
Fatehpur News: डीसीएम चालक की हत्या कर लूटा था केमिकल से भरा वाहन, छह साल बाद चार दोषियों को उम्रकैद
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में डीसीएम चालक राम आसरे की हत्या और केमिकल लदे वाहन की लूट के करीब छह साल पुराने मामले में अदालत ने चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. दोषियों पर कुल 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. पति को इंसाफ मिलने पर पत्नी सूरजकली भावुक हो गईं, जबकि बेटों नीरज और मनीष ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला.
Fatehpur News: फतेहपुर जिले में डीसीएम चालक की बेरहमी से हत्या कर केमिकल लदा वाहन लूटने के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है. करीब छह साल पहले हुई इस वारदात में चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा दी गई है. फैसले के बाद मृतक की पत्नी की आंखों से आंसू छलक पड़े. पिता को खोने वाले बेटों ने कहा कि देर से ही सही, उन्हें आखिरकार न्याय मिल गया.
डीसीएम चालक हत्याकांड में चार दोषियों को उम्रकैद
जिले में डीसीएम चालक राम आसरे की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट-2 अजय सिंह प्रथम की अदालत ने गोविंद सिंह, दुर्ग सिंह, अर्जुन सिंह और अमित सिंह को दोषी ठहराया है. अदालत ने चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर कुल 60 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने राम आसरे को शराब पिलाने के बाद उनका डीसीएम वाहन और मोबाइल फोन लूट लिया था. इसके बाद उन्हें जंगल में ले जाकर फावड़े से गर्दन काटकर हत्या कर दी गई. वारदात के बाद वाहन में लदा केमिकल भी गायब हो गया था.
10 नवंबर 2020 को घर से निकले थे राम आसरे
परिवार के मुताबिक, रास्ते में कानपुर के रामादेवी ओवरब्रिज के पास उनके पड़ोसी गोविंद सिंह ने फोन किया. उसने राम आसरे से कहा कि वह भी उनके साथ गोरखपुर घूमने जाना चाहता है. इसके बाद वाहन उन्नाव के बक्सर घाट होते हुए मुरादीपुर की ओर बढ़ा.
कुछ समय बाद राम आसरे का मोबाइल फोन बंद हो गया. बेटे नीरज साहू ने पिता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी. परेशान होकर उसने कंपनी के मालिक को फोन किया और पिता से संपर्क नहीं होने की जानकारी दी. इसके बाद परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी.
बिंदकी क्षेत्र में मिला था राम आसरे का शव
राम आसरे की तलाश के दौरान 11 नवंबर 2020 को बिंदकी क्षेत्र में जनता मोड़ के समीप एक अज्ञात शव पड़े होने की सूचना मिली. परिजन मौके पर पहुंचे तो चप्पल, तकिया और कंबल के आधार पर नीरज ने शव की पहचान अपने पिता के रूप में की. अन्य विवरणों में शव मिलने की तारीख 12 नवंबर भी बताई गई है.
शव की पहचान होने के बाद परिवार ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो राम आसरे की हत्या के साथ डीसीएम और उसमें लदे केमिकल की लूट का मामला सामने आया.
पड़ोसी पर गहराया शक, पूछताछ में सामने आए तीन अन्य नाम
जांच के दौरान पुलिस का शक राम आसरे के पड़ोसी गोविंद सिंह पर गहराया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की. अभियोजन के मुताबिक, पूछताछ में गोविंद ने वारदात में शामिल तीन अन्य लोगों के नाम बताए.
इसके बाद पुलिस ने दुर्ग सिंह, अर्जुन सिंह और अमित सिंह को भी गिरफ्तार किया. ये तीनों कानपुर देहात के निवासी बताए गए हैं. पुलिस की जांच के अनुसार, वारदात के बाद डीसीएम को मुनीरगंज के पास जंगल में खड़ा किया गया था और वाहन में लदे केमिकल को बेचने की तैयारी की जा रही थी. मामले में पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया. इसके बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई.
पेश किए गए 10 गवाह, साक्ष्यों के आधार पर फैसला
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाह पेश किए. गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया.
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत हत्या के मामले में प्रत्येक दोषी को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई. वहीं, धारा 394 के तहत लूट के मामले में प्रत्येक को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये के अतिरिक्त अर्थदंड से दंडित किया गया.
इस तरह प्रत्येक दोषी पर कुल 60 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया. हत्या और लूट के इस मामले में आए फैसले को परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद मिली राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
पति को इंसाफ मिलने पर भावुक हुईं सूरजकली
राम आसरे की हत्या के बाद से उनकी पत्नी सूरजकली न्याय मिलने का इंतजार कर रही थीं. करीब छह साल तक चले इस मामले में अदालत का फैसला आया तो वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं. पति की याद में उनकी आंखें भर आईं.
परिवार के लिए यह सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि उस दर्दनाक घटना के बाद लंबा इंतजार खत्म होने का पल भी था. राम आसरे की हत्या के बाद परिवार को आर्थिक और पारिवारिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
मृतक के बेटे नीरज ने बताया कि पिता की मौत के बाद परिवार की परेशानियां बढ़ गई थीं. बड़ी बहन सोनी की बीमारी के कारण मौत हो गई, जबकि छोटी बहन सुमन की शादी हो चुकी है. ऐसे हालात में परिवार लंबे समय तक अदालत के फैसले की प्रतीक्षा करता रहा.
