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Uttar Pradesh: पति को खाट से बांधकर जिंदा जलाने वाली पत्नी और साले को आजीवन कारावास, जानिए क्या था पूरा मामला

Uttar Pradesh: पति को खाट से बांधकर जिंदा जलाने वाली पत्नी और साले को आजीवन कारावास, जानिए क्या था पूरा मामला
फतेहपुर में पति को जिंदा जलाने के प्रकरण में पत्नी और साले को उम्रकैद: Image Credit Original Source

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में 12 साल पुराने चर्चित हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने पति को खाट से बांधकर जिंदा जलाने के मामले में पत्नी और उसके भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जबकि सास को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया.

Fatehpur Court News: फतेहपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने वर्ष 2014 के बहुचर्चित हत्याकांड में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है. अदालत ने पति को खाट से बांधकर जिंदा जलाने के मामले में पत्नी और उसके भाई को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में मृतक के पिता की चश्मदीद गवाही अभियोजन पक्ष की सबसे मजबूत कड़ी साबित हुई.

12 साल बाद आया अदालत का बड़ा फैसला

जानकारी के मुताबिक जिले में पति की निर्मम हत्या के 12 साल पुराने चर्चित मामले में बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) के न्यायाधीश अजय सिंह ने फैसला सुनाया. अदालत ने पत्नी नीलम देवी और उसके भाई राजू को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया. वहीं, साक्ष्यों के अभाव में मृतक की सास जयरानी को आरोपों से बरी कर दिया गया.

क्या था पूरा मामला?

शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह के अनुसार, चांदपुर थाना क्षेत्र के भगलापुर गांव निवासी अरुण कुमार की शादी बकेवर थाना क्षेत्र के नहरामऊ गांव की रहने वाली नीलम देवी से हुई थी.

तीन अक्टूबर 2014 को नीलम के भतीजे का मुंडन कार्यक्रम भगलापुर स्थित मंदिर में आयोजित था. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद चार अक्टूबर को रिश्तेदार ट्रैक्टर से वापस लौट रहे थे. इसी दौरान नीलम भी मायके जाने के लिए ट्रैक्टर पर बैठ गई, लेकिन अरुण ने उसे नीचे उतार लिया. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और मामला चांदपुर थाने पहुंच गया.

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थाने में समझौता हुआ, फिर घर पहुंचते ही हुई वारदात

थाने में करीब चार घंटे तक चली पंचायत के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया. तय हुआ कि नीलम फिलहाल मायके जाएगी और करवाचौथ से पहले अरुण उसे सम्मानपूर्वक विदा कराकर वापस ले आएगा.

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समझौते के बाद अरुण अपनी पत्नी नीलम और साले राजू के साथ घर पहुंचा. बताया गया कि नीलम को घर से कपड़े लेकर मायके जाना था. इसी दौरान अरुण के हाथ-पैर खाट से बांध दिए गए और उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई. गंभीर रूप से झुलसे अरुण को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

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पिता की चश्मदीद गवाही बनी सबसे अहम सबूत

मृतक के पिता शिवमंगल सिंह ने अदालत में बताया कि जब वह घर पहुंचे तो उन्होंने नीलम और राजू को घर की कुंडी बंद कर बाहर निकलते देखा. उसी समय घर के भीतर से धुआं उठ रहा था.

उन्होंने दरवाजा खोलकर अंदर देखा तो अरुण बुरी तरह जला हुआ पड़ा था. अरुण ने अंतिम समय में बताया कि राजू ने उसे बांधा था और पत्नी नीलम ने उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी. अदालत ने इस बयान और पिता की प्रत्यक्षदर्शी गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना.

छह गवाहों के बयान से मजबूत हुआ अभियोजन पक्ष

शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाह पेश किए गए. इनमें मृतक के पिता शिवमंगल सिंह की गवाही सबसे महत्वपूर्ण रही. अदालत ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद नीलम और राजू को दोषी ठहराया.

सास को क्यों मिली राहत?

