
Fatehpur News: फतेहपुर में ‘सरकारी भूत’ घोटाला ! जिंदा बुजुर्गों को कागजों में मारकर पेंशन डकारने की साजिश
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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में सरकारी सिस्टम ने चार बुजुर्गों को जिंदा ही भूत बना दिया और कागजों में मृत घोषित करते हुए प्रमाणपत्र जारी कर दिया. अब बुजुर्ग अपने ही अस्तित्व की तलाश में गणेश परिक्रमा करने को मजबूर हैं.
Fatehpur News: सरकारी तंत्र की लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक अनोखा मामला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर जिले में सामने आया है, जहां सरकारी फाइलों में चार बुजुर्गों को 'मरवा' दिया गया.

सरकारी कागजों में ‘मृत’, लेकिन हकीकत में जिंदा
हर साल समाज कल्याण विभाग वृद्धावस्था पेंशन पाने वालों का सत्यापन करता है, लेकिन इस बार सत्यापन की प्रक्रिया कुछ ज्यादा ही ‘आधुनिक’ हो गई. हथगाम ब्लॉक की ग्राम पंचायत दुदौली जलालपुर के साजिद अली, इटैली के शंकर, शिवरी की सोमवती और बरदरा के रामपाल को बिना किसी ठोस जांच के कागजों में मृत घोषित कर दिया गया.

"हम जिंदा हैं साहब!"–सरकारी भूतों की फरियाद


अधिकारियों के लिए भी यह दृश्य किसी आश्चर्य से कम नहीं था. आमतौर पर लोग सरकारी दफ्तरों में राशन, आवास या किसी और सरकारी योजना के लिए फरियाद लेकर आते हैं, लेकिन यहां मामला ही उल्टा था. लोग खुद को जिंदा साबित करने के लिए लड़ रहे थे.
सत्यापन निकला झूठा, अब दोषियों पर कार्रवाई की तलवार

इसके बाद जिला विकास अधिकारी (DDO) प्रमोद सिंह चंद्रौल ने समाज कल्याण अधिकारी को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का आदेश दिया. साथ ही चेतावनी दी कि यदि दोषियों की जवाबदेही तय नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारियों के वेतन से इन बुजुर्गों की पेंशन की भरपाई कराई जाएगी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
गलती या भ्रष्टाचार? सरकारी तंत्र पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह सिर्फ एक गलती थी या फिर किसी भ्रष्टाचार का हिस्सा? क्या यह योजना के पैसों की हेराफेरी के लिए की गई चाल थी? अगर यह चार बुजुर्ग खुद को जिंदा साबित करने के लिए न लड़ते, तो उनकी पेंशन हमेशा के लिए बंद हो जाती.
बुजुर्गों का कहना है कि अगर वे इस ‘सरकारी हत्या’ के खिलाफ नहीं लड़ते, तो कुछ सालों में उनकी जमीन-जायदाद के कागजों में भी वे गायब हो जाते. सरकारी तंत्र का यह हाल देखकर वे डर गए हैं कि अगर अगली बार ऐसी गलती दोबारा हुई, तो शायद वे सच में अपने अधिकारों से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगे.
