UP School News: फतेहपुर में भीषण ठंड के बीच खुल रहे हैं स्कूल ! छात्रों का हाल बेहाल, जिला प्रशासन से की मांग
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में कड़ाके की ठंड और भीषण गलन के बावजूद स्कूल लगातार खोले जा रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी आठवीं तक के छात्रों को हो रही है. अभिभावकों ने 29 और 30 दिसंबर को भी अवकाश घोषित करने की मांग जिला प्रशासन से की है.
Fatehpur School News: यूपी के फतेहपुर में इस समय ठंड अपने चरम पर है. सुबह के वक्त गलन, शीतलहर और कोहरे ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि बड़े लोग भी ठंड से कांप रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले में स्कूल खुले हुए हैं. छोटे-छोटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. रविवार को पूरे दिन हड़कपाऊ गलन ने सबको हिला दिया है.
भीषण ठंड में स्कूल खुलने से बढ़ी छात्रों की परेशानी
जनपद में न्यूनतम तापमान लगातार गिर रहा है और सुबह के समय ठंडी हवाओं के साथ गलन हालात को और मुश्किल बना रही है. ऐसे मौसम में स्कूलों का खुला रहना छात्रों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. खासकर प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.
कई छात्र मोटे गर्म कपड़े पहनकर भी ठंड से कांपते नजर आ रहे हैं. ग्रामीण इलाकों के बच्चे साइकिल या पैदल स्कूल पहुंच रहे हैं, जहां खुले रास्तों में ठंड और ज्यादा असर करती है. स्कूल पहुंचने के बाद भी कक्षाओं में ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है.
आठवीं तक के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
आठवीं तक के छात्रों की उम्र ऐसी होती है, जहां उनका शरीर ठंड को ज्यादा सहन नहीं कर पाता. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं होने लगी हैं. स्कूलों में ठंड के चलते बच्चे कांपने पर मजबूर हैं उसके बाद भी जिला प्रशासन लगातार विद्यालय खोले हुए है.
अभिभावकों ने जिला प्रशासन से की छुट्टी की मांग
बढ़ती ठंड को देखते हुए फतेहपुर के अभिभावकों ने जिला प्रशासन से 29 और 30 दिसंबर को भी स्कूल बंद रखने की मांग की है. उनका कहना है कि मौसम विभाग पहले ही भीषण ठंड और गलन की चेतावनी जारी कर चुका है. सुबह के समय घना कोहरा और कम दृश्यता के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है.
अभिभावकों का तर्क है कि बच्चों की सेहत पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है. अगर दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी दी जाती है, तो इससे बच्चों को राहत मिलेगी और बीमारियों से भी बचाव होगा. इस मांग को लेकर अभिभावक लगातार आवाज उठा रहे हैं.
शीतकालीन अवकाश को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग की तैयारी
प्रदेश में शीतकालीन अवकाश को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. विभाग की योजना के अनुसार 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक 15 दिनों का शीतकालीन अवकाश रहेगा. मकर संक्रांति के बाद सभी परिषदीय स्कूल अपने तय समय पर फिर से खुलेंगे.
हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए अभिभावकों का कहना है कि ठंड ने अवकाश से पहले ही विकराल रूप ले लिया है. ऐसे में अवकाश को पहले लागू किया जाना चाहिए. फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से अवकाश की तारीख में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है.
मौसम विभाग की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
जिले के मौसम विभाग ने आगामी 4 दिनों तक भीषण ठंड और गलन जारी रहने की चेतावनी दी है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कई वर्षों में दिसंबर महीने में इतनी ज्यादा ठंड नहीं पड़ी है. लगातार गिरता तापमान और ठंडी हवाएं छोटे बच्चों के लिए खतरा बन सकती हैं.
डॉक्टरों और जानकारों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों को घर के अंदर रखना ज्यादा सुरक्षित है. ऐसे में स्कूलों का खुला रहना प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े कर रहा है. अब सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं.
UP School News: फतेहपुर में भीषण ठंड के बीच खुल रहे हैं स्कूल ! छात्रों का हाल बेहाल, जिला प्रशासन से की मांग
Fatehpur School News: यूपी के फतेहपुर में इस समय ठंड अपने चरम पर है. सुबह के वक्त गलन, शीतलहर और कोहरे ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि बड़े लोग भी ठंड से कांप रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले में स्कूल खुले हुए हैं. छोटे-छोटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. रविवार को पूरे दिन हड़कपाऊ गलन ने सबको हिला दिया है.
भीषण ठंड में स्कूल खुलने से बढ़ी छात्रों की परेशानी
जनपद में न्यूनतम तापमान लगातार गिर रहा है और सुबह के समय ठंडी हवाओं के साथ गलन हालात को और मुश्किल बना रही है. ऐसे मौसम में स्कूलों का खुला रहना छात्रों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. खासकर प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.
कई छात्र मोटे गर्म कपड़े पहनकर भी ठंड से कांपते नजर आ रहे हैं. ग्रामीण इलाकों के बच्चे साइकिल या पैदल स्कूल पहुंच रहे हैं, जहां खुले रास्तों में ठंड और ज्यादा असर करती है. स्कूल पहुंचने के बाद भी कक्षाओं में ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है.
आठवीं तक के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
आठवीं तक के छात्रों की उम्र ऐसी होती है, जहां उनका शरीर ठंड को ज्यादा सहन नहीं कर पाता. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं होने लगी हैं. स्कूलों में ठंड के चलते बच्चे कांपने पर मजबूर हैं उसके बाद भी जिला प्रशासन लगातार विद्यालय खोले हुए है.
अभिभावकों ने जिला प्रशासन से की छुट्टी की मांग
बढ़ती ठंड को देखते हुए फतेहपुर के अभिभावकों ने जिला प्रशासन से 29 और 30 दिसंबर को भी स्कूल बंद रखने की मांग की है. उनका कहना है कि मौसम विभाग पहले ही भीषण ठंड और गलन की चेतावनी जारी कर चुका है. सुबह के समय घना कोहरा और कम दृश्यता के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है.
अभिभावकों का तर्क है कि बच्चों की सेहत पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है. अगर दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी दी जाती है, तो इससे बच्चों को राहत मिलेगी और बीमारियों से भी बचाव होगा. इस मांग को लेकर अभिभावक लगातार आवाज उठा रहे हैं.
शीतकालीन अवकाश को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग की तैयारी
प्रदेश में शीतकालीन अवकाश को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. विभाग की योजना के अनुसार 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक 15 दिनों का शीतकालीन अवकाश रहेगा. मकर संक्रांति के बाद सभी परिषदीय स्कूल अपने तय समय पर फिर से खुलेंगे.
हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए अभिभावकों का कहना है कि ठंड ने अवकाश से पहले ही विकराल रूप ले लिया है. ऐसे में अवकाश को पहले लागू किया जाना चाहिए. फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से अवकाश की तारीख में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है.
मौसम विभाग की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
जिले के मौसम विभाग ने आगामी 4 दिनों तक भीषण ठंड और गलन जारी रहने की चेतावनी दी है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कई वर्षों में दिसंबर महीने में इतनी ज्यादा ठंड नहीं पड़ी है. लगातार गिरता तापमान और ठंडी हवाएं छोटे बच्चों के लिए खतरा बन सकती हैं.
डॉक्टरों और जानकारों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों को घर के अंदर रखना ज्यादा सुरक्षित है. ऐसे में स्कूलों का खुला रहना प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े कर रहा है. अब सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं.