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Fatehpur News: लाखों के भ्रष्टाचार में कार्यालय से गिरफ्तार हुए BDO, सरकारी योजनाओं में किया था गबन

Fatehpur News: लाखों के भ्रष्टाचार में कार्यालय से गिरफ्तार हुए BDO, सरकारी योजनाओं में किया था गबन
फतेहपुर में भ्रष्टाचार के आरोप में बीडीओ विश्वनाथ पाल गिरफ्तार: Image Credit Original Source

फतेहपुर के सरकंडी ग्राम सभा घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है. खजुहा ब्लॉक के बीडीओ विश्वनाथ पाल को भ्रष्टाचार के आरोप में उनके कार्यालय से गिरफ्तार किया गया. मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना में करीब 55 लाख रुपये के गबन का मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है.

Fatehpur Sarkandi News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सरकारी योजनाओं के नाम पर हुए बड़े घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है. असोथर ब्लॉक की सरकंडी ग्राम सभा में मनरेगा मजदूरी और प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए गबन के मामले में अब तत्कालीन असोथर बीडीओ और वर्तमान खजुआ बीडीओ की गिरफ्तारी हुई है. पुलिस ने खजुहा ब्लॉक कार्यालय से बीडीओ विश्वनाथ पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

सरकंडी घोटाले में बीडीओ की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

असोथर ब्लॉक अंतर्गत सरकंडी ग्राम सभा में सामने आए करोड़ों की सरकारी योजनाओं की अनियमितताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी मामले में खजुहा ब्लॉक के वर्तमान बीडीओ विश्वनाथ पाल को बुधवार को उनके कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस के मुताबिक, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जब घोटाला हुआ उस समय विश्वनाथ पाल असोथर ब्लॉक में बीडीओ के पद पर तैनात थे. शासन और जिला स्तर की जांच में उन्हें दोषी पाया गया, जिसके बाद सीओ वीर सिंह ने गिरफ्तारी के आदेश दिए. बताया जा रहा है कि विवेचना में उनका नाम प्रकाश में आया है.

मनरेगा और पीएम आवास योजना में 55 लाख से ज्यादा का गबन

सरकंडी ग्राम सभा में हुए घोटाले का केंद्र मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि रही है. जांच में सामने आया कि कई लाभार्थियों के खातों में आने वाली रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर सरकारी धन का गबन किया गया. प्रारंभिक जांच में कुल 55 लाख 46 हजार 326 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई है.

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पीएम आवास योजना के तहत पहली किस्त के रूप में 1 लाख 20 हजार रुपये लाभार्थी को मिलने चाहिए, जबकि मनरेगा मजदूर को लगभग 20 हजार रुपये की मजदूरी मिलती है. लेकिन जांच में 20 ऐसे लाभार्थी मिले जिनकी राशि और मजदूरी दूसरे खातों में भेज दी गई थी. बताया जा रहा है कि घोटाला वर्ष 2023-24 के दौरान हुआ, जब बीडीओ के रूप में विश्वनाथ पाल वहां तैनात थे.

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कोटेदार सुनील तिवारी की शिकायत पर उजागर हुआ मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत ग्राम सभा के कोटेदार सुनील तिवारी की शिकायत से हुई. उन्होंने शासन तक यह शिकायत पहुंचाई कि ग्राम सभा में कराए गए विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार हुआ था. इसके बाद वर्तमान वीडियो राहुल मिश्रा ने प्रशासनिक आदेश पर बीते 2 सितंबर को 10 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया. बताया जा रहा है कि इसके जांच में पीएम आवास मामले में भी गबन की पुष्टि हुई थी. लखनऊ की कई टीमें लगातार ग्राम सभा की जांच में लगीं रहीं. जांच के दौरान ही हुए विवाद के बाद यह मामला और सुर्ख़ियों में आ गया.

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पहले भी हुई थीं गिरफ्तारियां, अब बीडीओ पर कार्रवाई

सरकंडी घोटाले में यह पहली गिरफ्तारी नहीं है. पुलिस इससे पहले ग्राम प्रधान पुष्पा देवी पत्नी संतोष द्विवेदी और तत्कालीन जेई नरेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर चुकी है. प्रधान को 21 दिसंबर को उनके आवास से पकड़ा गया था, जबकि जेई को तांबेश्वर चौराहा से गिरफ्तार किया गया. हालांकि बाद में हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिल चुकी है. लेकिन अब बीडीओ विश्वनाथ पाल की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है. 

पुलिस का कहना है कि घोटाले के दौरान बीडीओ की भूमिका अहम रही और जांच में उनकी संलिप्तता स्पष्ट हुई. कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है. इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है.

नामजद 10 अधिकारी-कर्मचारी, कुछ को हाईकोर्ट से राहत

इस घोटाले में कुल 10 अधिकारियों और कर्मचारियों को नामजद किया गया है. इनमें तत्कालीन सेक्टर अधिकारी नरेंद्र गुप्ता, अवर अभियंता अजय प्रताप सिंह, ग्राम विकास अधिकारी धर्मकीर्ति, वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्रनाथ, लेखाकार सूर्य प्रकाश, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी नितिन श्रीवास्तव, पंचायत सहायक पूनम देवी, मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटर रामप्रकाश सिंह, प्रकाश सिंह और एनआरएलएम ऑपरेटर शिवम शामिल हैं. बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ को गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है. हालांकि जांच अभी जारी है और प्रशासन का दावा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

विवादों में भी रहे बीडीओ, वायरल हुआ था वीडियो

बीडीओ विश्वनाथ पाल का कार्यकाल पहले भी विवादों में रहा है. उनके आवास पर पथराव और गालीगलौज का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी. इसी विवाद के बाद उन्हें 2025 में ब्लॉक से हटाया गया था. लेकिन अब सरकंडी घोटाले में उनकी गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर हैं.

