फतेहपुर की बेटी रंजना सिंह ने UPSC में रचा इतिहास, बाबा का सपना पूरा कर बनीं अफसर बिटिया, जानिए सफलता का गुरु मंत्र
फतेहपुर की रहने वाली रंजना सिंह सेंगर ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 629वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. किसान परिवार से आने वाली रंजना ने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की. उनकी सफलता के पीछे बाबा का सपना, कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास की कहानी छिपी है.
UPSC Success Story: कहते हैं कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादा मजबूत, तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचा देते हैं. फतेहपुर खागा की रंजना सिंह सेंगर ने इसी जिद और मेहनत के दम पर यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की है. तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया 629वीं रैंक लाकर उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार का सपना पूरा किया बल्कि जिले की बेटियों के लिए भी एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई हैं.
किसान परिवार से निकलकर बनाई बड़ी पहचान
फतेहपुर जिले के खागा जीटी रोड क्षेत्र में रहने वाली रंजना सिंह सेंगर एक साधारण किसान परिवार से आती हैं. उनके पिता जीतेंद्र सिंह सेंगर किसान हैं और मूल रूप से जिले की तहसील क्षेत्र के एकडला गांव के निवासी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी. यही कारण रहा कि रंजना ने बचपन से ही पढ़ाई को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया.
परिवार के लोग बताते हैं कि रंजना शुरू से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं और हर कक्षा में बेहतर प्रदर्शन करती थीं. जब यूपीएससी में उनकी सफलता की खबर आई तो परिवार के साथ-साथ रिश्तेदारों और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई. लोगों ने इसे फतेहपुर की बेटियों के लिए गर्व का क्षण बताया.
फतेहपुर में हुई शुरुआती पढ़ाई, फिर IIT खड़गपुर तक का सफर
इंटरमीडिएट के बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर में हुआ. वहां से उन्होंने बीटेक और फिर एमटेक की पढ़ाई पूरी की. आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई करना ही अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है. पढ़ाई पूरी करने के बाद रंजना ने करीब एक साल तक खड़गपुर में एक निजी कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन उनका असली सपना कुछ और था.
बाबा का सपना बना सबसे बड़ी प्रेरणा
रंजना सिंह सेंगर की सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनके बाबा राजेंद्रनाथ सिंह का सपना रहा. राजेंद्रनाथ सिंह रेलवे से रिटायर्ड इंजीनियर हैं और वह हमेशा चाहते थे कि उनकी पोती आईएएस अधिकारी बने.
रंजना बताती हैं कि जब भी परिवार में भविष्य की बात होती थी, बाबा उन्हें अफसर बनने की प्रेरणा देते थे. यही सपना उनके दिल में गहराई से बैठ गया. निजी नौकरी करते हुए भी उन्हें लगता था कि वह अपने असली लक्ष्य से दूर जा रही हैं. आखिरकार उन्होंने बड़ा फैसला लिया और प्राइवेट नौकरी छोड़कर दिल्ली जाकर सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी.
असफलताओं से सीखकर तीसरे प्रयास में हासिल की सफलता
यूपीएससी की तैयारी का रास्ता आसान नहीं होता. रंजना के लिए भी यह सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा. उन्होंने 2023 में पहला प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. हालांकि उन्होंने इसे हार नहीं माना बल्कि इससे सीख लेकर अपनी रणनीति को बेहतर किया.
दूसरे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिल सकी. लगातार दो असफलताओं के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. तीसरे प्रयास में उन्होंने पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी और आखिरकार 2025 में ऑल इंडिया 629वीं रैंक हासिल कर यूपीएससी में सफलता प्राप्त की.
सफलता का मंत्र: खुद पर भरोसा और नियमित पढ़ाई
रंजना सिंह सेंगर का मानना है कि यूपीएससी जैसी परीक्षा में सफलता पाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता. वह कहती हैं कि सबसे जरूरी है खुद पर विश्वास रखना और नियमित रूप से लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते रहना.
उनके अनुसार तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई की और कठिन समय में भी हार नहीं मानी. असफलताओं को उन्होंने सीख के रूप में लिया और अपनी कमजोरियों को लगातार सुधारती रहीं. रंजना का कहना है कि अगर आपका इरादा मजबूत है तो कोई भी कठिनाई आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती. उनकी सफलता आज फतेहपुर के युवाओं और खासकर बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है.
