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Fatehpur News: रिश्तेदार पीछे हटे, गांव का बेटा बना सहारा ! फतेहपुर के मनीष ने ऐसे बचाई एक बुजुर्ग की जिंदगी

Fatehpur News: रिश्तेदार पीछे हटे, गांव का बेटा बना सहारा ! फतेहपुर के मनीष ने ऐसे बचाई एक बुजुर्ग की जिंदगी
फतेहपुर के जिला अस्पताल में रक्तदान करते मनीष कुमार बाएं, वार्ड में लेटी बुजुर्ग महिला कलावती दाएं: Image Yugantar Pravah

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) फतेहपुर (Fatehpur) में सड़क हादसे में घायल बुजुर्ग महिला की जान उस वक्त खतरे में थी, जब ऑपरेशन के लिए खून की जरूरत थी. रिश्तेदार पीछे हट गए, तब गांव के 26 वर्षीय मनीष कुमार ने सातवीं बार रक्तदान कर महिला की जान बचाई. उनका यह कदम इंसानियत की मिसाल बन गया.

Fatehpur News: इंसानियत का कोई मोल नहीं होता और जब किसी अनजान की जान बचाने की बात हो, तो यही इंसानियत किसी देवता से कम नहीं लगती. यूपी के फतेहपुर जिले में 26 साल के मनीष कुमार ने ऐसी ही मिसाल पेश की है.

सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक विधवा बुजुर्ग महिला की जान उस वक्त खतरे में थी, जब ऑपरेशन के लिए खून की सख्त जरूरत थी. लेकिन कोई आगे नहीं आया. तब मनीष ने सातवीं बार रक्तदान कर जान बचाई, वो भी एक ऐसे इंसान के लिए जिसे वो जानता तक नहीं था.

हादसे में दो जगह से टूट गए थे पैर, रुक गया था ऑपरेशन 

मंगलवार शाम को थरियांव थाना क्षेत्र के कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर भारतपुर मोड़ के पास एक बुजुर्ग महिला को तेज रफ्तार चार पहिया वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी. घायल महिला की पहचान भारतपुर गांव निवासी 65 वर्षीय कलावती के रूप में हुई.

हादसे में उनके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं. दो जगह से पैर बुरी तरह टूट गए. स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी. लेकिन ऑपरेशन से पहले खून की जरूरत थी, और यहीं आकर मामला अटक गया.

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रिश्तेदार भी पीछे हटे, तब सामने आए गांव के मनीष

कलावती देवी विधवा हैं और उनके अपने रिश्तेदार भी खून देने से हिचकिचा रहे थे. कई ने असमर्थता जताई, कुछ मौके पर पहुंचे ही नहीं. ऐसे में जब अस्पताल प्रशासन ने परिवार से किसी ब्लड डोनर की मांग की, तो पूरा परिवार चिंता में पड़ गया.

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इसी दौरान गांव के ही रहने वाले मनीष कुमार को इस बारे में पता चला. उन्होंने बिना देर किए अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया. उनकी यह दरियादिली कलावती देवी के लिए जीवनदान साबित हुई.

Read More: Fatehpur News: फतेहपुर में नाला सिल्ट सफाई के लिए लाखों का भ्रष्टाचार! सभासद ने डीएम को सौंपे सबूत, जांच की मांग

सातवीं बार खून देकर पेश की मानवता की मिसाल

मनीष कुमार ने बताया कि यह उनका सातवां रक्तदान था. उन्होंने कहा, "मेरे खून से अगर किसी की जान बच सकती है तो इससे बड़ा धर्म कुछ नहीं." मनीष पहले भी कई बार जरूरतमंदों के लिए ब्लड डोनेट कर चुके हैं. लेकिन इस बार का रक्तदान उनके लिए खास था, क्योंकि इससे एक बुजुर्ग महिला की जान बच सकी. उन्होंने युवाओं से अपील की कि जरूरत के वक्त रक्तदान से न डरें, क्योंकि यह किसी की जिंदगी बदल सकता है.

अस्पताल में जारी है इलाज, ऑपरेशन की तैयारी शुरू

रक्त मिलने के बाद कलावती देवी का ऑपरेशन अब संभव हो पाया है. डॉक्टरों के मुताबिक महिला की हालत अब स्थिर है और ऑपरेशन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों ने भी मनीष के इस कार्य की सराहना की है. अस्पताल के स्टाफ ने कहा कि ऐसे लोगों के चलते ही समाज में इंसानियत जिंदा है.

