
Fatehpur News: नौसेना में देश की सेवा, फिर बने यूपी पुलिस में दरोगा ! परिवार के लिए छोड़ी नौकरी, सड़क हादसे में बैंक कैशियर की मौत
फतेहपुर में परिवार के साथ रहने के लिए यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर बैंक में कैशियर बने अविनाश कुमार उमराव की सड़क हादसे में मौत हो गई. नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पुलिस और फिर बैंक में नौकरी हासिल की थी. मंगलवार शाम ड्यूटी से घर लौटते समय हुसैनगंज क्षेत्र में उनकी बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी. कानपुर में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. उनकी मौत से परिवार में मातम पसरा है.
Fatehpur Accident: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक सड़क हादसे ने सब कुछ बिखेर दिया है. परिवार के साथ जिंदगी बिताने और अपने बच्चों के करीब रहने के लिए एक शख्स ने पुलिस विभाग की नौकरी तक छोड़ दी, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था. नौसेना में देश की सेवा करने के बाद यूपी पुलिस में दरोगा बने अविनाश कुमार उमराव ने अपने गृह जनपद में बैंक की नौकरी हासिल की थी. मंगलवार शाम ड्यूटी से घर लौटते समय सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए. कानपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
ड्यूटी से घर लौटते समय हुआ हादसा
फतेहपुर जिले के बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के नाथूखेड़ा गांव निवासी अविनाश कुमार उमराव (41) छिवलहा स्थित इंडियन बैंक शाखा में कैशियर के पद पर तैनात थे. मंगलवार को बैंक में ड्यूटी पूरी करने के बाद वह बाइक से अपने घर के लिए निकले थे.
बताया जा रहा है कि शाम करीब पांच बजे के बाद वह बैंक से रवाना हुए थे. इसी दौरान हुसैनगंज थाना क्षेत्र के मथैयापुर मोड़ के पास किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी. हादसे में अविनाश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े.
सीएचसी से मेडिकल कॉलेज रेफर, कानपुर में तोड़ा दम
हादसे के बाद एक व्यक्ति घायल अविनाश को एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचा. उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया.
हालांकि, हालत में सुधार नहीं होने पर परिजन उन्हें बेहतर इलाज के लिए कानपुर के एक निजी नर्सिंग होम ले गए. वहां डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. डॉक्टरों के मुताबिक, हादसे में अविनाश के सीने और सिर में गंभीर चोटें आई थीं. इन्हीं चोटों के चलते उनकी जान चली गई.
हुसैनगंज थाना प्रभारी निरीक्षक तारकेश्वर राय ने बताया कि दुर्घटना में शामिल वाहन की तलाश की जा रही है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
नौसेना में दी सेवा, फिर यूपी पुलिस में बने थे दरोगा
अविनाश कुमार उमराव का नौकरी का सफर भी काफी खास रहा. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय नौसेना में सेवा देकर की थी. वर्ष 2020 में वह नौसेना से सेवानिवृत्त हुए थे.
इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2022 में सफलता हासिल की. चयन होने के बाद उन्हें अयोध्या जिले में दरोगा के पद पर तैनाती मिली. करीब तीन वर्ष तक उन्होंने पुलिस विभाग में सेवाएं दीं.
लेकिन पुलिस की नौकरी के दौरान परिवार से दूर रहना उनके लिए मुश्किल हो रहा था. वह चाहते थे कि अपने गृह जनपद में रहकर पत्नी और बच्चों के साथ समय बिता सकें. इसी वजह से उन्होंने बैंक की नौकरी पाने के लिए तैयारी शुरू कर दी.
परिवार के करीब रहने के लिए छोड़ दी थी दरोगा की नौकरी
अयोध्या में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनाती के दौरान ही अविनाश ने बैंक भर्ती परीक्षा दी थी. इस परीक्षा में उनका चयन इंडियन बैंक में क्लर्क के पद पर हो गया.
गृह जनपद में नौकरी मिलने के बाद उन्होंने 28 जून को यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्हें छिवलहा स्थित इंडियन बैंक शाखा में कैशियर के पद पर जिम्मेदारी मिली.
हालांकि, बैंक की नौकरी मिलने के बाद भी उन्हें रोजाना लंबा सफर तय करना पड़ता था. वह घर से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित शाखा तक बाइक से आते-जाते थे. मंगलवार को भी वह रोजाना की तरह ड्यूटी पूरी करके घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली.
पत्नी सहायक अध्यापक, दो छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
अविनाश कुमार उमराव का परिवार लंबे समय से बिंदकी कस्बे की नई कॉलोनी में रह रहा था. उनके पिता राम नारायण वर्मा सेवानिवृत्त अध्यापक हैं, जबकि उनकी मां प्रेमवती एएनएम के पद से रिटायर हो चुकी हैं.
अविनाश की शादी वर्ष 2018 में रेनू के साथ हुई थी. उनकी पत्नी रेनू मलवां ब्लॉक में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं. दंपती के दो बच्चे हैं. इनमें बेटी आरोही की उम्र छह वर्ष और बेटे अक्षांश की उम्र पांच वर्ष है.
जिस परिवार के साथ समय बिताने के लिए अविनाश ने अयोध्या में दरोगा की नौकरी छोड़कर अपने जिले में बैंक की नौकरी चुनी थी, उसी परिवार को अब उनके जाने का गहरा दुख झेलना पड़ रहा है. दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है. बुधवार को अविनाश का अंतिम संस्कार कर दिया गया. हादसे के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
