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UP Shiksha Mitra News: इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, शिक्षामित्रों के वेतन और नियमितीकरण पर सरकार जल्द ले फैसला

UP Shiksha Mitra News: इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, शिक्षामित्रों के वेतन और नियमितीकरण पर सरकार जल्द ले फैसला
शिक्षामित्रों के वेतनमान और नियमितीकरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, सरकार से दो महीने में निर्णय लेने का दिया आदेश (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के नियमितीकरण और सहायक अध्यापक के बराबर वेतन के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को तय समय सीमा में निर्णय लेने का निर्देश दिया है.

UP Shiksha Mitra News: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है. कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है कि शिक्षामित्रों के नियमितीकरण और समान वेतन के मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जाए, जिससे हजारों परिवारों की उम्मीदें अब एक बार फिर जाग उठी हैं.

दो महीने की समय सीमा, सरकार को देना होगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को दो महीने के भीतर सकारण आदेश पारित करना होगा. न्यायालय ने यह भी माना कि यह मुद्दा वर्षों से लंबित है और इससे प्रदेश के हजारों शिक्षामित्र प्रभावित हो रहे हैं.

कोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह इस मामले में कोई भी निर्णय लेते समय सभी कानूनी पहलुओं और पूर्व के न्यायिक आदेशों को ध्यान में रखे. इस आदेश के बाद अब सरकार के पास देरी की कोई गुंजाइश नहीं बची है और तय समय में निर्णय लेना अनिवार्य हो गया है.

याची को तीन सप्ताह में प्रत्यावेदन दाखिल करने का निर्देश

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना विस्तृत प्रत्यावेदन राज्य सरकार को सौंपे. इसके बाद राज्य सरकार को याची को सुनवाई का अवसर देना होगा.

Read More: उत्तर प्रदेश में 10 लाख तक की रजिस्ट्री में बड़ी छूट: सरकार खत्म करेगी पैन-आधार की अनिवार्यता, क्या होगा नया नियम

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना पक्षकार को सुने कोई भी निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए. इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि फैसला पारदर्शी और न्यायसंगत हो. यह निर्देश न केवल याची बल्कि अन्य शिक्षामित्रों के लिए भी एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करता है.

Read More: UP Cabinet का मास्टरस्ट्रोक: शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी, सरकार की लगी मोहर, मई से मिलेगा मानदेय

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और केंद्र के निर्देशों का पालन जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों को ध्यान में रखना होगा. इसमें जग्गो बनाम भारत संघ और श्रीपाल व अन्य मामलों का विशेष उल्लेख किया गया है.

Read More: UP IAS Transfer: योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक झटका, 24 घंटे में 64 IAS इधर-उधर, 10 जिलों के DM बदले

इसके साथ ही 11 जून 2025 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि इन सभी कानूनी और प्रशासनिक दिशानिर्देशों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाए. इससे यह स्पष्ट है कि सरकार को अब एक संतुलित और कानूनसम्मत फैसला देना होगा.

तेज बहादुर मौर्य केस का हवाला, पहले भी मिल चुके हैं निर्देश

न्यायालय ने तेज बहादुर मौर्य और 114 अन्य के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं. कोर्ट ने कहा कि वर्तमान याचिका पर भी उसी फैसले के आलोक में विचार किया जाना चाहिए. इससे यह संकेत मिलता है कि न्यायपालिका इस विषय पर एक समान नीति लागू करने की ओर बढ़ रही है.

देवरिया की निघत फिरदौस की याचिका से मिला बड़ा आदेश

यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने देवरिया जिले की शिक्षामित्र निघत फिरदौस की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया. याची ने बताया कि वह लंबे समय से शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें न तो नियमित किया गया है और न ही सहायक अध्यापक के बराबर वेतन दिया गया है. उन्होंने कोर्ट से न्याय की मांग करते हुए समान वेतन और स्थायी दर्जा देने की अपील की थी. इस आदेश के बाद अब प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं.

07 Apr 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

UP Shiksha Mitra News: इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, शिक्षामित्रों के वेतन और नियमितीकरण पर सरकार जल्द ले फैसला

UP Shiksha Mitra News: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है. कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है कि शिक्षामित्रों के नियमितीकरण और समान वेतन के मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जाए, जिससे हजारों परिवारों की उम्मीदें अब एक बार फिर जाग उठी हैं.

दो महीने की समय सीमा, सरकार को देना होगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को दो महीने के भीतर सकारण आदेश पारित करना होगा. न्यायालय ने यह भी माना कि यह मुद्दा वर्षों से लंबित है और इससे प्रदेश के हजारों शिक्षामित्र प्रभावित हो रहे हैं.

कोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह इस मामले में कोई भी निर्णय लेते समय सभी कानूनी पहलुओं और पूर्व के न्यायिक आदेशों को ध्यान में रखे. इस आदेश के बाद अब सरकार के पास देरी की कोई गुंजाइश नहीं बची है और तय समय में निर्णय लेना अनिवार्य हो गया है.

याची को तीन सप्ताह में प्रत्यावेदन दाखिल करने का निर्देश

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना विस्तृत प्रत्यावेदन राज्य सरकार को सौंपे. इसके बाद राज्य सरकार को याची को सुनवाई का अवसर देना होगा.

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना पक्षकार को सुने कोई भी निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए. इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि फैसला पारदर्शी और न्यायसंगत हो. यह निर्देश न केवल याची बल्कि अन्य शिक्षामित्रों के लिए भी एक मजबूत कानूनी आधार तैयार करता है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और केंद्र के निर्देशों का पालन जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों को ध्यान में रखना होगा. इसमें जग्गो बनाम भारत संघ और श्रीपाल व अन्य मामलों का विशेष उल्लेख किया गया है.

इसके साथ ही 11 जून 2025 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि इन सभी कानूनी और प्रशासनिक दिशानिर्देशों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाए. इससे यह स्पष्ट है कि सरकार को अब एक संतुलित और कानूनसम्मत फैसला देना होगा.

तेज बहादुर मौर्य केस का हवाला, पहले भी मिल चुके हैं निर्देश

न्यायालय ने तेज बहादुर मौर्य और 114 अन्य के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं. कोर्ट ने कहा कि वर्तमान याचिका पर भी उसी फैसले के आलोक में विचार किया जाना चाहिए. इससे यह संकेत मिलता है कि न्यायपालिका इस विषय पर एक समान नीति लागू करने की ओर बढ़ रही है.

देवरिया की निघत फिरदौस की याचिका से मिला बड़ा आदेश

यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने देवरिया जिले की शिक्षामित्र निघत फिरदौस की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया. याची ने बताया कि वह लंबे समय से शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें न तो नियमित किया गया है और न ही सहायक अध्यापक के बराबर वेतन दिया गया है. उन्होंने कोर्ट से न्याय की मांग करते हुए समान वेतन और स्थायी दर्जा देने की अपील की थी. इस आदेश के बाद अब प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं.

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