अभियोजन के अनुसार, घटना के समय जयरानी थाने में मौजूद थी. उसके घटनास्थल पर होने का कोई ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका. इसी आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी कर दिया.

फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने पत्नी नीलम देवी और उसके भाई राजू को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

16 Jul 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

Uttar Pradesh: पति को खाट से बांधकर जिंदा जलाने वाली पत्नी और साले को आजीवन कारावास, जानिए क्या था पूरा मामला

Fatehpur Court News: फतेहपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने वर्ष 2014 के बहुचर्चित हत्याकांड में लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है. अदालत ने पति को खाट से बांधकर जिंदा जलाने के मामले में पत्नी और उसके भाई को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस मामले में मृतक के पिता की चश्मदीद गवाही अभियोजन पक्ष की सबसे मजबूत कड़ी साबित हुई.

12 साल बाद आया अदालत का बड़ा फैसला

जानकारी के मुताबिक जिले में पति की निर्मम हत्या के 12 साल पुराने चर्चित मामले में बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) के न्यायाधीश अजय सिंह ने फैसला सुनाया. अदालत ने पत्नी नीलम देवी और उसके भाई राजू को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया. वहीं, साक्ष्यों के अभाव में मृतक की सास जयरानी को आरोपों से बरी कर दिया गया.

क्या था पूरा मामला?

शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह के अनुसार, चांदपुर थाना क्षेत्र के भगलापुर गांव निवासी अरुण कुमार की शादी बकेवर थाना क्षेत्र के नहरामऊ गांव की रहने वाली नीलम देवी से हुई थी.

तीन अक्टूबर 2014 को नीलम के भतीजे का मुंडन कार्यक्रम भगलापुर स्थित मंदिर में आयोजित था. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद चार अक्टूबर को रिश्तेदार ट्रैक्टर से वापस लौट रहे थे. इसी दौरान नीलम भी मायके जाने के लिए ट्रैक्टर पर बैठ गई, लेकिन अरुण ने उसे नीचे उतार लिया. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और मामला चांदपुर थाने पहुंच गया.

थाने में समझौता हुआ, फिर घर पहुंचते ही हुई वारदात

थाने में करीब चार घंटे तक चली पंचायत के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया. तय हुआ कि नीलम फिलहाल मायके जाएगी और करवाचौथ से पहले अरुण उसे सम्मानपूर्वक विदा कराकर वापस ले आएगा.

समझौते के बाद अरुण अपनी पत्नी नीलम और साले राजू के साथ घर पहुंचा. बताया गया कि नीलम को घर से कपड़े लेकर मायके जाना था. इसी दौरान अरुण के हाथ-पैर खाट से बांध दिए गए और उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई. गंभीर रूप से झुलसे अरुण को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

पिता की चश्मदीद गवाही बनी सबसे अहम सबूत

मृतक के पिता शिवमंगल सिंह ने अदालत में बताया कि जब वह घर पहुंचे तो उन्होंने नीलम और राजू को घर की कुंडी बंद कर बाहर निकलते देखा. उसी समय घर के भीतर से धुआं उठ रहा था.

उन्होंने दरवाजा खोलकर अंदर देखा तो अरुण बुरी तरह जला हुआ पड़ा था. अरुण ने अंतिम समय में बताया कि राजू ने उसे बांधा था और पत्नी नीलम ने उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी. अदालत ने इस बयान और पिता की प्रत्यक्षदर्शी गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना.

छह गवाहों के बयान से मजबूत हुआ अभियोजन पक्ष

शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाह पेश किए गए. इनमें मृतक के पिता शिवमंगल सिंह की गवाही सबसे महत्वपूर्ण रही. अदालत ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद नीलम और राजू को दोषी ठहराया.

सास को क्यों मिली राहत?

अभियोजन के अनुसार, घटना के समय जयरानी थाने में मौजूद थी. उसके घटनास्थल पर होने का कोई ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका. इसी आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी कर दिया.

फास्ट ट्रैक कोर्ट (द्वितीय) ने पत्नी नीलम देवी और उसके भाई राजू को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

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