UP Cabinet का मास्टरस्ट्रोक: शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी, सरकार की लगी मोहर, मई से मिलेगा मानदेय
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. अब शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे. यह फैसला एक अप्रैल 2026 से लागू होगा और बढ़ा हुआ मानदेय मई से खातों में आएगा.
UP Shiksha Mitra News: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने लाखों शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का फैसला लागू कर दिया है. लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे इन शिक्षाकर्मियों के लिए कैबिनेट की मुहर के बाद अब यह निर्णय जमीन पर उतर चुका है. सरकार ने इसे एक अप्रैल 2026 से लागू करते हुए मई से भुगतान की तैयारी भी शुरू कर दी है.
कैबिनेट की मंजूरी के साथ खत्म हुआ लंबा इंतजार
प्रदेश के शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है. सालों से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इन कर्मचारियों को आखिरकार सरकार ने राहत दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस 2025 पर इस बढ़ोतरी की घोषणा की थी, लेकिन अब कैबिनेट की आधिकारिक मंजूरी के बाद यह पूरी तरह लागू हो गई है.
इस फैसले ने न केवल आर्थिक राहत दी है बल्कि सरकार की शिक्षा क्षेत्र के प्रति गंभीरता भी दर्शाई है. लंबे समय से कम मानदेय में काम कर रहे शिक्षामित्रों के लिए यह निर्णय उनके संघर्ष की एक बड़ी जीत माना जा रहा है.
अब शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को मिलेगा इतना मानदेय
सरकार पर बढ़ेगा 1400 करोड़ से ज्यादा का भार
इस फैसले का सीधा असर राज्य के बजट पर भी पड़ेगा. बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह के अनुसार प्रदेश में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं. इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का भुगतान समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करते हैं.
अब बढ़े हुए मानदेय से इन पर 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा. इसके अलावा 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं जिनका पूरा मानदेय राज्य सरकार देती है, जिन पर 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा. कुल मिलाकर सरकार पर लगभग 1475 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा.
अनुदेशकों को भी मिला बड़ा फायदा
इस फैसले का लाभ केवल शिक्षामित्रों तक सीमित नहीं है बल्कि अंशकालिक अनुदेशकों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा. प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 24,717 अनुदेशक अब बढ़े हुए मानदेय का लाभ उठाएंगे. इनके मानदेय में वृद्धि से राज्य सरकार पर 217.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा. लंबे समय से कम मानदेय में काम कर रहे इन अनुदेशकों के लिए यह फैसला आर्थिक मजबूती का आधार बनेगा.
शिक्षामित्रों का किस कार्यकाल में कितना बड़ा मानदेय
शिक्षामित्रों की यात्रा बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही है. 1999 में 11 महीने के अनुबंध पर शुरू हुई यह व्यवस्था 2001 में 1500 रुपये मानदेय से शुरू हुई थी. धीरे-धीरे यह 2002 में 2250, 2005 में 2400 और 2007 में 3000 रुपये तक पहुंचा.
2014-15 में उन्हें सहायक शिक्षक बनाया गया और उनका भुगतान 30-40 हजार तक पहुंच गया, लेकिन 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह व्यवस्था खत्म हो गई और वे फिर कम मानदेय पर आ गए. उसी वर्ष योगी सरकार ने इसे 10 हजार किया और अब 2026 में इसे बढ़ाकर 18 हजार कर दिया गया है.
UP Cabinet का मास्टरस्ट्रोक: शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी, सरकार की लगी मोहर, मई से मिलेगा मानदेय
UP Shiksha Mitra News: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने लाखों शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का फैसला लागू कर दिया है. लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे इन शिक्षाकर्मियों के लिए कैबिनेट की मुहर के बाद अब यह निर्णय जमीन पर उतर चुका है. सरकार ने इसे एक अप्रैल 2026 से लागू करते हुए मई से भुगतान की तैयारी भी शुरू कर दी है.
कैबिनेट की मंजूरी के साथ खत्म हुआ लंबा इंतजार
प्रदेश के शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है. सालों से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इन कर्मचारियों को आखिरकार सरकार ने राहत दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस 2025 पर इस बढ़ोतरी की घोषणा की थी, लेकिन अब कैबिनेट की आधिकारिक मंजूरी के बाद यह पूरी तरह लागू हो गई है.
इस फैसले ने न केवल आर्थिक राहत दी है बल्कि सरकार की शिक्षा क्षेत्र के प्रति गंभीरता भी दर्शाई है. लंबे समय से कम मानदेय में काम कर रहे शिक्षामित्रों के लिए यह निर्णय उनके संघर्ष की एक बड़ी जीत माना जा रहा है.
अब शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को मिलेगा इतना मानदेय
कैबिनेट के फैसले के बाद शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है. वहीं अंशकालिक अनुदेशकों को अब 17 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे. पहले शिक्षामित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को 9 हजार रुपये मिलते थे, जो मौजूदा महंगाई के मुकाबले काफी कम था. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ा हुआ मानदेय एक अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसका भुगतान एक मई से सीधे बैंक खातों में किया जाएगा.
सरकार पर बढ़ेगा 1400 करोड़ से ज्यादा का भार
इस फैसले का सीधा असर राज्य के बजट पर भी पड़ेगा. बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह के अनुसार प्रदेश में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं. इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का भुगतान समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करते हैं.
अब बढ़े हुए मानदेय से इन पर 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा. इसके अलावा 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं जिनका पूरा मानदेय राज्य सरकार देती है, जिन पर 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा. कुल मिलाकर सरकार पर लगभग 1475 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा.
अनुदेशकों को भी मिला बड़ा फायदा
इस फैसले का लाभ केवल शिक्षामित्रों तक सीमित नहीं है बल्कि अंशकालिक अनुदेशकों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा. प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 24,717 अनुदेशक अब बढ़े हुए मानदेय का लाभ उठाएंगे. इनके मानदेय में वृद्धि से राज्य सरकार पर 217.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा. लंबे समय से कम मानदेय में काम कर रहे इन अनुदेशकों के लिए यह फैसला आर्थिक मजबूती का आधार बनेगा.
शिक्षामित्रों का किस कार्यकाल में कितना बड़ा मानदेय
शिक्षामित्रों की यात्रा बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही है. 1999 में 11 महीने के अनुबंध पर शुरू हुई यह व्यवस्था 2001 में 1500 रुपये मानदेय से शुरू हुई थी. धीरे-धीरे यह 2002 में 2250, 2005 में 2400 और 2007 में 3000 रुपये तक पहुंचा.
2014-15 में उन्हें सहायक शिक्षक बनाया गया और उनका भुगतान 30-40 हजार तक पहुंच गया, लेकिन 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह व्यवस्था खत्म हो गई और वे फिर कम मानदेय पर आ गए. उसी वर्ष योगी सरकार ने इसे 10 हजार किया और अब 2026 में इसे बढ़ाकर 18 हजार कर दिया गया है.