Fatehpur News: कैंसर पीड़ित को ब्लड नहीं मिला? जिला अस्पताल ने बताया पूरा सच, 12 यूनिट खून देने का दावा
फतेहपुर जिला अस्पताल में कैंसर पीड़ित किशोर को ब्लड न मिलने की खबरें सामने आईं, लेकिन जांच में मामला उलटा निकला. अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीज को 20 फरवरी से 29 अप्रैल के बीच 12 यूनिट ब्लड दिया गया है. सीएमएस ने अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल का एक मामला अचानक सुर्खियों में आ गया, जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि एक कैंसर पीड़ित किशोर को ब्लड बैंक से खून नहीं मिल रहा. लेकिन जब इस पूरे मामले की तह तक जांच की गई, तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई. अस्पताल प्रशासन ने न सिर्फ इन आरोपों को खारिज किया बल्कि मरीज को दिए गए ब्लड का पूरा ब्यौरा भी सामने रखा.
क्या है पूरा मामला, कैसे उठा विवाद
फतेहपुर के अहमदगंज निवासी 14 वर्षीय आनंद, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुआ था. इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर तेजी से फैली कि अस्पताल के ब्लड बैंक द्वारा उसे खून देने से इनकार किया जा रहा है. खबर सामने आते ही मामला संवेदनशील बन गया, क्योंकि यह सीधे एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे की जिंदगी से जुड़ा था. अस्पताल प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है.
जांच में सामने आया ब्लड देने का पूरा रिकॉर्ड
जब इस मामले की पड़ताल की गई, तो अस्पताल के ब्लड बैंक का रिकॉर्ड सामने आया, जिसने पूरे विवाद की तस्वीर बदल दी. जानकारी के अनुसार, 20 फरवरी 2026 से लेकर 29 अप्रैल 2026 तक मरीज की मां गुड्डी को कुल 12 यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया गया.
किस-किस माध्यम से मिला ब्लड, सीएमएस ने दी जानकारी
युगान्तर प्रवाह से बातचीत करते हुए जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कुल 12 यूनिट ब्लड में से 3 यूनिट उन्होंने खुद उपलब्ध कराया. इसके अलावा 5 यूनिट ब्लड डोनेशन के जरिए बदले में दिया गया.
वहीं, 1 यूनिट ब्लड रेड क्रॉस के माध्यम से, 2 यूनिट बजरंग दल द्वारा और 1 यूनिट ‘सर्व फॉर ह्यूमैनिटी’ संस्था के जरिए उपलब्ध कराया गया. इस तरह अलग-अलग स्रोतों से मिलाकर मरीज को लगातार ब्लड उपलब्ध कराया गया. सीएमएस ने कहा कि अस्पताल हर संभव प्रयास करता है कि किसी भी जरूरतमंद मरीज को खून की कमी न हो.
कभी नहीं किया गया ब्लड देने से इनकार
सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक ने कभी भी मरीज को खून देने से इनकार नहीं किया. उन्होंने बताया कि यह मरीज लंबे समय से कैंसर से जूझ रहा है और समय-समय भर्ती होकर ब्लड बैंक से ब्लड ले रहा है और कई बार ब्लड चढ़वाने के बाद घर भी जाता रहा है. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, हर बार जरूरत पड़ने पर मरीज को ब्लड उपलब्ध कराया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की खबरें बिना तथ्यों की पुष्टि के फैलाना न सिर्फ गलत है, बल्कि इससे लोगों में अस्पताल के प्रति गलत संदेश भी जाता है.
अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन अब सख्त रुख में नजर आ रहा है. सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि जो लोग इस तरह की मनगढ़ंत और झूठी अफवाहें फैला रहे हैं, उनके खिलाफ नोटिस जारी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भ्रामक खबरें न सिर्फ अस्पताल की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के मन में भी भय पैदा करती हैं. प्रशासन का कहना है कि आगे से इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि गलत जानकारी फैलाने वालों पर रोक लगाई जा सके.
