
Fatehpur News: मैं SIR से तंग आ चुका हूं, बेटी की शादी में छुट्टी नहीं मिल पा रही है, BLO ने उठाया खौफ़नाक कदम
फतेहपुर के आलियाबाद गांव में शिक्षामित्र और बीएलओ अखिलेश कुमार ने स्कूल में फांसी लगाकर जान दे दी. सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि वह SIR के काम से तंग आ चुके हैं और बेटी की शादी के लिए छुट्टी नहीं मिल रही. परिजनों ने मुआवजे और कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया.
Fatehpur SIR BLO News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. आलियाबाद गांव के बीएलओ और शिक्षामित्र अखिलेश कुमार ने स्कूल परिसर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. उनकी जेब से मिले सुसाइड नोट में SIR के काम के दबाव और बेटी की शादी में छुट्टी न मिलने की पीड़ा साफ झलकती है.
शादी की तैयारियों के बीच टूटा पिता का हौसला

लेकिन इसी बीच अखिलेश मानसिक रूप से बेहद दबाव में थे. परिजनों के अनुसार वह कई बार अधिकारियों से छुट्टी की मांग कर चुके थे ताकि बेटी की शादी की तैयारियों में समय दे सकें. मगर उन्हें राहत नहीं मिली. एक जिम्मेदार पिता के लिए यह स्थिति असहनीय होती जा रही थी.
सुसाइड नोट में SIR के दबाव का जिक्र
सुसाइड नोट अब पूरे मामले का सबसे अहम दस्तावेज बन गया है. लोगों का कहना है कि समय रहते मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाता तो शायद यह दुखद घटना टल सकती थी. प्रशासनिक दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अखिलेश खुद को अकेला महसूस कर रहे थे.
स्कूल के कमरे में फंदे पर लटका मिला शव
शनिवार को अखिलेश रोज की तरह स्कूल पहुंचे. छुट्टी के बाद वह स्कूल परिसर में ही रुक गए. कुछ देर बाद ग्रामीणों ने कमरे की खिड़की से उनका शव फंदे से लटका देखा. घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई.
सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें फंदे से उतारकर बिंदकी सीएचसी ले गए. वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. जिस घर में कुछ दिनों बाद शहनाई बजनी थी, वहां मातम पसर गया. बेटी की शादी से पहले पिता का यूं चले जाना पूरे गांव को झकझोर गया.
20 लाख मुआवजा और नौकरी की मांग पर अड़े परिजन
सीएचसी से शव लेकर जब परिजन गांव जा रहे थे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इससे आक्रोश भड़क उठा. मृतक के भाई भूपेश कुमार ने कहा कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा और 20 लाख रुपये मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी, तब तक शव नहीं उठाया जाएगा.
गांव में भारी भीड़ जमा हो गई. माहौल तनावपूर्ण हो गया. परिजन प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते रहे. उनका कहना था कि एक कर्मचारी की मौत के पीछे प्रशासनिक लापरवाही है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए.
अधिकारियों के आश्वासन पर शांत हुआ मामला
सूचना पर एडीएम अविनाश त्रिपाठी और एएसपी महेंद्र पाल सिंह मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया. प्रशासन की ओर से 20 लाख रुपये मुआवजा और मृतक की पत्नी को एक माह के भीतर कस्तूरबा गांधी विद्यालय में नौकरी देने का आश्वासन दिया गया.
इसके बाद परिजन शांत हुए और पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एडीएम ने कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी. एएसपी ने बताया कि अभी तक तहरीर नहीं मिली है, लेकिन सभी बिंदुओं पर कार्रवाई की जा रही है.
