Fatehpur News: 28 दिन की मासूम अचानक दिखने लगी बुजुर्ग, डॉक्टरों की कड़ी मेहनत ने महज 5 दिन में दी नई जिंदगी
फतेहपुर में 28 दिन की बच्ची खुशी कुपोषण और निमोनिया के कारण बुजुर्ग जैसी दिखने लगी थी. ससुराल और मायके दोनों जगह चिंता थी. राजरानी हॉस्पिटल में 5 दिन के इलाज से बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से राहत भरी खबर सामने आई है. महज 28 दिन की मासूम बच्ची खुशी अचानक बुजुर्ग जैसी दिखने लगी थी. शरीर सूखने और वजन तेजी से गिरने से मायके से लेकर ससुराल तक हड़कंप मच गया था. लेकिन डॉक्टरों की कड़ी मेहनत ने सिर्फ 5 दिन में बच्ची को नई जिंदगी दे दी.
कोराई PHC में हुआ था जन्म, परिवार को मिली खुशी
जिले के मलवां थाना क्षेत्र के हसनापुर सानी गांव में रह रही सोनम पत्नी धर्मेंद्र ने 28 दिसंबर को कोराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बेटी खुशी को जन्म दिया था. उस समय बच्ची का वजन करीब 2.5 किलोग्राम था और वह पूरी तरह स्वस्थ थी. ससुराल ललौली थाना क्षेत्र के रसूलपुर लदिगवा गांव में भी बेटी के जन्म की खुशखबरी पहुंची थी. परिवार में खुशी का माहौल था और किसी को अंदेशा नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद हालात इतने भयावह हो जाएंगे.
अचानक कुपोषण का शिकार हुई नौजात बच्ची
प्रसव के चलते सोनम बीते कई महीनों से अपने मायके हसनापुर सानी थाना मलवां में रह रही थी. उसका ससुराल ललौली थाना क्षेत्र के रसूलपुर लदिगवा गांव में है. पति धर्मेंद्र पुणे में मजदूरी करता है. बच्ची की हालत बिगड़ने की जानकारी जैसे ही रसूलपुर लदिगवा स्थित ससुराल पहुंची, वहां भी चिंता का माहौल बन गया. ससुराल पक्ष लगातार फोन पर हालचाल ले रहा था और इलाज के लिए दबाव बना रहा था.
धीरे धीरे सूखने लगा शरीर, बुजुर्ग जैसी दिखने लगी मासूम
जन्म के कुछ ही दिनों बाद बच्ची का वजन धीरे धीरे कम होने लगा. वह मां का दूध ठीक से नहीं पी पा रही थी, लेकिन घर वाले इसे सामान्य समस्या समझते रहे. समय के साथ बच्ची का शरीर सूखने लगा और चेहरे पर झुर्रियां दिखने लगीं. हालत यह हो गई कि 28 दिन की मासूम बुजुर्ग जैसी नजर आने लगी. मायके और ससुराल दोनों जगह डर बैठ गया कि कहीं कोई गंभीर बीमारी न हो. कई जगह इलाज कराया गया, लेकिन बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ.
राजरानी हॉस्पिटल पहुंचते ही सामने आई असली वजह
12 जनवरी को परिजन बच्ची को लेकर शहर के डाक बंगला स्थित राजरानी हॉस्पिटल पहुंचे. यहां वरिष्ठ चिकित्सक डॉ आनंद सिंह चंदेल ने जांच के बाद बताया कि बच्ची गंभीर कुपोषण का शिकार हो चुकी है. अस्पताल पहुंचते समय बच्ची का वजन केवल 1.4 किलोग्राम था. TLC 23000 थी और बच्ची निमोनिया से भी पीड़ित थी. डॉक्टरों के अनुसार बच्ची मां का दूध नहीं पी पा रही थी, जिसे समय रहते समझा नहीं गया और यही लापरवाही उसकी हालत बिगड़ने की वजह बनी.
डॉक्टरों की मेहनत से 5 दिन में बदली तस्वीर
डॉ आनंद सिंह चंदेल और उनकी टीम ने तुरंत बच्ची का इलाज शुरू किया. पोषण, एंटीबायोटिक और निमोनिया के इलाज पर विशेष ध्यान दिया गया. लगातार निगरानी में बच्ची की हालत में तेजी से सुधार हुआ. महज 5 दिन के अंदर बच्ची का वजन करीब 500 ग्राम बढ़ गया. शरीर में जान लौट आई और वह सामान्य नवजात की तरह हरकत करने लगी. मायके हसनापुर सानी से लेकर ससुराल रसूलपुर लदिगवा तक राहत की सांस ली गई.
डॉक्टरों की अपील, बच्चों का रखें ध्यान
डॉक्टरों का कहना है कि नवजात शिशुओं में दूध न पीना, तेजी से वजन घटना और शरीर का सूखना गंभीर संकेत होते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. खुशी की यह कहानी मायके और ससुराल दोनों परिवारों के लिए ही नहीं, बल्कि हर माता पिता के लिए एक बड़ी सीख है कि समय पर सही इलाज से मौत के मुंह से भी जिंदगी वापस लाई जा सकती है.
