फर्जी मार्कशीट के सहारे 10 साल तक बनी रहीं टीचर, STF जांच में खुला खेल, फतेहपुर BSA ने किया सस्पेंड
फतेहपुर जिले में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी करने का बड़ा मामला सामने आया है. खजुहा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय समसपुर में तैनात सहायक अध्यापक सुषमा देवी को एसटीएफ जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबित कर दिया गया है. आरोप है कि उन्होंने दो बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देकर जन्मतिथि बदलकर नौकरी हासिल की. अब विभागीय जांच के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई भी तय मानी जा रही है.
Fatehpur Teacher Suspend: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. खजुहा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय समसपुर में तैनात रहीं सहायक अध्यापक सुषमा देवी पर फर्जी मार्कशीट और बदली हुई जन्मतिथि के सहारे नौकरी पाने का आरोप साबित होने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है. STF की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीएसए भारती त्रिपाठी ने शिक्षिका को निलंबित कर दिया है. अब जल्द ही सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी हो सकती है.
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी, STF जांच के बाद कार्रवाई
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. विकास खंड खजुहा के कंपोजिट विद्यालय समसपुर में तैनात रहीं सहायक अध्यापक सुषमा देवी पर फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के सहारे नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है. स्पेशल टास्क फोर्स की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी भारती त्रिपाठी ने उन्हें निलंबित कर दिया है. विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच पूरी होते ही शिक्षिका की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है.
यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि आरोप है कि शिक्षिका करीब एक दशक तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी करती रहीं और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी. STF की रिपोर्ट ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच, शासन तक पहुंचा मामला
शिकायत मिलने के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा और जांच की जिम्मेदारी स्पेशल टास्क फोर्स को सौंपी गई. STF ने दस्तावेजों की गहन जांच की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच के दौरान अलग-अलग शैक्षिक अभिलेखों में जन्मतिथि और प्रमाणपत्रों में अंतर पाया गया. इसके बाद पूरा मामला गंभीर हो गया और विभागीय अधिकारियों पर भी दबाव बढ़ा.
STF जांच में दो बार परीक्षा देने की पुष्टि
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि सुषमा देवी ने दो बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी. जांच में यह भी सामने आया कि दोनों प्रमाणपत्रों में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी. आरोप है कि इसी हेराफेरी के जरिए उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए पात्रता हासिल की.
जांच एजेंसी ने 15 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट फतेहपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौंप दी थी. हालांकि आरोप है कि रिपोर्ट मिलने के बावजूद विभाग ने लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और मामला दबाए रखा गया. अब जब मामला फिर सुर्खियों में आया तो विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी.
BSA भारती त्रिपाठी ने किया निलंबित, बैठाई विभागीय जांच
बेसिक शिक्षा अधिकारी भारती त्रिपाठी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिक्षिका सुषमा देवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू करा दी गई है.
बीएसए ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद शासन को पत्र भेजकर बर्खास्तगी की संस्तुति की जाएगी. विभाग अब इस पूरे प्रकरण में यह भी जांच करेगा कि नौकरी के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और इसमें किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका तो नहीं रही.
माना जा रहा है कि यदि जांच में सभी आरोप सही पाए गए तो शिक्षिका पर केवल विभागीय कार्रवाई ही नहीं बल्कि कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. विभाग अब पुराने रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है.
फर्जी मार्कशीट के सहारे 10 साल तक बनी रहीं टीचर, STF जांच में खुला खेल, फतेहपुर BSA ने किया सस्पेंड
Fatehpur Teacher Suspend: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. खजुहा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय समसपुर में तैनात रहीं सहायक अध्यापक सुषमा देवी पर फर्जी मार्कशीट और बदली हुई जन्मतिथि के सहारे नौकरी पाने का आरोप साबित होने के बाद कार्रवाई शुरू हो गई है. STF की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीएसए भारती त्रिपाठी ने शिक्षिका को निलंबित कर दिया है. अब जल्द ही सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी हो सकती है.
फर्जी दस्तावेजों से नौकरी, STF जांच के बाद कार्रवाई
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. विकास खंड खजुहा के कंपोजिट विद्यालय समसपुर में तैनात रहीं सहायक अध्यापक सुषमा देवी पर फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के सहारे नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है. स्पेशल टास्क फोर्स की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी भारती त्रिपाठी ने उन्हें निलंबित कर दिया है. विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच पूरी होते ही शिक्षिका की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है.
यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि आरोप है कि शिक्षिका करीब एक दशक तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी करती रहीं और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी. STF की रिपोर्ट ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच, शासन तक पहुंचा मामला
पूरा मामला तब सामने आया जब कानपुर के चौराई निवासी राजेंद्र पांडेय ने वर्ष 2023 में शासन को शिकायत भेजी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि सहायक अध्यापक सुषमा देवी ने दो अलग-अलग बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देकर अपनी जन्मतिथि में बदलाव कराया और उसी बदली हुई जानकारी के आधार पर नौकरी प्राप्त की.
शिकायत मिलने के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा और जांच की जिम्मेदारी स्पेशल टास्क फोर्स को सौंपी गई. STF ने दस्तावेजों की गहन जांच की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच के दौरान अलग-अलग शैक्षिक अभिलेखों में जन्मतिथि और प्रमाणपत्रों में अंतर पाया गया. इसके बाद पूरा मामला गंभीर हो गया और विभागीय अधिकारियों पर भी दबाव बढ़ा.
STF जांच में दो बार परीक्षा देने की पुष्टि
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि सुषमा देवी ने दो बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी. जांच में यह भी सामने आया कि दोनों प्रमाणपत्रों में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी. आरोप है कि इसी हेराफेरी के जरिए उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए पात्रता हासिल की.
जांच एजेंसी ने 15 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट फतेहपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौंप दी थी. हालांकि आरोप है कि रिपोर्ट मिलने के बावजूद विभाग ने लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और मामला दबाए रखा गया. अब जब मामला फिर सुर्खियों में आया तो विभाग को कार्रवाई करनी पड़ी.
BSA भारती त्रिपाठी ने किया निलंबित, बैठाई विभागीय जांच
बेसिक शिक्षा अधिकारी भारती त्रिपाठी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिक्षिका सुषमा देवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू करा दी गई है.
बीएसए ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद शासन को पत्र भेजकर बर्खास्तगी की संस्तुति की जाएगी. विभाग अब इस पूरे प्रकरण में यह भी जांच करेगा कि नौकरी के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और इसमें किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका तो नहीं रही.
माना जा रहा है कि यदि जांच में सभी आरोप सही पाए गए तो शिक्षिका पर केवल विभागीय कार्रवाई ही नहीं बल्कि कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. विभाग अब पुराने रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है.