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Fatehpur News: भाजपा नेता और मंत्री के करीबी रिंकू लोहारी सहित 5 भेजे गए जेल ! प्रदेश कांग्रेस ने उठाया फतेहपुर का मुद्दा

Fatehpur News: भाजपा नेता और मंत्री के करीबी रिंकू लोहारी सहित 5 भेजे गए जेल ! प्रदेश कांग्रेस ने उठाया फतेहपुर का मुद्दा
भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य रिंकू लोहारी सहित 5 भेजे गएं जेल: Image Credit Original Source

फतेहपुर के हसवा में कानपुर-प्रयागराज हाईवे किनारे करोड़ों की जमीन पर कब्जे को लेकर हुए विवाद में पुलिस ने भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी समेत 5 आरोपियों को जेल भेज दिया है. पुलिस जांच में रिंकू पक्ष से आठ राउंड फायरिंग की पुष्टि का दावा किया गया है. दो फरार आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं.

Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में करोड़ों की विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर हुआ बवाल अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है. थरियांव थाना क्षेत्र के हसवा हाईवे किनारे दो पक्षों के बीच मारपीट और फायरिंग के मामले में पुलिस ने भाजपा नेता अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी समेत 5 आरोपियों को जेल भेज दिया है. पुलिस ने फायरिंग की पुष्टि का दावा करते हुए दो फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया है. वहीं प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए इस मामले को लेकर भाजपा और सरकार पर निशाना साधा है.

करोड़ों की जमीन पर कब्जे को लेकर हुआ था बवाल

पूरा मामला थरियांव थाना क्षेत्र के हसवा में कानपुर-प्रयागराज हाईवे किनारे स्थित बेशकीमती जमीन से जुड़ा है. जमीन की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है और इसके मालिकाना हक तथा वरासत को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है.

बताया गया है कि विवादित जमीन की हदबंदी के आदेश के आधार पर बुधवार को कब्जे की कोशिश की जा रही थी. इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. देखते ही देखते मामला मारपीट और फायरिंग तक पहुंच गया. घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था.

रिंकू लोहारी पक्ष से आठ राउंड फायरिंग का पुलिस का दावा

पुलिस की विवेचना में सामने आया कि घटना में फायरिंग अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी पक्ष की ओर से हुई. एसपी अभिमन्यु मांगलिक के मुताबिक जांच में भाजपा नेता के पक्ष से फायरिंग की पुष्टि हुई है. पुलिस का दावा है कि कुल आठ राउंड गोलियां चलाई गईं.

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पुलिस के अनुसार गाजीपुर थाना क्षेत्र के सेवरामऊ निवासी हिस्ट्रीशीटर बलराम मिश्रा ने राइफल से फायरिंग की. उसका भाई गजानन मिश्रा भी घटना में शामिल बताया गया है.

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रिंकू लोहारी समेत 5 आरोपी जेल भेजे गए

पुलिस ने मामले में भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी, बलराम मिश्रा, पुत्तू उर्फ सुरेंद्र और गुड्डू पटेल को गिरफ्तार किया.

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इसके अलावा मामले में एक अन्य आरोपी को भी जेल भेजे जाने की कार्रवाई की गई है. इस तरह पुलिस कार्रवाई में कुल 5 आरोपियों को जेल भेजा गया है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात कही है.

दो फरार आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम

मामले में छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री दीपू पटेल और हिस्ट्रीशीटर गजानन मिश्रा अभी पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं.

एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने दोनों फरार आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है. पुलिस ने एक राइफल बरामद करने की जानकारी दी है, जबकि दूसरी राइफल की तलाश में दबिश जारी होने की बात कही गई है. वहीं भाजपा नेता से जुड़ी दो कारों को भी पुलिस ने सीज किया है.

दूसरे पक्ष के तीन लोगों का शांतिभंग में चालान

घटना में दूसरे पक्ष के कृष्णा सिंह उर्फ ननकी के पुत्र वीरेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह और शुभम सिंह राठौर का पुलिस ने शांतिभंग में चालान किया था. विहिप नेता अजयराज सिंह और देवेंद्र सिंह के जिला अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है. पुलिस के अनुसार दूसरे पक्ष के पास भी कई असलहे होने की बात सामने आई, लेकिन जांच में घटना के दौरान उनकी संलिप्तता नहीं मिली.

1998 से चला आ रहा है संपत्ति का विवाद

विवादित जमीन हसवा निवासी स्वर्गीय सूर्यभान सिंह की संपत्ति से जुड़ी बताई जा रही है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस संपत्ति को लेकर विवाद की जड़ वर्ष 1998 तक जाती है.

बताया जाता है कि सूर्यभान सिंह 90 के दशक में कानपुर में रहकर कारोबार करते थे. उनकी पत्नी कृष्णा उर्फ ननकी और तीन बेटे वीरेंद्र सिंह, शुभम सिंह और सत्येंद्र सिंह हैं.

