UP Panchayat Election 2026: कार्यकाल खत्म होने से पहले बजट खपाने की होड़, कासगंज में दो प्रधान बर्खास्त
यूपी में पंचायत चुनाव भले देर से हों, लेकिन ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है. इसी बीच कासगंज में ग्राम पंचायत निधि के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है. डीएम प्रणय सिंह ने जांच में दोषी पाए जाने पर दो ग्राम प्रधानों को पद से हटा दिया. दोनों पर सरकारी धन अपने रिश्तेदारों के खातों में भेजने का आरोप सिद्ध हुआ.
UP Panchayat Elections: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल अगले कुछ दिनों में समाप्त होने जा रहा है. ऐसे में कई पंचायतों में बची हुई धनराशि को जल्द से जल्द खर्च करने की होड़ मची हुई है. इसी बीच कासगंज जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दो ग्राम प्रधानों ने विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये अपने सगे संबंधियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर दिए. शिकायत मिलने के बाद हुई जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने दोनों प्रधानों को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया. इस कार्रवाई ने जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी हलचल मचा दी है.
अलादीनपुर में 7.54 लाख रुपये रिश्तेदारों के खातों में भेजे गए
सहावर ब्लॉक की ग्राम पंचायत अलादीनपुर के निवासी ब्रजेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान पप्पू सिंह और पंचायत सचिव ने ग्राम पंचायत निधि में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की हैं. मामले की प्रारंभिक जांच जिला पूर्ति अधिकारी को सौंपी गई. जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए कि ग्राम प्रधान और सचिव ने नियमों की अनदेखी करते हुए 7 लाख 54 हजार 165 रुपये अपने सगे संबंधियों के निजी खातों में भेज दिए. जब जांच अधिकारी ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा तो ग्राम प्रधान कोई ठोस दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके. इसके बाद डीएम प्रणय सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पप्पू सिंह को ग्राम प्रधान पद से हटा दिया.
अजीतनगर की प्रधान ने पति, देवर और देवरानी के खातों में भेजे 10.17 लाख रुपये
सिढ़पुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अजीतनगर में भी इसी तरह की अनियमितता सामने आई. गांव के निवासी शैलेंद्र कुमार सोलंकी ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि ग्राम प्रधान प्रीति ने विकास कार्यों के नाम पर पंचायत निधि का दुरुपयोग किया है. जांच के लिए जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को नामित किया गया. प्रारंभिक जांच में पता चला कि ग्राम प्रधान प्रीति ने अपने पति संजीव कुमार के खाते में 1 लाख 44 हजार 200 रुपये, देवर आशीष के खाते में 6 लाख 75 हजार रुपये और देवरानी नेहा के खाते में 1 लाख 98 हजार 400 रुपये नियम विरुद्ध ट्रांसफर कर दिए. इस प्रकार कुल 10 लाख 17 हजार 600 रुपये सीधे अपने परिवार के सदस्यों के खातों में भेजे गए.
जवाब नहीं दे सकीं प्रधान प्रीति, डीएम ने पद से हटाया
जांच अधिकारी के सामने ग्राम प्रधान प्रीति अपने पक्ष में कोई ऐसा दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिससे यह साबित हो सके कि धनराशि का उपयोग नियमानुसार हुआ था. जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के अपव्यय की पुष्टि हुई. इसके बाद जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने प्रीति को भी ग्राम प्रधान पद से हटा दिया. यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है और यह संकेत देती है कि पंचायत निधि के दुरुपयोग को लेकर अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सचिवों को नोटिस, विकास कार्यों के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित
दोनों ग्राम पंचायतों के सचिवों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है. प्रशासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है. इसके साथ ही जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि अलादीनपुर और अजीतनगर में विकास कार्यों को बाधित न होने दिया जाए. इसके लिए दोनों ग्राम पंचायतों में कार्यों की निगरानी और संचालन हेतु तीन सदस्यीय टीम गठित की जाएगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर किसी तरह का असर न पड़े.
पंचायत चुनाव से पहले प्रशासन की सख्त कार्रवाई
कासगंज में हुई यह कार्रवाई पूरे प्रदेश के ग्राम प्रधानों के लिए एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. पंचायत चुनाव में भले ही देरी हो रही हो, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने से पहले सरकारी धन के दुरुपयोग पर प्रशासन पूरी नजर रखे हुए है. रिश्तेदारों के खातों में धनराशि भेजने जैसे मामलों में अब सीधे पद से हटाने जैसी सख्त कार्रवाई की जा रही है. माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद अन्य जिलों में भी लंबित शिकायतों की जांच तेज हो सकती है.
