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One Nation One Election: एक देश-एक चुनाव पर गरमाई सियासत, JPC की बैठक में पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी राय

One Nation One Election: एक देश-एक चुनाव पर गरमाई सियासत, JPC की बैठक में पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी राय
वन नेशन वन इलेक्शन पर सियासत हुई गर्म, जानिए पक्ष ने क्या रखी अपनी राय: Image Credit Original Source

एक देश-एक चुनाव' को लेकर रायशुमारी कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने मंगलवार को लखनऊ में राजनीतिक दलों, विधानसभा के पदाधिकारियों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की. भाजपा ने इस व्यवस्था को विकास और संसाधनों की बचत के लिए जरूरी बताया, जबकि विपक्ष ने क्षेत्रीय मुद्दों, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए.

Lucknow News: 'एक देश-एक चुनाव' को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) मंगलवार को लखनऊ पहुंची, जहां सत्ता पक्ष, विपक्ष, विधानसभा एवं विधान परिषद के पदाधिकारियों के साथ-साथ उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए. बैठक में प्रस्ताव के संभावित लाभ और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. सत्ता पक्ष ने इसे देशहित में बड़ा कदम बताया, जबकि विपक्ष ने कई अहम आपत्तियां दर्ज कराईं.

लखनऊ में JPC ने शुरू की रायशुमारी, कई पक्षों से हुई चर्चा

'एक देश-एक चुनाव' के प्रस्ताव पर देशभर में रायशुमारी कर रही संयुक्त संसदीय समिति ने लखनऊ में विभिन्न राजनीतिक दलों, सरकारी प्रतिनिधियों और उद्योग संगठनों के साथ बैठक की. समिति का उद्देश्य सभी हितधारकों की राय लेकर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करना है, जिसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा.

केशव प्रसाद मौर्य बोले-1951 से 1967 तक साथ हुए थे चुनाव

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री सुरेश खन्ना, एके शर्मा, धर्मपाल सिंह, सूर्य प्रताप शाही और पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा.

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास परियोजनाओं में बार-बार रुकावट नहीं आएगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 से 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ सफलतापूर्वक कराए जाते रहे हैं, इसलिए यह भारत की पुरानी लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है.

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बार-बार चुनाव से समय, धन और संसाधनों पर बढ़ता है बोझ

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस प्रस्ताव का समर्थन करती है. उनके अनुसार अलग-अलग समय पर चुनाव होने से समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों पर भारी खर्च होता है. यदि चुनाव एक साथ होंगे तो प्रशासनिक मशीनरी विकास कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेगी और सरकारी खर्च में भी कमी आएगी.

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एक वोटर लिस्ट की भी उठी मांग

मंत्री एके शर्मा ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के साथ 'वन वोटर लिस्ट' लागू करने का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से अब तक लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय समेत कई चुनाव हो चुके हैं. वर्ष 2027 और 2029 में भी चुनाव प्रस्तावित हैं. इस तरह केवल आठ वर्षों में आठ चुनाव जैसी स्थिति बन जाती है, जिसका असर प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ता है.

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विधानसभा अध्यक्ष बोले-जनता के लिए भी फायदेमंद होगी व्यवस्था

संयुक्त संसदीय समिति ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह से भी चर्चा की. सतीश महाना ने कहा कि एक देश-एक चुनाव केवल नेताओं के लिए नहीं बल्कि आम जनता के लिए भी लाभकारी होगा. बार-बार चुनाव होने से शासन व्यवस्था प्रभावित होती है और विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है. यदि चुनाव एक साथ होंगे तो प्रशासन अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा.

सपा ने कहा-क्षेत्रीय मुद्दे होंगे कमजोर, कांग्रेस ने संविधान का हवाला दिया

बैठक में समाजवादी पार्टी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पार्टी का पक्ष रखा. सपा ने कहा कि यदि सभी चुनाव एक साथ होंगे तो राष्ट्रीय मुद्दे चुनावी विमर्श पर हावी हो जाएंगे और स्थानीय तथा क्षेत्रीय समस्याएं पीछे छूट जाएंगी. साथ ही चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ सकते हैं.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस प्रस्ताव को संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया. इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल (RLD), आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), माकपा (CPI-M) और अपना दल (एस) के प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां रखीं.

