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फतेहपुर मंदिर-मकबरा विवाद: 10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, सुरक्षा घेरे में रहा कोर्ट कचेहरी परिसर 

फतेहपुर मंदिर-मकबरा विवाद: 10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, सुरक्षा घेरे में रहा कोर्ट कचेहरी परिसर 
फतेहपुर मंदिर मकबरा प्रकरण को लेकर 10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई (फाइल फोटो): Image Yugantar Pravah

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) जिले का मंदिर-मकबरा विवाद अब कोर्ट में है. 11 अगस्त को पूजा-अर्चना और तोड़फोड़ से भड़के इस मामले की सुनवाई अब सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में चल रही है. शनिवार को दोनों पक्षों की बहस के बाद कोर्ट ने अगली तारीख 10 सितंबर निर्धारित कर दी. विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट परिसर और शहर में सुरक्षा इंतजाम किए गए.

Fatehpur News: यूपी के फतेहपुर शहर का मंदिर-मकबरा विवाद अब महज धार्मिक या सामाजिक बहस नहीं रहा, बल्कि एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक चुनौती का रूप ले चुका है. शनिवार को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं, जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 10 सितंबर तय कर दी. इस बीच प्रशासन ने विवाद की गंभीरता को भांपते हुए पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया था.

विवाद की जड़: कब और कैसे शुरू हुआ मामला

आबूनगर मोहल्ले की एक पुरानी इमारत को लेकर यह विवाद सालों से चलता आ रहा है. मोहम्मद अनीश नामक व्यक्ति ने खुद को मकबरा का मुतवल्ली बताते हुए 2007 में सिविल कोर्ट में वाद दाखिल किया.

उनका दावा था कि यह इमारत ऐतिहासिक मकबरा है, जबकि इसकी जमीन पर गलत तरीके से शकुंतला मानसिंह ने मालिकाना हक जताकर 1970 में रामनरेश सिंह को बेच दिया. इसके बाद जमीन प्लॉटिंग में बेच दी गई. 2010 में कोर्ट ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए इमारत को मकबरा घोषित किया और 2012 में तहसील प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में खतौनी में दर्ज कर दिया.

एकतरफा फैसले के खिलाफ अपील और कानूनी लड़ाई

2010 में हुए इस आदेश को चुनौती देते हुए रामनरेश सिंह के बेटे विजय प्रताप सिंह ने 2014 में रेस्टोरेशन दाखिल किया. इसमें देरी होने पर उन्होंने 2018 में अपर जिला जज की अदालत का दरवाजा खटखटाया. अपील को फिर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में जोड़कर सुनवाई शुरू हुई.

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मार्च 2023 में विजय प्रताप सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि उनका पक्ष भी सुना जाए. इस बीच मोहम्मद अनीश का निधन हो गया, जिसके बाद उनके बेटे अबू हरेरा को पक्षकार बनाया गया. लेकिन लगातार तारीखें पड़ने से मामला लंबा खिंचता जा रहा है.

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अदालत में शनिवार को हुई सुनवाई 10 सितंबर अगली तारीख

शनिवार को अबू हरेरा पक्ष के अधिवक्ता अनिल श्रीवास्तव और फिरोज खान ने मुकदमे में आपत्ति दर्ज करने के लिए समय मांगा. कोर्ट ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 10 सितंबर तय कर दी. पूरे दिन कचहरी परिसर में गहमागहमी रही. भाजपा पदाधिकारी और मठ-मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य कोर्ट परिसर के आसपास मौजूद रहे और मुकदमे की कार्यवाही पर बारीकी से नजर रखते रहे.

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पूजा-अर्चना और तोड़फोड़ से बढ़ा था तनाव

7 अगस्त 2025 को मठ-मंदिर संरक्षण समिति ने प्रशासन को पत्र लिखकर इस इमारत को ठाकुर जी विराजमान मंदिर बताते हुए पूजा-सफाई का अधिकार मांगा था. प्रशासन की चुप्पी के बाद समिति ने 10 अगस्त को यहां पूजा-अर्चना की घोषणा कर दी.

11 अगस्त को भारी सुरक्षा के बीच लोग विवादित स्थल में घुस गए और पूजा करने के साथ मजारों में तोड़फोड़ की. इस घटना के बाद चौकी प्रभारी की तहरीर पर 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था.

