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School Closed In UP: फतेहपुर के इन विद्यालयों में बढ़ी बच्चों की छुट्टी ! शिक्षकों में इस बात से नाराजगी, जानिए कारण

School Closed In UP: फतेहपुर के इन विद्यालयों में बढ़ी बच्चों की छुट्टी ! शिक्षकों में इस बात से नाराजगी, जानिए कारण
यूपी में बढ़ी स्कूलों की छुट्टी शिक्षकों में नाराज़गी (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

Fatehpur News In Hindi

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में भीषण गर्मी को देखते हुए परिषदीय स्कूलों की छुट्टियां 30 जून तक बढ़ा दी गई हैं. हालांकि छात्रों को तो राहत मिली है लेकिन शिक्षक और शिक्षिकाओं को स्कूल आकर प्रशासनिक कार्य करने होंगे. शासनादेश को लेकर शिक्षकों में नाराजगी है और सोशल मीडिया पर इसकी आलोचना हो रही है.

School Closed In UP: यूपी में झुलसा देने वाली गर्मी का असर अब स्कूलों की व्यवस्था पर भी दिखने लगा है. प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों की छुट्टियां बढ़ा दी गईं हैं इसी क्रम में फतेहपुर जिले में 16 जून से खुलने वाले परिषदीय स्कूल अब 30 जून तक बंद रहेंगे, लेकिन यह राहत सिर्फ छात्रों के लिए है.

शिक्षक, शिक्षिकाएं, अनुदेशक और शिक्षामित्रों को रोज़ाना स्कूल जाकर प्रशासनिक कार्यों को निपटाने के निर्देश दिए गए हैं. शासन के इस आदेश से शिक्षकों में नाराजगी है और सोशल मीडिया पर इसकी जमकर चर्चा हो रही है.

छात्रों को राहत, शिक्षकों पर आदेश की सख्ती

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की सचिव की ओर से जारी आदेश में सभी परिषदीय स्कूलों को 30 जून तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं. निर्णय बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि भीषण गर्मी का उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर न पड़े.

हालांकि शिक्षकों को इस राहत से बाहर रखा गया है. आदेश के अनुसार शिक्षकों को रोज़ाना स्कूल पहुंचकर लंबित प्रशासनिक कार्यों को निपटाना होगा. इस फैसले से शिक्षकों में रोष है क्योंकि भीषण गर्मी में उन्हें बिना छुट्टी के स्कूल जाना होगा.

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बीएसए का सख्त रुख, अनुपस्थिति पर कार्रवाई तय

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) भारती त्रिपाठी ने खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 16 जून से स्कूलों में स्टाफ की उपस्थिति की सघन जांच की जाए.

Read More: फतेहपुर में फायर सुरक्षा अभियान: गैस सिलेंडर में आग लगने पर क्या करें? लाइव डेमो से लोगों को किया गया जागरूक

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बिना अनुमति के अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी. स्कूलों में तैनात हर कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की गई है और समयबद्ध कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी.

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2 लाख से अधिक बच्चों को मिली छुट्टी, 15 दिन का अवकाश

जिले के 2123 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक परिषदीय स्कूलों के साथ-साथ 50 सहायता प्राप्त स्कूलों में कुल दो लाख 34 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं.

इन्हें पहले 15 जून तक गर्मी की छुट्टी दी गई थी जिसे अब बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है. स्कूलों के न खुलने से छात्रों को जहां राहत मिली है, वहीं अभिभावक भी इस फैसले से संतुष्ट हैं क्योंकि भीषण गर्मी में बच्चों का स्कूल जाना जोखिम भरा हो सकता था.

शिक्षकों में नाराजगी, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शासन के इस आदेश ने शिक्षकों में भारी नाराजगी फैला दी है. सोशल मीडिया पर शिक्षक संगठनों और शिक्षकों के बीच इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है.

शिक्षक सवाल उठा रहे हैं कि जब छात्रों की सुरक्षा के लिए छुट्टी दी गई है, तो वही गर्मी शिक्षकों के लिए कैसे सुरक्षित हो सकती है. शिक्षकों का कहना है कि शासन ने केवल दिखावे के लिए अवकाश बढ़ाया है, जबकि ज़मीनी स्तर पर यह शिक्षक विरोधी फैसला है.