UP Panchayat Election 2026: कार्यकाल खत्म होने से पहले बजट खपाने की होड़, कासगंज में दो प्रधान बर्खास्त
UP Panchayat Elections: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल अगले कुछ दिनों में समाप्त होने जा रहा है. ऐसे में कई पंचायतों में बची हुई धनराशि को जल्द से जल्द खर्च करने की होड़ मची हुई है. इसी बीच कासगंज जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दो ग्राम प्रधानों ने विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये अपने सगे संबंधियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर दिए. शिकायत मिलने के बाद हुई जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने दोनों प्रधानों को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया. इस कार्रवाई ने जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी हलचल मचा दी है.
अलादीनपुर में 7.54 लाख रुपये रिश्तेदारों के खातों में भेजे गए
सहावर ब्लॉक की ग्राम पंचायत अलादीनपुर के निवासी ब्रजेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान पप्पू सिंह और पंचायत सचिव ने ग्राम पंचायत निधि में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की हैं. मामले की प्रारंभिक जांच जिला पूर्ति अधिकारी को सौंपी गई. जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए कि ग्राम प्रधान और सचिव ने नियमों की अनदेखी करते हुए 7 लाख 54 हजार 165 रुपये अपने सगे संबंधियों के निजी खातों में भेज दिए. जब जांच अधिकारी ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा तो ग्राम प्रधान कोई ठोस दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके. इसके बाद डीएम प्रणय सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पप्पू सिंह को ग्राम प्रधान पद से हटा दिया.
अजीतनगर की प्रधान ने पति, देवर और देवरानी के खातों में भेजे 10.17 लाख रुपये
सिढ़पुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अजीतनगर में भी इसी तरह की अनियमितता सामने आई. गांव के निवासी शैलेंद्र कुमार सोलंकी ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि ग्राम प्रधान प्रीति ने विकास कार्यों के नाम पर पंचायत निधि का दुरुपयोग किया है. जांच के लिए जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को नामित किया गया. प्रारंभिक जांच में पता चला कि ग्राम प्रधान प्रीति ने अपने पति संजीव कुमार के खाते में 1 लाख 44 हजार 200 रुपये, देवर आशीष के खाते में 6 लाख 75 हजार रुपये और देवरानी नेहा के खाते में 1 लाख 98 हजार 400 रुपये नियम विरुद्ध ट्रांसफर कर दिए. इस प्रकार कुल 10 लाख 17 हजार 600 रुपये सीधे अपने परिवार के सदस्यों के खातों में भेजे गए.
जवाब नहीं दे सकीं प्रधान प्रीति, डीएम ने पद से हटाया
जांच अधिकारी के सामने ग्राम प्रधान प्रीति अपने पक्ष में कोई ऐसा दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिससे यह साबित हो सके कि धनराशि का उपयोग नियमानुसार हुआ था. जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के अपव्यय की पुष्टि हुई. इसके बाद जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने प्रीति को भी ग्राम प्रधान पद से हटा दिया. यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है और यह संकेत देती है कि पंचायत निधि के दुरुपयोग को लेकर अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सचिवों को नोटिस, विकास कार्यों के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित
दोनों ग्राम पंचायतों के सचिवों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है. प्रशासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है. इसके साथ ही जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि अलादीनपुर और अजीतनगर में विकास कार्यों को बाधित न होने दिया जाए. इसके लिए दोनों ग्राम पंचायतों में कार्यों की निगरानी और संचालन हेतु तीन सदस्यीय टीम गठित की जाएगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर किसी तरह का असर न पड़े.
पंचायत चुनाव से पहले प्रशासन की सख्त कार्रवाई
कासगंज में हुई यह कार्रवाई पूरे प्रदेश के ग्राम प्रधानों के लिए एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. पंचायत चुनाव में भले ही देरी हो रही हो, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने से पहले सरकारी धन के दुरुपयोग पर प्रशासन पूरी नजर रखे हुए है. रिश्तेदारों के खातों में धनराशि भेजने जैसे मामलों में अब सीधे पद से हटाने जैसी सख्त कार्रवाई की जा रही है. माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद अन्य जिलों में भी लंबित शिकायतों की जांच तेज हो सकती है.