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UP Panchayat Ghotala: फतेहपुर की इस पंचायत में 1500000 का घोटाला, डीएम की नोटिस, क्या प्रधान सचिव पर होगी कार्रवाई?

UP Panchayat Ghotala: फतेहपुर की इस पंचायत में 1500000 का घोटाला, डीएम की नोटिस, क्या प्रधान सचिव पर होगी कार्रवाई?
फतेहपुर की देवरी बुजुर्ग ग्राम पंचायत में 15 लाख का घोटाला, प्रधान और सचिव को नोटिस (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

फतेहपुर के अमौली ब्लॉक की देवरी बुजुर्ग ग्राम पंचायत में 15 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. डीएम की जांच में फर्जी भुगतान और विकास कार्यों में गड़बड़ी सामने आई है. प्रधान और सचिव को नोटिस जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

Fatehpur Panchayat Ghotala: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है. अमौली ब्लॉक की देवरी बुजुर्ग ग्राम पंचायत में डीएम की जांच के बाद 15 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है. इस खुलासे के बाद प्रशासन सख्त मोड में है और प्रधान के पद पर संकट गहराता नजर आ रहा है.

डीएम की जांच में खुली पंचायत की हकीकत

देवरी बुजुर्ग ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की सच्चाई तब सामने आई जब डीएम रवींद्र सिंह के आदेश पर गठित जांच टीम ने जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया. इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था और साफ-सफाई जैसे जरूरी कामों में भारी अनियमितताएं मिलीं. कागजों में कार्य पूर्ण दिखाए गए, लेकिन मौके पर स्थिति इसके विपरीत पाई गई. पंचायत भवन निर्माण में भी मानकों की अनदेखी सामने आई. इस जांच ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकारी धन का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से गड़बड़ी कर किया गया.

फर्जी फर्म को भुगतान और मजदूरी में भी खेल

जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर मामला फर्जी भुगतान का सामने आया. ‘सचिन’ नाम की एक फर्म को नियमों के विरुद्ध भुगतान किया गया. इतना ही नहीं, इसी फर्म के मालिक को कुशल मजदूर दिखाकर अलग से भुगतान किया गया. यानी एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग माध्यमों से सरकारी धन दिया गया. इस तरह की गड़बड़ी सीधे तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी की श्रेणी में आती है. इससे यह भी संकेत मिलता है कि पंचायत में कामों के नाम पर सुनियोजित तरीके से पैसा निकाला गया.

शिकायत के बाद बनी कमेटी, 6 महीने में खुला पूरा मामला

इस पूरे घोटाले की शुरुआत गांव के ही राजेश शुक्ल और अवधेश कुमार की शिकायत से हुई. दोनों ने अगस्त 2025 में डीएम रविंद्र सिंह को शपथ पत्र देकर गड़बड़ी की जानकारी दी थी. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 13 अगस्त 2025 को डीएम ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की. इसमें भूमि संरक्षण अधिकारी, एक्सईएन निचली गंगा नहर और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को शामिल किया गया. करीब छह महीने चली जांच के बाद 12 मार्च को रिपोर्ट सौंपी गई, जिसमें 15,01,239 रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई.

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प्रधान और सचिव को नोटिस, जवाब पर टिकी कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने प्रधान गौरव त्रिवेदी और संबंधित सचिव को अंतिम नोटिस जारी किया है. दोनों को 2 अप्रैल तक अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ठोस साक्ष्यों के दिए गए जवाब को स्वीकार नहीं किया जाएगा. ऐसे में अब पूरी नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों का जवाब क्या आता है और वह जांच के निष्कर्षों को कितना प्रभावित कर पाता है.

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कुर्सी पर संकट, वसूली और विभागीय कार्रवाई तय

यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो प्रधान के खिलाफ पंचायती राज एक्ट की धारा 95(छ) के तहत पद से हटाने की कार्रवाई की जाएगी. वहीं सचिव पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक वसूली भी की जाएगी. मीडिया से बातचीत में जिला पंचायत राज अधिकारी रामशंकर वर्मा ने बताया कि नोटिस एडीओ पंचायत के माध्यम से भेज दिया गया है और जवाब आने के बाद पूरी रिपोर्ट डीएम के सामने रखी जाएगी. इस कार्रवाई के बाद अमौली ब्लॉक की अन्य पंचायतों में भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है.

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23 Mar 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

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डीएम की जांच में खुली पंचायत की हकीकत

देवरी बुजुर्ग ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की सच्चाई तब सामने आई जब डीएम रवींद्र सिंह के आदेश पर गठित जांच टीम ने जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया. इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था और साफ-सफाई जैसे जरूरी कामों में भारी अनियमितताएं मिलीं. कागजों में कार्य पूर्ण दिखाए गए, लेकिन मौके पर स्थिति इसके विपरीत पाई गई. पंचायत भवन निर्माण में भी मानकों की अनदेखी सामने आई. इस जांच ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकारी धन का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से गड़बड़ी कर किया गया.

फर्जी फर्म को भुगतान और मजदूरी में भी खेल

जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर मामला फर्जी भुगतान का सामने आया. ‘सचिन’ नाम की एक फर्म को नियमों के विरुद्ध भुगतान किया गया. इतना ही नहीं, इसी फर्म के मालिक को कुशल मजदूर दिखाकर अलग से भुगतान किया गया. यानी एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग माध्यमों से सरकारी धन दिया गया. इस तरह की गड़बड़ी सीधे तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी की श्रेणी में आती है. इससे यह भी संकेत मिलता है कि पंचायत में कामों के नाम पर सुनियोजित तरीके से पैसा निकाला गया.

शिकायत के बाद बनी कमेटी, 6 महीने में खुला पूरा मामला

इस पूरे घोटाले की शुरुआत गांव के ही राजेश शुक्ल और अवधेश कुमार की शिकायत से हुई. दोनों ने अगस्त 2025 में डीएम रविंद्र सिंह को शपथ पत्र देकर गड़बड़ी की जानकारी दी थी. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 13 अगस्त 2025 को डीएम ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की. इसमें भूमि संरक्षण अधिकारी, एक्सईएन निचली गंगा नहर और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को शामिल किया गया. करीब छह महीने चली जांच के बाद 12 मार्च को रिपोर्ट सौंपी गई, जिसमें 15,01,239 रुपये की गड़बड़ी की पुष्टि हुई.

प्रधान और सचिव को नोटिस, जवाब पर टिकी कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने प्रधान गौरव त्रिवेदी और संबंधित सचिव को अंतिम नोटिस जारी किया है. दोनों को 2 अप्रैल तक अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ठोस साक्ष्यों के दिए गए जवाब को स्वीकार नहीं किया जाएगा. ऐसे में अब पूरी नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों का जवाब क्या आता है और वह जांच के निष्कर्षों को कितना प्रभावित कर पाता है.

कुर्सी पर संकट, वसूली और विभागीय कार्रवाई तय

यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो प्रधान के खिलाफ पंचायती राज एक्ट की धारा 95(छ) के तहत पद से हटाने की कार्रवाई की जाएगी. वहीं सचिव पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक वसूली भी की जाएगी. मीडिया से बातचीत में जिला पंचायत राज अधिकारी रामशंकर वर्मा ने बताया कि नोटिस एडीओ पंचायत के माध्यम से भेज दिया गया है और जवाब आने के बाद पूरी रिपोर्ट डीएम के सामने रखी जाएगी. इस कार्रवाई के बाद अमौली ब्लॉक की अन्य पंचायतों में भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है.

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