सूर्यभान सिंह के मामा रामचंद्र की पत्नी सुनैना देवी को रिश्ते में मामी बताया जाता है. रामचंद्र का परिवार भी लंबे समय से कानपुर के किदवई नगर में रहता था.

ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रधान शहजादे की मौजूदगी में सूर्यभान सिंह ने अपनी संपत्ति के एक हिस्से की वरासत सुनैना देवी के नाम की थी. इसी दौरान उनकी मृत्यु हो गई. इसके बाद कृष्णा उर्फ ननकी ने संपत्ति पर आपत्ति दर्ज कराई.

1999 में सुनैना देवी की वरासत हुई थी खारिज

तहसील न्यायालय ने वर्ष 1999 में सुनैना देवी की वरासत को खारिज कर दिया था. इसके बाद 25 सितंबर 2012 और 22 दिसंबर 2014 को दोबारा सुनैना देवी के नाम वरासत कराए जाने की जानकारी सामने आई.

कृष्णा उर्फ ननकी ने इन दोनों आदेशों को चुनौती दी. सुनवाई के बाद तत्कालीन सदर तहसीलदार एसपी विश्वकर्मा ने 12 अप्रैल 2016 को सुनैना देवी के नाम दोनों वरासत आदेशों को खारिज कर दिया. उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक इस मामले की कार्रवाई में तत्कालीन लेखपाल को भी निलंबित किया गया था.

2023 में फिर सामने आया वरासत का मामला

वर्ष 2023 में सदर तहसीलदार की अदालत से सुनैना देवी और उनके पुत्र कंचन सिंह तथा सुधाकर सिंह के नाम फिर वरासत किए जाने की जानकारी सामने आई.

कृष्णा देवी की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें जानकारी दिए बिना एकपक्षीय आदेश कराया गया. इसके खिलाफ उन्होंने रेस्टोरेशन याचिका दाखिल की.

इसके बाद अप्रैल 2026 में हुई राजस्व कार्रवाई में कृष्णा देवी और उनके पुत्र वीरेंद्र, सत्येंद्र तथा शुभम सिंह के नाम वरासत में दर्ज किए गए. वहीं सुनैना देवी पक्ष की वरासत खारिज हो गई.

रिंकू लोहारी पक्ष ने 2025 में कराया बैनामा

विवादित जमीन को लेकर उपलब्ध विवरण के मुताबिक वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी समेत तीन लोगों ने बैनामा कराया था. इसके बाद जमीन की हदबंदी के लिए तहसील प्रशासन से मांग की गई.

नायब तहसीलदार लक्ष्मी बाजपेई की अदालत ने 15 अप्रैल 2026 को हदबंदी का आदेश पारित किया था. आरोप है कि हदबंदी के आदेश के आधार पर बुधवार को जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई और इसी दौरान विवाद बढ़ गया. दूसरे पक्ष की ओर से हदबंदी के आदेश को भी चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है.

पुराने राजस्व आदेश को लेकर भी विवाद

इस पूरे मामले में वर्ष 1999 में जारी वरासत खारिज आदेश और बाद के राजस्व आदेश भी महत्वपूर्ण हैं. दूसरे पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि 1999 में वरासत खारिज होने के बावजूद बाद की कार्यवाही में पुराने आदेशों से संबंधित रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया.

वहीं जमीन से जुड़े अलग-अलग पक्ष अपने दस्तावेजों और राजस्व आदेशों के आधार पर अधिकार का दावा कर रहे हैं. संपत्ति के मालिकाना हक की अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक और राजस्व प्रक्रिया से स्पष्ट होगी.

कृष्णा देवी ने कानपुर की संपत्ति को लेकर भी लगाए आरोप

कृष्णा देवी की ओर से दावा किया गया है कि उनके पति का कानपुर में समाजवादी पार्टी से जुड़े पद पर रहते हुए राजनीतिक और सामाजिक संपर्क था.

उन्होंने आरोप लगाया कि सुनैना देवी को कानपुर में भी काफी संपत्ति दी गई थी. उनके मुताबिक बाबूपुरवा क्षेत्र में करीब 40 दुकानों पर वर्तमान में सुनैना देवी पक्ष का कब्जा है.

कृष्णा देवी का कहना है कि उनके परिवार ने कभी कानपुर की संपत्ति पर अपना दावा नहीं किया. उन्होंने परेड और किदवई नगर में मकान दिए जाने का भी दावा किया है.

प्रदेश कांग्रेस ने एक्स पर उठाया फतेहपुर का मुद्दा

फतेहपुर की इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर सवाल उठाए. कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी को मंत्री राकेश सचान का करीबी बताते हुए जमीन विवाद में हुई फायरिंग को लेकर सवाल उठाया.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण में ऐसे लोगों को बढ़ावा मिल रहा है और मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग की. कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल किया कि मंत्री की शह पर गोली चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कब होगी.

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