Fatehpur News: 28 दिन की मासूम अचानक दिखने लगी बुजुर्ग, डॉक्टरों की कड़ी मेहनत ने महज 5 दिन में दी नई जिंदगी
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से राहत भरी खबर सामने आई है. महज 28 दिन की मासूम बच्ची खुशी अचानक बुजुर्ग जैसी दिखने लगी थी. शरीर सूखने और वजन तेजी से गिरने से मायके से लेकर ससुराल तक हड़कंप मच गया था. लेकिन डॉक्टरों की कड़ी मेहनत ने सिर्फ 5 दिन में बच्ची को नई जिंदगी दे दी.
कोराई PHC में हुआ था जन्म, परिवार को मिली खुशी
जिले के मलवां थाना क्षेत्र के हसनापुर सानी गांव में रह रही सोनम पत्नी धर्मेंद्र ने 28 दिसंबर को कोराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बेटी खुशी को जन्म दिया था. उस समय बच्ची का वजन करीब 2.5 किलोग्राम था और वह पूरी तरह स्वस्थ थी. ससुराल ललौली थाना क्षेत्र के रसूलपुर लदिगवा गांव में भी बेटी के जन्म की खुशखबरी पहुंची थी. परिवार में खुशी का माहौल था और किसी को अंदेशा नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद हालात इतने भयावह हो जाएंगे.
अचानक कुपोषण का शिकार हुई नौजात बच्ची
प्रसव के चलते सोनम बीते कई महीनों से अपने मायके हसनापुर सानी थाना मलवां में रह रही थी. उसका ससुराल ललौली थाना क्षेत्र के रसूलपुर लदिगवा गांव में है. पति धर्मेंद्र पुणे में मजदूरी करता है. बच्ची की हालत बिगड़ने की जानकारी जैसे ही रसूलपुर लदिगवा स्थित ससुराल पहुंची, वहां भी चिंता का माहौल बन गया. ससुराल पक्ष लगातार फोन पर हालचाल ले रहा था और इलाज के लिए दबाव बना रहा था.
धीरे धीरे सूखने लगा शरीर, बुजुर्ग जैसी दिखने लगी मासूम
जन्म के कुछ ही दिनों बाद बच्ची का वजन धीरे धीरे कम होने लगा. वह मां का दूध ठीक से नहीं पी पा रही थी, लेकिन घर वाले इसे सामान्य समस्या समझते रहे. समय के साथ बच्ची का शरीर सूखने लगा और चेहरे पर झुर्रियां दिखने लगीं. हालत यह हो गई कि 28 दिन की मासूम बुजुर्ग जैसी नजर आने लगी. मायके और ससुराल दोनों जगह डर बैठ गया कि कहीं कोई गंभीर बीमारी न हो. कई जगह इलाज कराया गया, लेकिन बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ.
राजरानी हॉस्पिटल पहुंचते ही सामने आई असली वजह
12 जनवरी को परिजन बच्ची को लेकर शहर के डाक बंगला स्थित राजरानी हॉस्पिटल पहुंचे. यहां वरिष्ठ चिकित्सक डॉ आनंद सिंह चंदेल ने जांच के बाद बताया कि बच्ची गंभीर कुपोषण का शिकार हो चुकी है. अस्पताल पहुंचते समय बच्ची का वजन केवल 1.4 किलोग्राम था. TLC 23000 थी और बच्ची निमोनिया से भी पीड़ित थी. डॉक्टरों के अनुसार बच्ची मां का दूध नहीं पी पा रही थी, जिसे समय रहते समझा नहीं गया और यही लापरवाही उसकी हालत बिगड़ने की वजह बनी.
डॉक्टरों की मेहनत से 5 दिन में बदली तस्वीर
डॉ आनंद सिंह चंदेल और उनकी टीम ने तुरंत बच्ची का इलाज शुरू किया. पोषण, एंटीबायोटिक और निमोनिया के इलाज पर विशेष ध्यान दिया गया. लगातार निगरानी में बच्ची की हालत में तेजी से सुधार हुआ. महज 5 दिन के अंदर बच्ची का वजन करीब 500 ग्राम बढ़ गया. शरीर में जान लौट आई और वह सामान्य नवजात की तरह हरकत करने लगी. मायके हसनापुर सानी से लेकर ससुराल रसूलपुर लदिगवा तक राहत की सांस ली गई.
डॉक्टरों की अपील, बच्चों का रखें ध्यान
डॉक्टरों का कहना है कि नवजात शिशुओं में दूध न पीना, तेजी से वजन घटना और शरीर का सूखना गंभीर संकेत होते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. खुशी की यह कहानी मायके और ससुराल दोनों परिवारों के लिए ही नहीं, बल्कि हर माता पिता के लिए एक बड़ी सीख है कि समय पर सही इलाज से मौत के मुंह से भी जिंदगी वापस लाई जा सकती है.