प्रशासन सतर्क, जमीन की घेरेबंदी की तैयारी

विवाद गहराने के बाद कमिश्नर और आईजी ने मौके का निरीक्षण किया कई दिनों तक आस पास के जनपदों की पुलिस ने कैंप किया. विवादित क्षेत्र यानी लगभग 11 बीघे जमीन पर पुलिस का कड़ा पहरा जारी है. अब प्रशासन इस भूमि को तारबंदी से घेरने की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके.

31 Aug 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

फतेहपुर मंदिर-मकबरा विवाद: 10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, सुरक्षा घेरे में रहा कोर्ट कचेहरी परिसर 

Fatehpur News In Hindi

Fatehpur News: यूपी के फतेहपुर शहर का मंदिर-मकबरा विवाद अब महज धार्मिक या सामाजिक बहस नहीं रहा, बल्कि एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक चुनौती का रूप ले चुका है. शनिवार को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं, जिसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 10 सितंबर तय कर दी. इस बीच प्रशासन ने विवाद की गंभीरता को भांपते हुए पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया था.

विवाद की जड़: कब और कैसे शुरू हुआ मामला

आबूनगर मोहल्ले की एक पुरानी इमारत को लेकर यह विवाद सालों से चलता आ रहा है. मोहम्मद अनीश नामक व्यक्ति ने खुद को मकबरा का मुतवल्ली बताते हुए 2007 में सिविल कोर्ट में वाद दाखिल किया.

उनका दावा था कि यह इमारत ऐतिहासिक मकबरा है, जबकि इसकी जमीन पर गलत तरीके से शकुंतला मानसिंह ने मालिकाना हक जताकर 1970 में रामनरेश सिंह को बेच दिया. इसके बाद जमीन प्लॉटिंग में बेच दी गई. 2010 में कोर्ट ने एकतरफा फैसला सुनाते हुए इमारत को मकबरा घोषित किया और 2012 में तहसील प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में खतौनी में दर्ज कर दिया.

एकतरफा फैसले के खिलाफ अपील और कानूनी लड़ाई

2010 में हुए इस आदेश को चुनौती देते हुए रामनरेश सिंह के बेटे विजय प्रताप सिंह ने 2014 में रेस्टोरेशन दाखिल किया. इसमें देरी होने पर उन्होंने 2018 में अपर जिला जज की अदालत का दरवाजा खटखटाया. अपील को फिर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में जोड़कर सुनवाई शुरू हुई.

मार्च 2023 में विजय प्रताप सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि उनका पक्ष भी सुना जाए. इस बीच मोहम्मद अनीश का निधन हो गया, जिसके बाद उनके बेटे अबू हरेरा को पक्षकार बनाया गया. लेकिन लगातार तारीखें पड़ने से मामला लंबा खिंचता जा रहा है.

अदालत में शनिवार को हुई सुनवाई 10 सितंबर अगली तारीख

शनिवार को अबू हरेरा पक्ष के अधिवक्ता अनिल श्रीवास्तव और फिरोज खान ने मुकदमे में आपत्ति दर्ज करने के लिए समय मांगा. कोर्ट ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 10 सितंबर तय कर दी. पूरे दिन कचहरी परिसर में गहमागहमी रही. भाजपा पदाधिकारी और मठ-मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य कोर्ट परिसर के आसपास मौजूद रहे और मुकदमे की कार्यवाही पर बारीकी से नजर रखते रहे.

पूजा-अर्चना और तोड़फोड़ से बढ़ा था तनाव

7 अगस्त 2025 को मठ-मंदिर संरक्षण समिति ने प्रशासन को पत्र लिखकर इस इमारत को ठाकुर जी विराजमान मंदिर बताते हुए पूजा-सफाई का अधिकार मांगा था. प्रशासन की चुप्पी के बाद समिति ने 10 अगस्त को यहां पूजा-अर्चना की घोषणा कर दी.

11 अगस्त को भारी सुरक्षा के बीच लोग विवादित स्थल में घुस गए और पूजा करने के साथ मजारों में तोड़फोड़ की. इस घटना के बाद चौकी प्रभारी की तहरीर पर 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था.

प्रशासन सतर्क, जमीन की घेरेबंदी की तैयारी

विवाद गहराने के बाद कमिश्नर और आईजी ने मौके का निरीक्षण किया कई दिनों तक आस पास के जनपदों की पुलिस ने कैंप किया. विवादित क्षेत्र यानी लगभग 11 बीघे जमीन पर पुलिस का कड़ा पहरा जारी है. अब प्रशासन इस भूमि को तारबंदी से घेरने की तैयारी कर रहा है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके.

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