आजम खान को बड़ा झटका: IAS आन्जनेय कुमार पर टिप्पणी करना पड़ा भारी, कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के पूर्व सांसद आजम खान को 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई है. साथ ही 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.
Rampur News UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान को अदालत से बड़ा झटका लगा है. 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के खिलाफ विवादित बयान देने के मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा सुनाई है.
चुनावी मंच से दिए गए बयान ने खड़ा किया था बड़ा विवाद
साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर सीट पूरे देश में चर्चा का केंद्र बनी हुई थी. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में आजम खान चुनाव मैदान में थे. प्रचार के दौरान एक जनसभा में उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं.
उन्होंने जिलाधिकारी को 'तनखैया' कहा था और यह तक कह दिया था कि उनसे उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के जूते साफ कराए जाएंगे. इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी.
प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंचाने का लगा आरोप
आजम खान के बयान को केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं माना गया, बल्कि इसे प्रशासनिक सेवा में कार्यरत एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना गया. आरोप था कि चुनावी मंच से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न सिर्फ मर्यादा के खिलाफ था, बल्कि इससे सरकारी अधिकारियों के सम्मान पर भी प्रतिकूल असर पड़ा. साथ ही इसे आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में भी देखा गया. प्रशासनिक अधिकारियों में इस बयान को लेकर व्यापक नाराजगी थी और इसने राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी थी.
भोट थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा
विवाद बढ़ने के बाद रामपुर जिले के भोट थाना क्षेत्र में आजम खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस ने मामले की जांच कर साक्ष्य एकत्र किए और बाद में अदालत में चार्जशीट दाखिल की. केस में चुनावी भाषण की रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों को शामिल किया गया. लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह साबित करने की कोशिश की कि आरोपी द्वारा दिया गया बयान जानबूझकर अपमानजनक और कानून के दायरे में अपराध की श्रेणी में आता है.
एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया आज़म के खिलाफ़ फैसला
रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद शनिवार, 16 मई 2026 को फैसला सुनाया गया. अदालत ने आजम खान को दोषी मानते हुए 2 साल के कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. आजम खान पहले भी कई कानूनी मामलों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. हालांकि उन्हें उच्च अदालत में अपील का अधिकार प्राप्त है, लेकिन फिलहाल यह फैसला राजनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है.
आजम खान को बड़ा झटका: IAS आन्जनेय कुमार पर टिप्पणी करना पड़ा भारी, कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा
Rampur News UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान को अदालत से बड़ा झटका लगा है. 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के खिलाफ विवादित बयान देने के मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 2 साल की सजा सुनाई है.
चुनावी मंच से दिए गए बयान ने खड़ा किया था बड़ा विवाद
साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर सीट पूरे देश में चर्चा का केंद्र बनी हुई थी. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में आजम खान चुनाव मैदान में थे. प्रचार के दौरान एक जनसभा में उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं.
उन्होंने जिलाधिकारी को 'तनखैया' कहा था और यह तक कह दिया था कि उनसे उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के जूते साफ कराए जाएंगे. इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी.
प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंचाने का लगा आरोप
आजम खान के बयान को केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं माना गया, बल्कि इसे प्रशासनिक सेवा में कार्यरत एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना गया. आरोप था कि चुनावी मंच से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न सिर्फ मर्यादा के खिलाफ था, बल्कि इससे सरकारी अधिकारियों के सम्मान पर भी प्रतिकूल असर पड़ा. साथ ही इसे आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में भी देखा गया. प्रशासनिक अधिकारियों में इस बयान को लेकर व्यापक नाराजगी थी और इसने राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी थी.
भोट थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा
विवाद बढ़ने के बाद रामपुर जिले के भोट थाना क्षेत्र में आजम खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस ने मामले की जांच कर साक्ष्य एकत्र किए और बाद में अदालत में चार्जशीट दाखिल की. केस में चुनावी भाषण की रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों को शामिल किया गया. लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह साबित करने की कोशिश की कि आरोपी द्वारा दिया गया बयान जानबूझकर अपमानजनक और कानून के दायरे में अपराध की श्रेणी में आता है.
एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया आज़म के खिलाफ़ फैसला
रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद शनिवार, 16 मई 2026 को फैसला सुनाया गया. अदालत ने आजम खान को दोषी मानते हुए 2 साल के कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. आजम खान पहले भी कई कानूनी मामलों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. हालांकि उन्हें उच्च अदालत में अपील का अधिकार प्राप्त है, लेकिन फिलहाल यह फैसला राजनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है.