फतेहपुर की बेटी रंजना सिंह ने UPSC में रचा इतिहास, बाबा का सपना पूरा कर बनीं अफसर बिटिया, जानिए सफलता का गुरु मंत्र
UPSC Success Story: कहते हैं कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादा मजबूत, तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचा देते हैं. फतेहपुर खागा की रंजना सिंह सेंगर ने इसी जिद और मेहनत के दम पर यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की है. तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया 629वीं रैंक लाकर उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार का सपना पूरा किया बल्कि जिले की बेटियों के लिए भी एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई हैं.
किसान परिवार से निकलकर बनाई बड़ी पहचान
फतेहपुर जिले के खागा जीटी रोड क्षेत्र में रहने वाली रंजना सिंह सेंगर एक साधारण किसान परिवार से आती हैं. उनके पिता जीतेंद्र सिंह सेंगर किसान हैं और मूल रूप से जिले की तहसील क्षेत्र के एकडला गांव के निवासी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी. यही कारण रहा कि रंजना ने बचपन से ही पढ़ाई को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया.
परिवार के लोग बताते हैं कि रंजना शुरू से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं और हर कक्षा में बेहतर प्रदर्शन करती थीं. जब यूपीएससी में उनकी सफलता की खबर आई तो परिवार के साथ-साथ रिश्तेदारों और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई. लोगों ने इसे फतेहपुर की बेटियों के लिए गर्व का क्षण बताया.
फतेहपुर में हुई शुरुआती पढ़ाई, फिर IIT खड़गपुर तक का सफर
रंजना सिंह सेंगर की शुरुआती शिक्षा फतेहपुर शहर में ही हुई. उन्होंने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. स्कूल के दिनों से ही वह पढ़ाई में बेहद गंभीर थीं और हमेशा बड़े लक्ष्य की बात करती थीं.
इंटरमीडिएट के बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर में हुआ. वहां से उन्होंने बीटेक और फिर एमटेक की पढ़ाई पूरी की. आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई करना ही अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है. पढ़ाई पूरी करने के बाद रंजना ने करीब एक साल तक खड़गपुर में एक निजी कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन उनका असली सपना कुछ और था.
बाबा का सपना बना सबसे बड़ी प्रेरणा
रंजना सिंह सेंगर की सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनके बाबा राजेंद्रनाथ सिंह का सपना रहा. राजेंद्रनाथ सिंह रेलवे से रिटायर्ड इंजीनियर हैं और वह हमेशा चाहते थे कि उनकी पोती आईएएस अधिकारी बने.
रंजना बताती हैं कि जब भी परिवार में भविष्य की बात होती थी, बाबा उन्हें अफसर बनने की प्रेरणा देते थे. यही सपना उनके दिल में गहराई से बैठ गया. निजी नौकरी करते हुए भी उन्हें लगता था कि वह अपने असली लक्ष्य से दूर जा रही हैं. आखिरकार उन्होंने बड़ा फैसला लिया और प्राइवेट नौकरी छोड़कर दिल्ली जाकर सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी.
असफलताओं से सीखकर तीसरे प्रयास में हासिल की सफलता
यूपीएससी की तैयारी का रास्ता आसान नहीं होता. रंजना के लिए भी यह सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा. उन्होंने 2023 में पहला प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. हालांकि उन्होंने इसे हार नहीं माना बल्कि इससे सीख लेकर अपनी रणनीति को बेहतर किया.
दूसरे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिल सकी. लगातार दो असफलताओं के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. तीसरे प्रयास में उन्होंने पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी और आखिरकार 2025 में ऑल इंडिया 629वीं रैंक हासिल कर यूपीएससी में सफलता प्राप्त की.
सफलता का मंत्र: खुद पर भरोसा और नियमित पढ़ाई
रंजना सिंह सेंगर का मानना है कि यूपीएससी जैसी परीक्षा में सफलता पाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता. वह कहती हैं कि सबसे जरूरी है खुद पर विश्वास रखना और नियमित रूप से लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते रहना.
उनके अनुसार तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई की और कठिन समय में भी हार नहीं मानी. असफलताओं को उन्होंने सीख के रूप में लिया और अपनी कमजोरियों को लगातार सुधारती रहीं. रंजना का कहना है कि अगर आपका इरादा मजबूत है तो कोई भी कठिनाई आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती. उनकी सफलता आज फतेहपुर के युवाओं और खासकर बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है.