29 Jan 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: लाखों के भ्रष्टाचार में कार्यालय से गिरफ्तार हुए BDO, सरकारी योजनाओं में किया था गबन

Fatehpur Sarkandi News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सरकारी योजनाओं के नाम पर हुए बड़े घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है. असोथर ब्लॉक की सरकंडी ग्राम सभा में मनरेगा मजदूरी और प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए गबन के मामले में अब तत्कालीन असोथर बीडीओ और वर्तमान खजुआ बीडीओ की गिरफ्तारी हुई है. पुलिस ने खजुहा ब्लॉक कार्यालय से बीडीओ विश्वनाथ पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

सरकंडी घोटाले में बीडीओ की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

असोथर ब्लॉक अंतर्गत सरकंडी ग्राम सभा में सामने आए करोड़ों की सरकारी योजनाओं की अनियमितताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी मामले में खजुहा ब्लॉक के वर्तमान बीडीओ विश्वनाथ पाल को बुधवार को उनके कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस के मुताबिक, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जब घोटाला हुआ उस समय विश्वनाथ पाल असोथर ब्लॉक में बीडीओ के पद पर तैनात थे. शासन और जिला स्तर की जांच में उन्हें दोषी पाया गया, जिसके बाद सीओ वीर सिंह ने गिरफ्तारी के आदेश दिए. बताया जा रहा है कि विवेचना में उनका नाम प्रकाश में आया है.

मनरेगा और पीएम आवास योजना में 55 लाख से ज्यादा का गबन

सरकंडी ग्राम सभा में हुए घोटाले का केंद्र मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि रही है. जांच में सामने आया कि कई लाभार्थियों के खातों में आने वाली रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर सरकारी धन का गबन किया गया. प्रारंभिक जांच में कुल 55 लाख 46 हजार 326 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई है.

पीएम आवास योजना के तहत पहली किस्त के रूप में 1 लाख 20 हजार रुपये लाभार्थी को मिलने चाहिए, जबकि मनरेगा मजदूर को लगभग 20 हजार रुपये की मजदूरी मिलती है. लेकिन जांच में 20 ऐसे लाभार्थी मिले जिनकी राशि और मजदूरी दूसरे खातों में भेज दी गई थी. बताया जा रहा है कि घोटाला वर्ष 2023-24 के दौरान हुआ, जब बीडीओ के रूप में विश्वनाथ पाल वहां तैनात थे.

कोटेदार सुनील तिवारी की शिकायत पर उजागर हुआ मामला

इस पूरे मामले की शुरुआत ग्राम सभा के कोटेदार सुनील तिवारी की शिकायत से हुई. उन्होंने शासन तक यह शिकायत पहुंचाई कि ग्राम सभा में कराए गए विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार हुआ था. इसके बाद वर्तमान वीडियो राहुल मिश्रा ने प्रशासनिक आदेश पर बीते 2 सितंबर को 10 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया. बताया जा रहा है कि इसके जांच में पीएम आवास मामले में भी गबन की पुष्टि हुई थी. लखनऊ की कई टीमें लगातार ग्राम सभा की जांच में लगीं रहीं. जांच के दौरान ही हुए विवाद के बाद यह मामला और सुर्ख़ियों में आ गया.

पहले भी हुई थीं गिरफ्तारियां, अब बीडीओ पर कार्रवाई

सरकंडी घोटाले में यह पहली गिरफ्तारी नहीं है. पुलिस इससे पहले ग्राम प्रधान पुष्पा देवी पत्नी संतोष द्विवेदी और तत्कालीन जेई नरेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर चुकी है. प्रधान को 21 दिसंबर को उनके आवास से पकड़ा गया था, जबकि जेई को तांबेश्वर चौराहा से गिरफ्तार किया गया. हालांकि बाद में हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिल चुकी है. लेकिन अब बीडीओ विश्वनाथ पाल की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है. 

पुलिस का कहना है कि घोटाले के दौरान बीडीओ की भूमिका अहम रही और जांच में उनकी संलिप्तता स्पष्ट हुई. कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है. इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है.

नामजद 10 अधिकारी-कर्मचारी, कुछ को हाईकोर्ट से राहत

इस घोटाले में कुल 10 अधिकारियों और कर्मचारियों को नामजद किया गया है. इनमें तत्कालीन सेक्टर अधिकारी नरेंद्र गुप्ता, अवर अभियंता अजय प्रताप सिंह, ग्राम विकास अधिकारी धर्मकीर्ति, वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्रनाथ, लेखाकार सूर्य प्रकाश, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी नितिन श्रीवास्तव, पंचायत सहायक पूनम देवी, मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटर रामप्रकाश सिंह, प्रकाश सिंह और एनआरएलएम ऑपरेटर शिवम शामिल हैं. बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ को गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है. हालांकि जांच अभी जारी है और प्रशासन का दावा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

विवादों में भी रहे बीडीओ, वायरल हुआ था वीडियो

बीडीओ विश्वनाथ पाल का कार्यकाल पहले भी विवादों में रहा है. उनके आवास पर पथराव और गालीगलौज का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी. इसी विवाद के बाद उन्हें 2025 में ब्लॉक से हटाया गया था. लेकिन अब सरकंडी घोटाले में उनकी गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर हैं.

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