फतेहपुर में एसपी का सख्त एक्शन: जोनिहां चौकी इंचार्ज लाइन हाजिर, कारखास नेटवर्क पर भी गिरी गाज, 10 कांस्टेबल हटाए गए
फतेहपुर में तीन युवकों की संदिग्ध मौत के मामले में लापरवाही सामने आने पर एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बड़ा एक्शन लिया है. जोनिहां चौकी इंचार्ज अजीत सिंह को लाइन हाजिर किया गया है. साथ ही अनुशासनहीनता और शिकायतों के आधार पर 10 कांस्टेबलों को भी लाइन भेजा गया है.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. तीन युवकों की मौत के मामले में पुलिस की भूमिका पर उठे सवालों के बाद जांच कराई गई, जिसमें लापरवाही उजागर हुई. इसके बाद जोनिहां चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया गया. साथ ही जिले में सक्रिय कारखास सिपाहियों पर भी कार्रवाई की गई है.
तीन युवकों की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल
बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के जोनिहां में हुई घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया. फरीदपुर गांव निवासी दीपक सोनी पर आरोप है कि उसने बाइक सवार तीन युवकों सत्यवान सोनी उर्फ सत्यम, अन्नू सोनकर और मनोज सोनी को कार से कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
घटना रविवार की बताई जा रही है और यह मामला शुरुआत से ही संदिग्ध परिस्थितियों में घिरा रहा. परिजनों ने इसे सीधी हत्या बताया, जबकि पुलिस पहले इसे सड़क दुर्घटना मानकर चल रही थी. यही विरोधाभास पूरे मामले का केंद्र बना और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए.
जोनिहां चौकी इंचार्ज की भूमिका पर उठे सवाल
दुर्घटना या हत्या, पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल
घटना के बाद पुलिस ने शुरुआत में इसे सड़क हादसा मानकर जांच शुरू की और परिजनों को भी इसी दिशा में समझाने की कोशिश की. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने तहरीर तक तीन बार बदलवाई और मामले को हल्का करने की कोशिश की. हालांकि बाद में पुलिस भी यह मानने लगी कि घटना सामान्य दुर्घटना नहीं थी. कार में किशोरी के होने या न होने को लेकर भी विवाद सामने आया, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई.
आरोपित की दलीलें और रिश्तों का विवाद बना कारण
आरोपित दीपक सोनी ने पुलिस को दिए बयान में खुद को निर्दोष बताया है. उसका कहना है कि घटना के समय कार में कोई किशोरी मौजूद नहीं थी और बाइक सवार खुद उसका पीछा कर रहे थे. उसने दावा किया कि यदि टक्कर हुई होती तो उसकी कार भी क्षतिग्रस्त होती, जिसकी जांच कराई जा सकती है. वहीं मामले की जड़ में पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है. किशोरी के संरक्षण और उसकी शादी को लेकर दोनों पक्षों में पहले से तनाव था. इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और तीन लोगों की जान चली गई.
कारखास सिपाहियों पर भी गिरी गाज, 10 लाइन हाजिर
एसपी ने जिले में लंबे समय से चर्चा में रहे कारखास सिपाहियों पर भी कार्रवाई की है. विभिन्न थानों में तैनात 10 कांस्टेबलों को दायित्वों में लापरवाही और शिकायतों के आधार पर लाइन हाजिर किया गया है. इनमें जहानाबाद थाने में तैनात हेड कांस्टेबल ओम तिवारी, गाजीपुर थाने में तैनात कांस्टेबल ललित मिश्रा, बॉबी गुर्जर, हेड कांस्टेबल लोकदीप पांडेय, हुसैनगंज थाने में तैनात हेड कांस्टेबल विष्णुदेव सिंह.
कांस्टेबल मनोज कुमार, सदर कोतवाली में तैनात कांस्टेबल रामकुमार पाराशर, हेड कांस्टेबल राकेश सिंह और राधानगर थाने में तैनात कांस्टेबल सुधांशु शुक्ला को लाइन हाजिर किया है. इन पर आरोप था कि ये सेटिंग गेटिंग के जरिए मामलों को प्रभावित करते थे और उच्च अधिकारियों को गुमराह करते थे.
