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Fatehpur UPPCL News: बिजली विभाग में फर्जीवाड़े का आरोप, बाबू डमी अकाउंट के जरिए करता है खेल, होगी जांच

Fatehpur UPPCL News: बिजली विभाग में फर्जीवाड़े का आरोप, बाबू डमी अकाउंट के जरिए करता है खेल, होगी जांच
फतेहपुर के बिजली विभाग में बिल घोटाला, जांच के आदेश (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

फतेहपुर में बिजली विभाग के बिल असिस्मेंट सिस्टम में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगा है. प्रथम डिवीजन के बाबू पर डमी असिस्मेंट अकाउंट बनाकर विभागीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. शिकायत के बाद एसई ने जांच कमेटी गठित कर दी है.

Fatehpur UPPCL News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बिजली विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है. बिल असिस्मेंट प्रक्रिया के दौरान डमी अकाउंट बनाकर रकम जमा कराने और विभागीय राजस्व को क्षति पहुंचाने का गंभीर आरोप सामने आया है. मामला उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है. शिकायत मिलने पर अधीक्षण अभियंता ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं.

शिकायतकर्ता ने खोली परतें, लंबे समय से गड़बड़ी का आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शहर के आवास विकास कॉलोनी निवासी रमेश सिंह कछवाह ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित शिकायत कर पूरे मामले को उजागर किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रथम डिवीजन में असिस्मेंट का कार्य देखने वाला बाबू लंबे समय से बिजली चोरी के मामलों में बिल असिस्मेंट के नाम पर खेल कर रहा है.

शिकायतकर्ता का कहना है कि उपभोक्ताओं पर भारी-भरकम बकाया दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक भुगतान प्रक्रिया को घुमा दिया जाता है. इससे न सिर्फ उपभोक्ता भ्रमित होते हैं बल्कि सरकारी राजस्व को भी सीधा नुकसान पहुंचता है. रमेश सिंह के अनुसार, यह कोई एक दिन की घटना नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था की गड़बड़ी है, जिसे अब सामने लाया गया है.

शबनम बानो के केस में सामने आया डमी असिस्मेंट का तरीका

शिकायत में कबरहा भिटौरा रोड निवासी शबनम बानो पत्नी हबीब के मामले का विशेष रूप से जिक्र किया गया है. बताया गया कि शबनम बानो के खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज कर लगभग 1.65 लाख रुपये की देय राशि दर्शाई गई. इसके बाद असली भुगतान के बजाय कथित रूप से डमी असिस्मेंट अकाउंट बनाए गए.

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आरोप है कि एक ही अकाउंट नंबर पर दो अलग-अलग असिस्मेंट दिखाते हुए 25,882 रुपये और 5,752 रुपये जमा कराए गए. यही नहीं, एक अन्य डमी अकाउंट अलग नंबर पर बनाकर करीब आठ हजार रुपये की राशि जमा करवाई गई. एक ही केस में इस तरह कई अकाउंट का इस्तेमाल होना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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एक ही मामले में कई अकाउंट, राजस्व को पहुंची भारी क्षति

शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक ही बिजली चोरी के मामले में अलग-अलग डमी अकाउंट बनाकर पैसे जमा कराना नियमों का खुला उल्लंघन है. इससे विभाग के खाते में पूरी बकाया राशि नहीं पहुंच पाती और सरकारी राजस्व को सीधा नुकसान होता है.

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जानकारों का मानना है कि अगर ऐसे मामलों की गहन जांच हो, तो कई पुराने प्रकरण भी सामने आ सकते हैं. इस तरह की गड़बड़ी से न सिर्फ आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि विभाग की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है. आरोप है कि इस पूरे खेल में जानबूझकर सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया गया.

शिकायत मिलते ही हरकत में आया विभाग, जांच कमेटी गठित

मामले की शिकायत सामने आते ही बिजली विभाग के उच्चाधिकारी हरकत में आ गए. अधीक्षण अभियंता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है. जांच कमेटी को असिस्मेंट से जुड़े सभी रिकॉर्ड, अकाउंट नंबर, भुगतान विवरण और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं.

विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि डमी अकाउंट किसके निर्देश पर बनाए गए और इसमें किन कर्मचारियों की संलिप्तता रही. जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी.

एसई अनिल वर्मा का स्पष्ट संदेश, दोषियों पर होगी कार्रवाई

इस पूरे मामले पर मीडिया से बात करते हुए अधीक्षण अभियंता अनिल वर्मा ने कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और उसकी जांच करवाई जा रही है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जांच में जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

एसई ने यह भी कहा कि विभागीय राजस्व से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभाग में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा.

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