मनीष बना गांव का हीरो, लोग कर रहे तारीफ

भारतपुर गांव में मनीष कुमार की चर्चा हर जुबान पर है. हर कोई उसके इस काम की सराहना कर रहा है. बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सबने मनीष को गांव का सच्चा हीरो बताया. गांव वालों का कहना है कि अगर हर व्यक्ति मनीष की तरह सोचने लगे, तो देश में खून की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी.

31 May 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: रिश्तेदार पीछे हटे, गांव का बेटा बना सहारा ! फतेहपुर के मनीष ने ऐसे बचाई एक बुजुर्ग की जिंदगी

Fatehpur News In Hindi

Fatehpur News: इंसानियत का कोई मोल नहीं होता और जब किसी अनजान की जान बचाने की बात हो, तो यही इंसानियत किसी देवता से कम नहीं लगती. यूपी के फतेहपुर जिले में 26 साल के मनीष कुमार ने ऐसी ही मिसाल पेश की है.

सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक विधवा बुजुर्ग महिला की जान उस वक्त खतरे में थी, जब ऑपरेशन के लिए खून की सख्त जरूरत थी. लेकिन कोई आगे नहीं आया. तब मनीष ने सातवीं बार रक्तदान कर जान बचाई, वो भी एक ऐसे इंसान के लिए जिसे वो जानता तक नहीं था.

हादसे में दो जगह से टूट गए थे पैर, रुक गया था ऑपरेशन 

मंगलवार शाम को थरियांव थाना क्षेत्र के कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर भारतपुर मोड़ के पास एक बुजुर्ग महिला को तेज रफ्तार चार पहिया वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी. घायल महिला की पहचान भारतपुर गांव निवासी 65 वर्षीय कलावती के रूप में हुई.

हादसे में उनके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं. दो जगह से पैर बुरी तरह टूट गए. स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी. लेकिन ऑपरेशन से पहले खून की जरूरत थी, और यहीं आकर मामला अटक गया.

रिश्तेदार भी पीछे हटे, तब सामने आए गांव के मनीष

कलावती देवी विधवा हैं और उनके अपने रिश्तेदार भी खून देने से हिचकिचा रहे थे. कई ने असमर्थता जताई, कुछ मौके पर पहुंचे ही नहीं. ऐसे में जब अस्पताल प्रशासन ने परिवार से किसी ब्लड डोनर की मांग की, तो पूरा परिवार चिंता में पड़ गया.

इसी दौरान गांव के ही रहने वाले मनीष कुमार को इस बारे में पता चला. उन्होंने बिना देर किए अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया. उनकी यह दरियादिली कलावती देवी के लिए जीवनदान साबित हुई.

सातवीं बार खून देकर पेश की मानवता की मिसाल

मनीष कुमार ने बताया कि यह उनका सातवां रक्तदान था. उन्होंने कहा, "मेरे खून से अगर किसी की जान बच सकती है तो इससे बड़ा धर्म कुछ नहीं." मनीष पहले भी कई बार जरूरतमंदों के लिए ब्लड डोनेट कर चुके हैं. लेकिन इस बार का रक्तदान उनके लिए खास था, क्योंकि इससे एक बुजुर्ग महिला की जान बच सकी. उन्होंने युवाओं से अपील की कि जरूरत के वक्त रक्तदान से न डरें, क्योंकि यह किसी की जिंदगी बदल सकता है.

अस्पताल में जारी है इलाज, ऑपरेशन की तैयारी शुरू

रक्त मिलने के बाद कलावती देवी का ऑपरेशन अब संभव हो पाया है. डॉक्टरों के मुताबिक महिला की हालत अब स्थिर है और ऑपरेशन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों ने भी मनीष के इस कार्य की सराहना की है. अस्पताल के स्टाफ ने कहा कि ऐसे लोगों के चलते ही समाज में इंसानियत जिंदा है.

मनीष बना गांव का हीरो, लोग कर रहे तारीफ

भारतपुर गांव में मनीष कुमार की चर्चा हर जुबान पर है. हर कोई उसके इस काम की सराहना कर रहा है. बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सबने मनीष को गांव का सच्चा हीरो बताया. गांव वालों का कहना है कि अगर हर व्यक्ति मनीष की तरह सोचने लगे, तो देश में खून की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी.

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