Fatehpur News: कैंसर पीड़ित को ब्लड नहीं मिला? जिला अस्पताल ने बताया पूरा सच, 12 यूनिट खून देने का दावा
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल का एक मामला अचानक सुर्खियों में आ गया, जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि एक कैंसर पीड़ित किशोर को ब्लड बैंक से खून नहीं मिल रहा. लेकिन जब इस पूरे मामले की तह तक जांच की गई, तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई. अस्पताल प्रशासन ने न सिर्फ इन आरोपों को खारिज किया बल्कि मरीज को दिए गए ब्लड का पूरा ब्यौरा भी सामने रखा.
क्या है पूरा मामला, कैसे उठा विवाद
फतेहपुर के अहमदगंज निवासी 14 वर्षीय आनंद, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुआ था. इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर तेजी से फैली कि अस्पताल के ब्लड बैंक द्वारा उसे खून देने से इनकार किया जा रहा है. खबर सामने आते ही मामला संवेदनशील बन गया, क्योंकि यह सीधे एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे की जिंदगी से जुड़ा था. अस्पताल प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है.
जांच में सामने आया ब्लड देने का पूरा रिकॉर्ड
जब इस मामले की पड़ताल की गई, तो अस्पताल के ब्लड बैंक का रिकॉर्ड सामने आया, जिसने पूरे विवाद की तस्वीर बदल दी. जानकारी के अनुसार, 20 फरवरी 2026 से लेकर 29 अप्रैल 2026 तक मरीज की मां गुड्डी को कुल 12 यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया गया.
यह रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से दिखाता है कि मरीज को लगातार जरूरत के अनुसार खून दिया जा रहा था. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज़ को लगातार ब्लड दिया गया और यह प्रक्रिया नियमित रूप से चल रही है, और कभी भी मरीज को ब्लड देने से मना नहीं किया गया. इस खुलासे के बाद ब्लड न मिलने के आरोपों पर सवाल खड़े हो गए हैं.
किस-किस माध्यम से मिला ब्लड, सीएमएस ने दी जानकारी
युगान्तर प्रवाह से बातचीत करते हुए जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कुल 12 यूनिट ब्लड में से 3 यूनिट उन्होंने खुद उपलब्ध कराया. इसके अलावा 5 यूनिट ब्लड डोनेशन के जरिए बदले में दिया गया.
वहीं, 1 यूनिट ब्लड रेड क्रॉस के माध्यम से, 2 यूनिट बजरंग दल द्वारा और 1 यूनिट ‘सर्व फॉर ह्यूमैनिटी’ संस्था के जरिए उपलब्ध कराया गया. इस तरह अलग-अलग स्रोतों से मिलाकर मरीज को लगातार ब्लड उपलब्ध कराया गया. सीएमएस ने कहा कि अस्पताल हर संभव प्रयास करता है कि किसी भी जरूरतमंद मरीज को खून की कमी न हो.
कभी नहीं किया गया ब्लड देने से इनकार
सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक ने कभी भी मरीज को खून देने से इनकार नहीं किया. उन्होंने बताया कि यह मरीज लंबे समय से कैंसर से जूझ रहा है और समय-समय भर्ती होकर ब्लड बैंक से ब्लड ले रहा है और कई बार ब्लड चढ़वाने के बाद घर भी जाता रहा है. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, हर बार जरूरत पड़ने पर मरीज को ब्लड उपलब्ध कराया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की खबरें बिना तथ्यों की पुष्टि के फैलाना न सिर्फ गलत है, बल्कि इससे लोगों में अस्पताल के प्रति गलत संदेश भी जाता है.
अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन अब सख्त रुख में नजर आ रहा है. सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि जो लोग इस तरह की मनगढ़ंत और झूठी अफवाहें फैला रहे हैं, उनके खिलाफ नोटिस जारी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भ्रामक खबरें न सिर्फ अस्पताल की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के मन में भी भय पैदा करती हैं. प्रशासन का कहना है कि आगे से इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि गलत जानकारी फैलाने वालों पर रोक लगाई जा सके.