फतेहपुर में एसपी का सख्त एक्शन: जोनिहां चौकी इंचार्ज लाइन हाजिर, कारखास नेटवर्क पर भी गिरी गाज, 10 कांस्टेबल हटाए गए
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. तीन युवकों की मौत के मामले में पुलिस की भूमिका पर उठे सवालों के बाद जांच कराई गई, जिसमें लापरवाही उजागर हुई. इसके बाद जोनिहां चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया गया. साथ ही जिले में सक्रिय कारखास सिपाहियों पर भी कार्रवाई की गई है.
तीन युवकों की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल
बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के जोनिहां में हुई घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया. फरीदपुर गांव निवासी दीपक सोनी पर आरोप है कि उसने बाइक सवार तीन युवकों सत्यवान सोनी उर्फ सत्यम, अन्नू सोनकर और मनोज सोनी को कार से कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
घटना रविवार की बताई जा रही है और यह मामला शुरुआत से ही संदिग्ध परिस्थितियों में घिरा रहा. परिजनों ने इसे सीधी हत्या बताया, जबकि पुलिस पहले इसे सड़क दुर्घटना मानकर चल रही थी. यही विरोधाभास पूरे मामले का केंद्र बना और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए.
जोनिहां चौकी इंचार्ज की भूमिका पर उठे सवाल
जांच के दौरान सामने आया कि घटना से पहले चौकी में तीनों पक्षों के बीच पंचायत हुई थी. बावजूद इसके विवाद का समाधान नहीं हुआ और सभी पक्षों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के जाने दिया गया. आरोप है कि चौकी इंचार्ज अजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कोर्ट का हवाला देकर पक्षों को रवाना कर दिया. इसके बाद कुछ ही समय में तीन युवकों की मौत हो गई. इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए एसपी ने तत्काल प्रभाव से चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया.
दुर्घटना या हत्या, पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल
घटना के बाद पुलिस ने शुरुआत में इसे सड़क हादसा मानकर जांच शुरू की और परिजनों को भी इसी दिशा में समझाने की कोशिश की. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने तहरीर तक तीन बार बदलवाई और मामले को हल्का करने की कोशिश की. हालांकि बाद में पुलिस भी यह मानने लगी कि घटना सामान्य दुर्घटना नहीं थी. कार में किशोरी के होने या न होने को लेकर भी विवाद सामने आया, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई.
आरोपित की दलीलें और रिश्तों का विवाद बना कारण
आरोपित दीपक सोनी ने पुलिस को दिए बयान में खुद को निर्दोष बताया है. उसका कहना है कि घटना के समय कार में कोई किशोरी मौजूद नहीं थी और बाइक सवार खुद उसका पीछा कर रहे थे. उसने दावा किया कि यदि टक्कर हुई होती तो उसकी कार भी क्षतिग्रस्त होती, जिसकी जांच कराई जा सकती है. वहीं मामले की जड़ में पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है. किशोरी के संरक्षण और उसकी शादी को लेकर दोनों पक्षों में पहले से तनाव था. इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और तीन लोगों की जान चली गई.
कारखास सिपाहियों पर भी गिरी गाज, 10 लाइन हाजिर
एसपी ने जिले में लंबे समय से चर्चा में रहे कारखास सिपाहियों पर भी कार्रवाई की है. विभिन्न थानों में तैनात 10 कांस्टेबलों को दायित्वों में लापरवाही और शिकायतों के आधार पर लाइन हाजिर किया गया है. इनमें जहानाबाद थाने में तैनात हेड कांस्टेबल ओम तिवारी, गाजीपुर थाने में तैनात कांस्टेबल ललित मिश्रा, बॉबी गुर्जर, हेड कांस्टेबल लोकदीप पांडेय, हुसैनगंज थाने में तैनात हेड कांस्टेबल विष्णुदेव सिंह.
कांस्टेबल मनोज कुमार, सदर कोतवाली में तैनात कांस्टेबल रामकुमार पाराशर, हेड कांस्टेबल राकेश सिंह और राधानगर थाने में तैनात कांस्टेबल सुधांशु शुक्ला को लाइन हाजिर किया है. इन पर आरोप था कि ये सेटिंग गेटिंग के जरिए मामलों को प्रभावित करते थे और उच्च अधिकारियों को गुमराह करते थे.