
Fatehpur News: फतेहपुर पहुंचते ही भड़के कमिश्नर, नगर पालिका ईओ पर निलंबन की कार्रवाई, सीएमओ का वेतन रोका
फतेहपुर में शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था, सड़कों पर कूड़े के ढेर और गड्ढों को देखकर प्रयागराज मंडल के मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. नाराज हो गए. उन्होंने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) को निलंबित करने के लिए शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिए. वहीं, संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 80 प्रतिशत तक पहुंचने तक सीएमओ का वेतन रोकने का आदेश दिया.
Fatehpur News: फतेहपुर में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की हकीकत परखने पहुंचे प्रयागराज मंडल के मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. को शहर की व्यवस्थाओं में कई खामियां मिलीं. शहर में गंदगी, सड़कों की बदहाली और जगह-जगह कूड़े के ढेर देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा. समीक्षा बैठक में उन्होंने नगर पालिका के ईओ को जमकर फटकार लगाई और निलंबन की कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखने के निर्देश दिए. स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान संस्थागत प्रसव में सुधार नहीं मिलने पर सीएमओ का वेतन रोकने का आदेश भी दिया.
शहर की गंदगी देखकर नाराज हुए मंडलायुक्त
मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक के दौरान मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने सबसे पहले नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) के बारे में पूछा. ईओ के सामने आते ही उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जताई.
मंडलायुक्त ने कहा कि शहर की सीमा में प्रवेश करते ही विकास कार्यों और साफ-सफाई की वास्तविक स्थिति दिखाई देने लगी. सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर पड़े हैं. आखिर कई दिनों से इन कूड़ों को क्यों नहीं उठाया गया?
उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार होना चाहिए. लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका के ईओ को निलंबित करने के लिए शासन को पत्र लिखने के निर्देश दिए.
खागा में 190 होम डिलीवरी, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मंडलायुक्त ने खागा क्षेत्र में 190 महिलाओं के घर पर प्रसव होने की रिपोर्ट पर चिंता जताई. उन्होंने सीएमओ से सवाल किया कि जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की डिलीवरी घरों पर हो रही है तो क्षेत्र में तैनात एएनएम और आशा कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रही हैं?
उन्होंने संस्थागत प्रसव के आंकड़ों पर भी नाराजगी जताई. जिले में अस्पतालों में होने वाले प्रसव का प्रतिशत करीब 60 पर ही अटका हुआ है. मंडलायुक्त ने सीएमओ से पूछा कि आखिर इसमें सुधार क्यों नहीं हो रहा है.
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने सख्त फैसला लेते हुए निर्देश दिया कि जब तक संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 60 से बढ़कर 80 तक नहीं पहुंच जाता, तब तक सीएमओ का वेतन रोका जाए.
कुपोषित बच्चों के परिवारों को योजनाओं से जोड़ने के निर्देश
मंडलायुक्त ने जिले में कुपोषण की स्थिति की भी समीक्षा की. उन्होंने निर्देश दिए कि चिन्हित कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को सरकार की अलग-अलग जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए.
इसके लिए परिवारों को निम्नलिखित योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया:
- शौचालय योजना.
- पेंशन योजना.
- मनरेगा जॉब कार्ड.
- राशन कार्ड.
- प्रधानमंत्री आवास योजना.
- आयुष्मान कार्ड.
- स्वयं सहायता समूह.
मंडलायुक्त ने कहा कि जब बच्चों के माता-पिता और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी तो बच्चों के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा.
उन्होंने सैम श्रेणी में आने वाले बच्चों की नियमित लंबाई और वजन की जांच कराने के निर्देश दिए. साथ ही ऐसे बच्चों के परिवारों को समय से पोषाहार और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा.
जल जीवन मिशन की पानी की टंकियों की होगी गुणवत्ता जांच
जल जीवन मिशन के तहत जिले में बनाई गई पानी की टंकियों और पूरी हो चुकी अन्य विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भी मंडलायुक्त ने सख्त रुख अपनाया.
उन्होंने जिला स्तरीय अधिकारियों को सभी संबंधित परियोजनाओं की जांच करने के निर्देश दिए. इसके लिए एक सप्ताह की समयसीमा निर्धारित करते हुए जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा.
मंडलायुक्त ने एडीएम को ग्राम समाज की जमीन, खलिहान, परती भूमि, तालाब और चारागाह जैसी सरकारी संपत्तियों को संपत्ति रजिस्टर में दर्ज कराने के निर्देश दिए.
उन्होंने इन जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने को भी कहा. इसके अलावा जिले के तालाबों की सूची सीडीओ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि उनके सौंदर्यीकरण का काम कराया जा सके.
दीपावली से पहले सड़कों को गड्ढामुक्त करने का आदेश
आगामी दीपावली पर्व को लेकर भी मंडलायुक्त ने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि त्योहार को भव्य तरीके से मनाने की तैयारी की जाए. दीपक बनाने का काम स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सौंपने पर जोर दिया, जिससे महिलाओं को रोजगार और आमदनी का अवसर मिल सके.
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों को जिले की सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के निर्देश दिए गए. साथ ही सड़कों की मरम्मत के बाद उनकी तस्वीरों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया.
जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को गांवों में बने शौचालयों की मरम्मत कराने और उनकी रंगाई-पुताई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.
समीक्षा बैठक में मौजूद रहे जिले के वरिष्ठ अधिकारी
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स, मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी यूबी सिंह, पीडी डीआरडीए शेषमणि सिंह, विभिन्न विभागों के अधिकारी और एसडीएम समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
मंडलायुक्त के सख्त रुख के बाद अब नगर पालिका की सफाई व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग में संस्थागत प्रसव की स्थिति और विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद है.
