सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव: मिडल ईस्ट तनाव का कितना असर ! क्या फिर बढ़ेंगे गोल्ड-सिल्वर के दाम?
मिडल ईस्ट में ईरान-इजरायल तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है. इसके बीच भारत में सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट मुनाफावसूली की वजह से है, लेकिन आने वाले दिनों में हालात के अनुसार कीमतों में फिर उछाल आ सकता है.
Gold Silver Rate In India: मिडल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. इस भू-राजनीतिक संकट ने निवेशकों की रणनीति को भी प्रभावित किया है. आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार बाजार में अलग तस्वीर देखने को मिल रही है. पिछले एक सप्ताह में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है.
मिडल ईस्ट तनाव का वैश्विक बाजारों पर असर
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है. जब भी दुनिया में किसी बड़े स्तर पर युद्ध या भू-राजनीतिक संकट की स्थिति बनती है तो निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश की ओर झुकते हैं. सोना और चांदी को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है.
हालांकि मौजूदा हालात में निवेशकों की रणनीति कुछ अलग दिखाई दे रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है और कई निवेशक जोखिम कम करने के लिए नकदी अपने पास रखना पसंद कर रहे हैं. यही कारण है कि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी में भी फिलहाल उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिल रहा है. इसका असर भारतीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है.
एक हफ्ते में चांदी के दाम में भारी गिरावट
लेकिन पिछले शुक्रवार तक यह घटकर 2,68,569 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया. इस तरह महज एक सप्ताह के भीतर चांदी के दाम में करीब 14,075 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी औद्योगिक धातु भी है, इसलिए वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की रणनीति में बदलाव का असर इस पर तेजी से पड़ता है. इसी वजह से चांदी के भाव में सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है.
रिकॉर्ड हाई से अभी भी काफी नीचे चल रही चांदी
अगर चांदी के मौजूदा भाव की तुलना इसके ऐतिहासिक उच्च स्तर से करें तो यह अभी भी काफी सस्ती नजर आ रही है. 29 जनवरी को चांदी ने पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो का लाइफटाइम हाई बनाया था.
इसके बाद बाजार में तेज गिरावट का दौर शुरू हुआ और चांदी के दाम करीब 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक फिसल गए. फिलहाल मौजूदा स्तर पर चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 1,51,479 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे चल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी गिरावट के बाद बाजार में फिर से स्थिरता आने पर कीमतों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है.
सोने की कीमत में भी आई मामूली गिरावट
चांदी के साथ-साथ सोने के भाव में भी बीते सप्ताह हल्की गिरावट देखने को मिली है. एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 27 फरवरी को 1,62,104 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.
हालांकि पिछले शुक्रवार को मामूली बढ़त के बावजूद यह 1,61,675 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. इस तरह एक सप्ताह के भीतर सोने की कीमत में करीब 429 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी दर्ज की गई.
हालांकि सोने की गिरावट चांदी की तुलना में काफी कम रही है. इसका कारण यह है कि वैश्विक संकट के समय निवेशक आमतौर पर सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं.
ऑल टाइम हाई से अभी भी सस्ता मिल रहा है सोना
सोने के भाव भी अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे चल रहे हैं. 29 जनवरी को सोने ने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था. इसके बाद बाजार में गिरावट का दौर शुरू हुआ.
मौजूदा समय में 24 कैरेट सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 31,421 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार सोने की कीमतों में आने वाले समय में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है. यदि मिडल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता गहराती है, तो निवेशक दोबारा सोने की ओर रुख कर सकते हैं.
क्या आगे फिर बढ़ सकते हैं सोना-चांदी के दाम?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, हालिया गिरावट की बड़ी वजह मुनाफावसूली है. पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों में तेज उछाल आया था. कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर अपने निवेश से मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में गिरावट आई.
इसके अलावा वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के कारण निवेशक नकदी अपने पास रखना भी पसंद कर रहे हैं. हालांकि लंबी अवधि के नजरिये से देखें तो भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता सोना-चांदी के लिए सहायक कारक माने जाते हैं. इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा गिरावट अस्थायी हो सकती है और हालात सामान्य होते ही कीमती धातुओं की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है.
