यही बच्चे देश की प्रगति में योगदान देंगे.
2019 के बाद निरीक्षण से सामने आई हकीकत
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बताया कि वर्ष 2019 में पदभार संभालने के बाद जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया, तो कई कमियां सामने आईं. संसाधनों की कमी, भवनों की स्थिति और बच्चों की सुविधाओं को लेकर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी था. सीमित बजट के कारण सरकार ने जनसहयोग का रास्ता अपनाया. इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए.
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 50 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में 22 से 25 हजार रुपये मूल्य के करीब 22 प्रकार के आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा चुके हैं. इन संसाधनों में बच्चों की पढ़ाई, खेल और पोषण से जुड़ी सामग्री शामिल है. राज्यपाल ने इसे समाज और सरकार की साझी जिम्मेदारी का सफल उदाहरण बताया.
एसआईआर पर राज्यपाल का स्पष्ट संदेश, विरोध पर सवाल
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट रुख रखा. उन्होंने कहा कि एसआईआर का कार्य लगातार चल रहा है और यह साफ हो चुका है कि देश में अवैध रूप से घुसे लोगों की पहचान की जा रही है. जो घुसपैठिए हैं, उन्हें बाहर निकालने का काम सरकारें कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है, इसलिए इसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए. राज्यपाल ने कहा कि जब व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का प्रयास हो रहा है, तो सभी को सहयोग करना चाहिए. उन्होंने प्रशासन से भी इस प्रक्रिया को संवेदनशीलता और नियमों के अनुरूप पूरा करने की अपील की.
स्वास्थ्य पर फोकस, एचपीवी वैक्सीनेशन को प्राथमिकता
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर चल रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान पर विशेष जोर दिया. उन्होंने जिला अधिकारी से आग्रह किया कि जनसहयोग के माध्यम से सरस्वती विद्या मंदिर और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्ययनरत सभी पात्र छात्राओं को प्राथमिकता के आधार पर यह टीका लगाया जाए.
इसके साथ ही पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए गए कि पुलिस कॉलोनियों का सर्वे कर 9 से 15 वर्ष की आयु की बच्चियों की सूची तैयार की जाए और उनका टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए. राज्यपाल ने कहा कि पुलिसकर्मी दिन-रात जनता की सुरक्षा में लगे रहते हैं, इसलिए उनके परिवारों और बेटियों की सुरक्षा भी समाज और सरकार का दायित्व है. इस अभियान का उद्देश्य बेटियों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाना और उन्हें स्वस्थ भविष्य देना है.