इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर रोक, पंचायत चुनाव को लेकर सरकार और आयोग से मांगा जवाब
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है. साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव की समयसीमा और सरकार से ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मांगी है.
UP Panchayat News: उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन और आगामी पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अहम टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और मामले में सरकार से जवाब तलब किया है.
अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी. यह आदेश अरविंद राठौर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिका में कहा गया था कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाना संविधान और पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के अनुरूप नहीं है.
क्या है पूरा मामला?

राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा- पंचायत चुनाव कब होंगे?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा कि पंचायत चुनाव कराने की संभावित समयसीमा क्या है. इसके अलावा राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई में ओबीसी आयोग की प्रगति रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए.
OBC रिपोर्ट के बाद तय होगा पंचायत चुनाव का रास्ता
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग का गठन किया है. आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों का सर्वे कर पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी और सामाजिक स्थिति का अध्ययन करेगा. इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का नया प्रारूप तैयार किया जाएगा.
यूपी पंचायत चुनाव में 12.58 करोड़ से अधिक मतदाता
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए 12 करोड़ 58 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं. इस बार लगभग 1.81 करोड़ नए मतदाताओं के नाम भी सूची में जोड़े गए हैं.
हाईकोर्ट के फैसले का क्या पड़ेगा असर?
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद सरकार द्वारा बनाई गई प्रशासक व्यवस्था पर फिलहाल रोक लग गई है. अब सरकार को अदालत में अपने फैसले का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा. दूसरी ओर, पंचायत चुनाव की तारीख, ओबीसी आरक्षण और ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन जैसे मुद्दों पर भी सभी की नजर 13 जुलाई की सुनवाई पर रहेगी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर रोक, पंचायत चुनाव को लेकर सरकार और आयोग से मांगा जवाब
UP Panchayat News: उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन और आगामी पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अहम टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और मामले में सरकार से जवाब तलब किया है.
अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी. यह आदेश अरविंद राठौर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिका में कहा गया था कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाना संविधान और पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के अनुरूप नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के निर्वाचित ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था. समय पर पंचायत चुनाव नहीं होने के कारण राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति दी थी.
सरकार के इसी निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर रोक लगा दी है. कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश में ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर नई कानूनी स्थिति बन गई है.
राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा- पंचायत चुनाव कब होंगे?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा कि पंचायत चुनाव कराने की संभावित समयसीमा क्या है. इसके अलावा राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई में ओबीसी आयोग की प्रगति रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए.
OBC रिपोर्ट के बाद तय होगा पंचायत चुनाव का रास्ता
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग का गठन किया है. आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों का सर्वे कर पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी और सामाजिक स्थिति का अध्ययन करेगा. इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का नया प्रारूप तैयार किया जाएगा.
यूपी पंचायत चुनाव में 12.58 करोड़ से अधिक मतदाता
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए 12 करोड़ 58 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं. इस बार लगभग 1.81 करोड़ नए मतदाताओं के नाम भी सूची में जोड़े गए हैं.
हाईकोर्ट के फैसले का क्या पड़ेगा असर?
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद सरकार द्वारा बनाई गई प्रशासक व्यवस्था पर फिलहाल रोक लग गई है. अब सरकार को अदालत में अपने फैसले का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा. दूसरी ओर, पंचायत चुनाव की तारीख, ओबीसी आरक्षण और ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन जैसे मुद्दों पर भी सभी की नजर 13 जुलाई की सुनवाई पर रहेगी.