उद्योग संगठनों ने बताया-आचार संहिता से प्रभावित होता है विकास

बैठक में एक्जिम बैंक, राष्ट्रीय अवसंरचना वित्त एवं विकास बैंक (NaBFID), MSME मंत्रालय, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), एसोचैम (ASSOCHAM), इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, दलित चैंबर ऑफ कॉमर्स और आदर्श व्यापार मंडल सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए.

15 Jul 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

One Nation One Election: एक देश-एक चुनाव पर गरमाई सियासत, JPC की बैठक में पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी राय

Lucknow News: 'एक देश-एक चुनाव' को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) मंगलवार को लखनऊ पहुंची, जहां सत्ता पक्ष, विपक्ष, विधानसभा एवं विधान परिषद के पदाधिकारियों के साथ-साथ उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए. बैठक में प्रस्ताव के संभावित लाभ और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. सत्ता पक्ष ने इसे देशहित में बड़ा कदम बताया, जबकि विपक्ष ने कई अहम आपत्तियां दर्ज कराईं.

लखनऊ में JPC ने शुरू की रायशुमारी, कई पक्षों से हुई चर्चा

'एक देश-एक चुनाव' के प्रस्ताव पर देशभर में रायशुमारी कर रही संयुक्त संसदीय समिति ने लखनऊ में विभिन्न राजनीतिक दलों, सरकारी प्रतिनिधियों और उद्योग संगठनों के साथ बैठक की. समिति का उद्देश्य सभी हितधारकों की राय लेकर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करना है, जिसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा.

केशव प्रसाद मौर्य बोले-1951 से 1967 तक साथ हुए थे चुनाव

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री सुरेश खन्ना, एके शर्मा, धर्मपाल सिंह, सूर्य प्रताप शाही और पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा.

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास परियोजनाओं में बार-बार रुकावट नहीं आएगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 से 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ सफलतापूर्वक कराए जाते रहे हैं, इसलिए यह भारत की पुरानी लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है.

बार-बार चुनाव से समय, धन और संसाधनों पर बढ़ता है बोझ

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस प्रस्ताव का समर्थन करती है. उनके अनुसार अलग-अलग समय पर चुनाव होने से समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों पर भारी खर्च होता है. यदि चुनाव एक साथ होंगे तो प्रशासनिक मशीनरी विकास कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेगी और सरकारी खर्च में भी कमी आएगी.

एक वोटर लिस्ट की भी उठी मांग

मंत्री एके शर्मा ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के साथ 'वन वोटर लिस्ट' लागू करने का भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से अब तक लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय समेत कई चुनाव हो चुके हैं. वर्ष 2027 और 2029 में भी चुनाव प्रस्तावित हैं. इस तरह केवल आठ वर्षों में आठ चुनाव जैसी स्थिति बन जाती है, जिसका असर प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ता है.

विधानसभा अध्यक्ष बोले-जनता के लिए भी फायदेमंद होगी व्यवस्था

संयुक्त संसदीय समिति ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह से भी चर्चा की. सतीश महाना ने कहा कि एक देश-एक चुनाव केवल नेताओं के लिए नहीं बल्कि आम जनता के लिए भी लाभकारी होगा. बार-बार चुनाव होने से शासन व्यवस्था प्रभावित होती है और विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है. यदि चुनाव एक साथ होंगे तो प्रशासन अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा.

सपा ने कहा-क्षेत्रीय मुद्दे होंगे कमजोर, कांग्रेस ने संविधान का हवाला दिया

बैठक में समाजवादी पार्टी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पार्टी का पक्ष रखा. सपा ने कहा कि यदि सभी चुनाव एक साथ होंगे तो राष्ट्रीय मुद्दे चुनावी विमर्श पर हावी हो जाएंगे और स्थानीय तथा क्षेत्रीय समस्याएं पीछे छूट जाएंगी. साथ ही चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ सकते हैं.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस प्रस्ताव को संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया. इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल (RLD), आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), माकपा (CPI-M) और अपना दल (एस) के प्रतिनिधियों ने भी समिति के समक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां रखीं.

उद्योग संगठनों ने बताया-आचार संहिता से प्रभावित होता है विकास

बैठक में एक्जिम बैंक, राष्ट्रीय अवसंरचना वित्त एवं विकास बैंक (NaBFID), MSME मंत्रालय, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), एसोचैम (ASSOCHAM), इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, दलित चैंबर ऑफ कॉमर्स और आदर्श व्यापार मंडल सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए.

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