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Fatehpur News: मैडम हमें पढ़ाती नहीं, पैर दबवाती हैं..फतेहपुर में मासूम बच्चों की आंखों में छलका दर्द, ग्रामीणों ने जड़ा ताला

Fatehpur News: मैडम हमें पढ़ाती नहीं, पैर दबवाती हैं..फतेहपुर में मासूम बच्चों की आंखों में छलका दर्द, ग्रामीणों ने जड़ा ताला
फतेहपुर प्राथमिक विद्यालय की इंचार्ज से नाराज़ ग्रामीणों ने जड़ा ताला, पहुंचे BEO: Image Yugantar Pravah

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में सरकारी स्कूल एक मैडम बच्चों को पढ़ाने के बजाय उसने पैर दबवाती हैं. इतनी ही नहीं कुर्सी में आराम फरमाने के दौरान उनको जगाने पर मासूमों को क्रोध का सामना करना पड़ता है. मामला बहुआ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय चकमीरपुर का है.

Fatehpur News: स्कूल जहां बच्चों के सपने आकार लेते हैं, वहां अगर डर और लापरवाही का साया मंडराने लगे, तो सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं मासूमों का होता है. फतेहपुर के बहुआ विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय चकमीरपुर में बच्चों का दर्द बुधवार को पूरे गांव ने सुना, जब उन्होंने खुद कहा—"इंचार्ज प्रधानाध्यापिका मंजू रानी मैडम पढ़ातीं नहीं, बस सोने आतीं हैं. जगाने पर मारती हैं और हमसे पैर दबवाती हैं" यह सुनकर गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया. 

स्कूल बना डर का घर, मासूमों का भविष्य अंधेरे में

फतेहपुर (Fatehpur) के बहुआ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय चकमीरपुर में जब बच्चे स्कूल पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. बच्चों को समझ नहीं आया कि वे अपनी किताबें लेकर स्कूल आए थे, फिर उन्हें रोका क्यों जा रहा है?

जब कुछ बच्चों से पूछा गया कि वे पढ़ाई क्यों नहीं करना चाहते, तो उनकी आंखों में डर साफ दिखा. "मैडम स्कूल में आती हैं, लेकिन हमें पढ़ाने की जगह खुद सो जाती हैं. अगर कोई उन्हें उठाए, तो मारती भी हैं" छोटे से बच्चे ने सिर झुका लिया, जैसे यह बात कहने में भी उसे डर लग रहा हो. एक बच्चे ने धीरे से कहा,"हम पढ़ने आते हैं, लेकिन मैडम कहती हैं पैर दबाओ..हम क्या करें?" बच्चों के यह शब्द सुनकर गांव वालों का धैर्य जवाब दे गया.

मिड-डे मील में भी लापरवाही, पेट भरने को न दाल, न दूध

गांव वालों का गुस्सा केवल बच्चों के साथ दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं था. मिड-डे मील में भी भारी अनियमितताएं थीं. बच्चों को न तो सही से खाना मिलता है, न दूध, न दाल.

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एक अभिभावक ने कहा कि सरकारी स्कूलों में हम बच्चों को इसलिए भेजते हैं ताकि वे पढ़ें और अच्छा खाना खाएं, लेकिन यहां तो पढ़ाई भी नहीं और खाने में भी लूट है.

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BEO मौके पर पहुंचे, मंजू रानी को कारण बताओ नोटिस

स्कूल में हंगामे की सूचना मिलते ही खंड शिक्षाधिकारी (BEO) हौसिला प्रसाद मौके पर पहुंचे. जब उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से बात की, तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया.

Read More: Fatehpur News: "कैबिनेट मंत्री और सांसद रिश्तेदार हैं" धौंस जमाने वाले सपा नेता का अल्ट्रासाउंड सेंटर सीज

निरीक्षण के दौरान साफ हुआ कि प्रधानाध्यापिका मंजू रानी का रवैया बेहद लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना है. बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए BEO ने प्रधानाध्यापिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई क्यों न की जाए.

उन्होंने स्कूल स्टाफ को सख्त निर्देश दिए कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें, पढ़ाई सही तरीके से हो, और मिड-डे मील में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इन निर्देशों से कुछ बदलेगा?

26 Mar 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: मैडम हमें पढ़ाती नहीं, पैर दबवाती हैं..फतेहपुर में मासूम बच्चों की आंखों में छलका दर्द, ग्रामीणों ने जड़ा ताला

Fatehpur News In Hindi

Fatehpur News: स्कूल जहां बच्चों के सपने आकार लेते हैं, वहां अगर डर और लापरवाही का साया मंडराने लगे, तो सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं मासूमों का होता है. फतेहपुर के बहुआ विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय चकमीरपुर में बच्चों का दर्द बुधवार को पूरे गांव ने सुना, जब उन्होंने खुद कहा—"इंचार्ज प्रधानाध्यापिका मंजू रानी मैडम पढ़ातीं नहीं, बस सोने आतीं हैं. जगाने पर मारती हैं और हमसे पैर दबवाती हैं" यह सुनकर गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया. 

स्कूल बना डर का घर, मासूमों का भविष्य अंधेरे में

फतेहपुर (Fatehpur) के बहुआ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय चकमीरपुर में जब बच्चे स्कूल पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. बच्चों को समझ नहीं आया कि वे अपनी किताबें लेकर स्कूल आए थे, फिर उन्हें रोका क्यों जा रहा है?

जब कुछ बच्चों से पूछा गया कि वे पढ़ाई क्यों नहीं करना चाहते, तो उनकी आंखों में डर साफ दिखा. "मैडम स्कूल में आती हैं, लेकिन हमें पढ़ाने की जगह खुद सो जाती हैं. अगर कोई उन्हें उठाए, तो मारती भी हैं" छोटे से बच्चे ने सिर झुका लिया, जैसे यह बात कहने में भी उसे डर लग रहा हो. एक बच्चे ने धीरे से कहा,"हम पढ़ने आते हैं, लेकिन मैडम कहती हैं पैर दबाओ..हम क्या करें?" बच्चों के यह शब्द सुनकर गांव वालों का धैर्य जवाब दे गया.

मिड-डे मील में भी लापरवाही, पेट भरने को न दाल, न दूध

गांव वालों का गुस्सा केवल बच्चों के साथ दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं था. मिड-डे मील में भी भारी अनियमितताएं थीं. बच्चों को न तो सही से खाना मिलता है, न दूध, न दाल.

एक अभिभावक ने कहा कि सरकारी स्कूलों में हम बच्चों को इसलिए भेजते हैं ताकि वे पढ़ें और अच्छा खाना खाएं, लेकिन यहां तो पढ़ाई भी नहीं और खाने में भी लूट है.

BEO मौके पर पहुंचे, मंजू रानी को कारण बताओ नोटिस

स्कूल में हंगामे की सूचना मिलते ही खंड शिक्षाधिकारी (BEO) हौसिला प्रसाद मौके पर पहुंचे. जब उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से बात की, तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया.

निरीक्षण के दौरान साफ हुआ कि प्रधानाध्यापिका मंजू रानी का रवैया बेहद लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना है. बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए BEO ने प्रधानाध्यापिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई क्यों न की जाए.

उन्होंने स्कूल स्टाफ को सख्त निर्देश दिए कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें, पढ़ाई सही तरीके से हो, और मिड-डे मील में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इन निर्देशों से कुछ बदलेगा?

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