
Fatehpur Triple Murder: वर्चस्व की जंग में खून से सना अखरी गांव, किसान नेता समेत तीन की हत्या से थर्राया प्रदेश
Fatehpur News In Hindi
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में वर्चस्व की जंग ने एक ही परिवार के तीन लोगों की जान ले ली. किसान नेता, उनका बेटा और भाई सरेआम गोलियों से भून दिए गए. यह हत्याकांड न सिर्फ गांव को दहशत में छोड़ गया, बल्कि एक पूरा परिवार उजाड़ गया.
Fatehpur Murder News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के हथगांव थाना क्षेत्र के अखरी गांव में मंगलवार सुबह का सूरज एक घर के लिए अमावस की रात लेकर आया. करीब साढ़े 7 बजे गांव की सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई ने ऐसा भयानक रूप लिया कि तीन लोगों की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई.

सियासी रंजिश से खूनी नरसंहार तक की इनसाइड स्टोरी
बताया जा रहा है कि मृतक पप्पू सिंह वर्तमान ग्राम प्रधान रामदुलारी सिंह के बेटे थे, जिनका राजनीतिक प्रभाव गांव में बढ़ता जा रहा था. वहीं मुख्य आरोपी पूर्व प्रधान सुरेश सिंह उर्फ मुन्नू बीते दो दशकों से गांव की राजनीति पर हावी रहा है. पहले पंचायत चुनाव में हार और फिर वर्चस्व खत्म होने की कड़वाहट ने इस खौफनाक वारदात की नींव रखी.

गोलियों की गूंज से गूंज उठा अखरी गांव

गांव में तनाव, शवों को पोस्टमार्टम से रोका गया

पुलिस प्रशासन अलर्ट, बड़े अफसर मौके पर पहुंचे
मामला संवेदनशील देखते हुए जिले की सभी थानों की पुलिस, पीएसी और हमीरपुर, कौशांबी, बांदा से फोर्स मंगाई गई. प्रयागराज जोन के एडीजी भानु भास्कर, आईजी प्रेम गौतम समेत आला अधिकारी मौके पर पहुंचे.
ADG भानु भास्कर ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पुरानी रंजिश के चलते यह हमला हुआ है. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है. बाकी की गिरफ्तारी के लिए दस टीमें बनाई गई हैं, जो लगातार दबिश दे रही हैं. किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा.
6 नामजद के खिलाफ हत्या का केस दर्ज

क्या होगी बुलडोजर की कार्रवाई
जिले में तिहरे हत्याकांड को लेकर प्रशासन अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी में हैं. सूत्रों की मानें तो इस जघन्य वारदात में शामिल आरोपियों के घरों में बुलडोजर की कार्रवाई हो सकती है.
पुलिस-प्रशासन की टीमें लगातार आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दे रहीं हैं. माना जा रहा है कि वारदात की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा सकता है.
परिवार की कहानी जहां अब सिर्फ सन्नाटा बचा है
जिस परिवार की पहचान कभी किसान नेता, प्रधान और सामाजिक चेतना थी, अब वहां सिर्फ मातम और खामोशी बची है. विनोद सिंह उर्फ पप्पू का बेटा अभय उनका इकलौता सहारा था. बचपन में ही मां को खो चुका अभय पिता की छांव में ही बड़ा हुआ. पप्पू ने दोबारा शादी नहीं की, ताकि बेटे को कभी कमी महसूस न हो. लेकिन अब दोनों की लाशें एक ही चिता पर जाएंगी.
छोटे भाई अनूप सिंह भी उसी हमले में मारे गए. उनके दो मासूम बेटे हैं एक स्कूल जाने की उम्र में है और दूसरा अभी गोद में है. अनूप की पत्नी मनीषा अब दो बच्चों के साथ अकेली खड़ी हैं. पति की तस्वीरों और यादों के सहारे.
गांव की मौजूदा प्रधान रामदुलारी सिंह के लिए यह त्रासदी किसी सुनामी से कम नहीं. एक मां ने अपने बेटे, पोते और छोटे बेटे को एक साथ खो दिया. कभी जनसेवा की प्रतीक रही यह महिला अब अपनी ही दुनिया के खंडहर में अकेली बच गई हैं. अखरी गांव में अब कोई भविष्य की बातें नहीं करता, वहां सिर्फ चीखें और मातम है.
