
Fatehpur News: पत्नी की हत्या में भोजपुरी फिल्म लेखक पति और अभिनेत्री प्रेमिका को उम्रकैद, पढ़िए मर्डर मिस्ट्री
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में पत्नी योगमाया की हत्या के मामले में अदालत ने भोजपुरी फिल्म लेखक इंद्रमोहन लोधी और उसकी अभिनेत्री प्रेमिका नेहा वर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. करीब पांच साल तक चली सुनवाई में नौ गवाहों की गवाही और डीएनए जांच के साक्ष्य अहम साबित हुए. मां की हत्या के बाद अनाथ हुए नाबालिग बेटे को मुआवजा दिलाने के लिए भी अदालत ने सरकार से संस्तुति की है.
Fatehpur News: भोजपुरी फिल्म की कहानी लिखने वाले पति और अभिनेत्री प्रेमिका की असल जिंदगी का एक खौफनाक मामला अदालत के फैसले के साथ फिर चर्चा में है. पत्नी की हत्या के करीब पांच साल बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. इस वारदात में एक डेढ़ साल के मासूम बच्चे के सिर से मां का साया उठ गया था, जो अब अपनी दादी और बाबा के साथ रह रहा है.
पत्नी की हत्या में पति और प्रेमिका को उम्रकैद

इस मामले में 30 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया था. इसके बाद शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए उम्रकैद का फैसला सुनाया गया.
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डीएनए जांच ने खोले अहम राज, नेहा की संलिप्तता साबित करने में मिली मदद

इन नमूनों की डीएनए जांच कराई गई. जांच में मिले नमूनों का मिलान नेहा वर्मा के डीएनए से हुआ. अभियोजन पक्ष ने अदालत में इस वैज्ञानिक साक्ष्य को अहम आधार के रूप में पेश किया. मामले की सुनवाई के दौरान कुल नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. करीब पांच साल तक चली कानूनी कार्रवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी माना.
भोजपुरी फिल्म 'पश्चाताप' से जुड़ी थी दोनों की कहानी
इस मामले का एक दिलचस्प लेकिन दुखद पहलू भोजपुरी फिल्म 'पश्चाताप' से भी जुड़ा है. इंद्रमोहन ने इस फिल्म का लेखन किया था. फिल्म का निर्माण वर्ष 2015 से पहले हुआ था और अभिनेत्री नेहा वर्मा ने भी इसमें छोटी भूमिका निभाई थी.
बताया जाता है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं. इसके बाद दोनों ने भोजपुरी में कई एल्बम भी बनाए और लंबे समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहे. दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना भी शुरू हो गया था.
विडंबना यह है कि जिस फिल्म का नाम 'पश्चाताप' था, उसके लेखक और अभिनेत्री को असल जिंदगी में हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा मिली है.
मां की हत्या के बाद दादी-बाबा के साथ रह रहा था बेटा
योगमाया की हत्या के समय उसका बेटा महज डेढ़ साल का था. मां की हत्या के बाद बच्चे की जिंदगी पूरी तरह बदल गई. अब वह आठ साल का हो चुका है और अपनी दादी कृष्णा देवी तथा बाबा चंद्रमोहन के साथ रह रहा है.
सजा सुनाए जाने की खबर के बाद इंद्रमोहन से उसके बेटे सात्विक को मिलाने के लिए परिवार के लोग उसे कचहरी लेकर पहुंचे थे. वहां इंद्रमोहन और नेहा की आंखें भी नम नजर आईं. हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान उस बच्चे को उठाना पड़ा, जिसने बेहद कम उम्र में अपनी मां को खो दिया.
अदालत ने कहा- मां की क्षति की भरपाई नहीं कर सकता जुर्माना
फैसला सुनाते हुए अदालत ने नाबालिग बेटे की स्थिति पर विशेष टिप्पणी की. न्यायालय ने माना कि मां की हत्या के बाद सबसे अधिक पीड़ा उसके नाबालिग बेटे को झेलनी पड़ी है.
अदालत ने कहा कि दोषियों पर लगाया गया अर्थदंड मां की कमी और बच्चे को हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार से बच्चे को उचित मुआवजा दिलाने की संस्तुति की गई है.
इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चे को मुआवजा दिलाने के लिए जरूरी पैरवी की जाए, ताकि उसे उचित आर्थिक सहायता मिल सके.
गांव में फिल्म की शूटिंग करता था इंद्रमोहन
ग्रामीणों के मुताबिक, इंद्रमोहन भोजपुरी फिल्मों के माध्यम से कम समय में अच्छी पहचान और पैसा कमाना चाहता था. वह गांव के बाहर खेरवाहार और पोखरीहार इलाके में कैमरा और फिल्म यूनिट के साथ कई-कई दिनों तक शूटिंग करता था.
भोजपुरी फिल्म 'पश्चाताप' में भी लेखक के तौर पर उसका नाम दर्ज है. ग्रामीणों ने बताया कि योगमाया स्वभाव से बेहद सीधी-सादी थी. आरोपों के मुताबिक, नेहा गांव आने पर उससे घर के कामकाज भी करवाती थी.
इंद्रमोहन के पिता चंद्रमोहन के पास करीब आठ बीघा खेती की जमीन है. उसके छोटे भाई तेजबहादुर और जंगबहादुर कारोबार के सिलसिले में बाहर रहते हैं.