शिक्षक संगठन चुप, नाराजगी और बढ़ी

आश्चर्य की बात यह है कि सामान्यतः शिक्षकों की आवाज़ बनने वाले संगठनों ने इस बार चुप्पी साध रखी है. न तो किसी संगठन ने विरोध दर्ज कराया और न ही शासनादेश पर पुनर्विचार की मांग की गई.

यह चुप्पी भी शिक्षकों में गहरा असंतोष पैदा कर रही है. शिक्षक मान रहे हैं कि प्रशासन उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रहा है और संगठन भी अपने दायित्व से पीछे हटते दिख रहे हैं.

16 Jun 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

School Closed In UP: फतेहपुर के इन विद्यालयों में बढ़ी बच्चों की छुट्टी ! शिक्षकों में इस बात से नाराजगी, जानिए कारण

Fatehpur News In Hindi

School Closed In UP: यूपी में झुलसा देने वाली गर्मी का असर अब स्कूलों की व्यवस्था पर भी दिखने लगा है. प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों की छुट्टियां बढ़ा दी गईं हैं इसी क्रम में फतेहपुर जिले में 16 जून से खुलने वाले परिषदीय स्कूल अब 30 जून तक बंद रहेंगे, लेकिन यह राहत सिर्फ छात्रों के लिए है.

शिक्षक, शिक्षिकाएं, अनुदेशक और शिक्षामित्रों को रोज़ाना स्कूल जाकर प्रशासनिक कार्यों को निपटाने के निर्देश दिए गए हैं. शासन के इस आदेश से शिक्षकों में नाराजगी है और सोशल मीडिया पर इसकी जमकर चर्चा हो रही है.

छात्रों को राहत, शिक्षकों पर आदेश की सख्ती

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद की सचिव की ओर से जारी आदेश में सभी परिषदीय स्कूलों को 30 जून तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं. निर्णय बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि भीषण गर्मी का उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर न पड़े.

हालांकि शिक्षकों को इस राहत से बाहर रखा गया है. आदेश के अनुसार शिक्षकों को रोज़ाना स्कूल पहुंचकर लंबित प्रशासनिक कार्यों को निपटाना होगा. इस फैसले से शिक्षकों में रोष है क्योंकि भीषण गर्मी में उन्हें बिना छुट्टी के स्कूल जाना होगा.

बीएसए का सख्त रुख, अनुपस्थिति पर कार्रवाई तय

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) भारती त्रिपाठी ने खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 16 जून से स्कूलों में स्टाफ की उपस्थिति की सघन जांच की जाए.

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बिना अनुमति के अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी. स्कूलों में तैनात हर कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की गई है और समयबद्ध कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी.

2 लाख से अधिक बच्चों को मिली छुट्टी, 15 दिन का अवकाश

जिले के 2123 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक परिषदीय स्कूलों के साथ-साथ 50 सहायता प्राप्त स्कूलों में कुल दो लाख 34 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं.

इन्हें पहले 15 जून तक गर्मी की छुट्टी दी गई थी जिसे अब बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है. स्कूलों के न खुलने से छात्रों को जहां राहत मिली है, वहीं अभिभावक भी इस फैसले से संतुष्ट हैं क्योंकि भीषण गर्मी में बच्चों का स्कूल जाना जोखिम भरा हो सकता था.

शिक्षकों में नाराजगी, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शासन के इस आदेश ने शिक्षकों में भारी नाराजगी फैला दी है. सोशल मीडिया पर शिक्षक संगठनों और शिक्षकों के बीच इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है.

शिक्षक सवाल उठा रहे हैं कि जब छात्रों की सुरक्षा के लिए छुट्टी दी गई है, तो वही गर्मी शिक्षकों के लिए कैसे सुरक्षित हो सकती है. शिक्षकों का कहना है कि शासन ने केवल दिखावे के लिए अवकाश बढ़ाया है, जबकि ज़मीनी स्तर पर यह शिक्षक विरोधी फैसला है.

शिक्षक संगठन चुप, नाराजगी और बढ़ी

आश्चर्य की बात यह है कि सामान्यतः शिक्षकों की आवाज़ बनने वाले संगठनों ने इस बार चुप्पी साध रखी है. न तो किसी संगठन ने विरोध दर्ज कराया और न ही शासनादेश पर पुनर्विचार की मांग की गई.

यह चुप्पी भी शिक्षकों में गहरा असंतोष पैदा कर रही है. शिक्षक मान रहे हैं कि प्रशासन उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रहा है और संगठन भी अपने दायित्व से पीछे हटते दिख रहे हैं.

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