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Uttar Pradesh: यूपी के ग्राम प्रधानों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा ! प्रदेश में पहली बार लागू हुई व्यवस्था

Uttar Pradesh: यूपी के ग्राम प्रधानों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा ! प्रदेश में पहली बार लागू हुई व्यवस्था
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का बड़ा फैसला चुनाव तक ग्राम प्रधान ही बनेंगे प्रशासक (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत देते हुए ऐतिहासिक फैसला लिया है. अब पंचायत चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम प्रधान ही प्रशासक समिति की अध्यक्षता करेंगे. प्रदेश में पहली बार यह व्यवस्था लागू की गई है. इससे पहले एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था. सरकार के इस फैसले से प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी.

UP Gram Pradhan News: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर महीनों से चल रही अटकलों के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिसने हजारों ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत दे दी है. पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब गांवों की सत्ता किसी अधिकारी के हाथ में नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा ग्राम प्रधान ही प्रशासक समिति की अगुवाई करेंगे. प्रदेश में पहली बार लागू की गई इस व्यवस्था को पंचायत राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. सरकार के इस कदम से साफ संकेत मिल गए हैं कि पंचायत चुनाव अभी दूर हैं और तब तक गांवों की जिम्मेदारी वर्तमान प्रधानों के पास ही रहेगी.

26 मई को खत्म होगा कार्यकाल, लेकिन प्रधान बनेंगे प्रशासक

उत्तर प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया है. पांच साल पहले 2021 में पंचायतों की पहली बैठक 26 मई को हुई थी. कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों की भूमिका भी समाप्त हो जाती थी, लेकिन इस बार सरकार ने अलग रास्ता अपनाया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले के बाद अब ग्राम प्रधान पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक समिति के जरिए पंचायत संचालन करते रहेंगे. इससे गांवों में चल रहे विकास कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वहीं जानकारों की माने तो विधानसभा चुनाव में प्रधानों को अपनी ओर करने के लिए भाजपा ने बड़ा दांव खेला है.

पहली बार लागू होगी ग्राम प्रधान अध्यक्षता वाली प्रशासक समिति

उत्तर प्रदेश में यह पहली बार होगा जब ग्राम प्रधान खुद प्रशासक समिति की अध्यक्षता करेंगे. इससे पहले एडीओ पंचायत को प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाती थी. पंचायती राज विभाग ने इस नई व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी. राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहले से यह व्यवस्था लागू है. अब यूपी सरकार ने भी इसी मॉडल को अपनाया है.

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पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद होने के संकेत

योगी सरकार के इस फैसले के बाद पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है. माना जा रहा है कि अब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे. सरकार की तैयारी भी इसी दिशा में दिखाई दे रही है.

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चुनाव में देरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. हाईकोर्ट में चल रही प्रक्रिया, पंचायत आयोग की रिपोर्ट और मतदाता सूची तैयार करने में लग रहा समय इसके साथ ही जनगणना भी इसकी बड़ी वजह है. पंचायत मतदाता की अंतिम सूची 10 जून को जारी होनी है. ऐसे में निकट भविष्य में पंचायत चुनाव होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है.

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ग्राम प्रधान संघ की मांग पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला

ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से सरकार से यह मांग कर रहा था कि पंचायत चुनाव तक ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी जाए. संगठन का तर्क था कि बाहरी अधिकारियों को गांवों की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं होती, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं. सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए मौजूदा प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी देने का फैसला किया है. इस निर्णय के बाद ग्राम प्रधानों में खुशी का माहौल है.

25 May 2026 By Vishwa Deepak Awasthi

Uttar Pradesh: यूपी के ग्राम प्रधानों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा ! प्रदेश में पहली बार लागू हुई व्यवस्था

UP Gram Pradhan News: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर महीनों से चल रही अटकलों के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिसने हजारों ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत दे दी है. पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब गांवों की सत्ता किसी अधिकारी के हाथ में नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा ग्राम प्रधान ही प्रशासक समिति की अगुवाई करेंगे. प्रदेश में पहली बार लागू की गई इस व्यवस्था को पंचायत राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. सरकार के इस कदम से साफ संकेत मिल गए हैं कि पंचायत चुनाव अभी दूर हैं और तब तक गांवों की जिम्मेदारी वर्तमान प्रधानों के पास ही रहेगी.

26 मई को खत्म होगा कार्यकाल, लेकिन प्रधान बनेंगे प्रशासक

उत्तर प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया है. पांच साल पहले 2021 में पंचायतों की पहली बैठक 26 मई को हुई थी. कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों की भूमिका भी समाप्त हो जाती थी, लेकिन इस बार सरकार ने अलग रास्ता अपनाया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले के बाद अब ग्राम प्रधान पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक समिति के जरिए पंचायत संचालन करते रहेंगे. इससे गांवों में चल रहे विकास कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वहीं जानकारों की माने तो विधानसभा चुनाव में प्रधानों को अपनी ओर करने के लिए भाजपा ने बड़ा दांव खेला है.

पहली बार लागू होगी ग्राम प्रधान अध्यक्षता वाली प्रशासक समिति

उत्तर प्रदेश में यह पहली बार होगा जब ग्राम प्रधान खुद प्रशासक समिति की अध्यक्षता करेंगे. इससे पहले एडीओ पंचायत को प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाती थी. पंचायती राज विभाग ने इस नई व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी. राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहले से यह व्यवस्था लागू है. अब यूपी सरकार ने भी इसी मॉडल को अपनाया है.

पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद होने के संकेत

योगी सरकार के इस फैसले के बाद पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है. माना जा रहा है कि अब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे. सरकार की तैयारी भी इसी दिशा में दिखाई दे रही है.

चुनाव में देरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. हाईकोर्ट में चल रही प्रक्रिया, पंचायत आयोग की रिपोर्ट और मतदाता सूची तैयार करने में लग रहा समय इसके साथ ही जनगणना भी इसकी बड़ी वजह है. पंचायत मतदाता की अंतिम सूची 10 जून को जारी होनी है. ऐसे में निकट भविष्य में पंचायत चुनाव होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है.

ग्राम प्रधान संघ की मांग पर सरकार ने लिया बड़ा फैसला

ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से सरकार से यह मांग कर रहा था कि पंचायत चुनाव तक ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी जाए. संगठन का तर्क था कि बाहरी अधिकारियों को गांवों की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं होती, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं. सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए मौजूदा प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी देने का फैसला किया है. इस निर्णय के बाद ग्राम प्रधानों में खुशी का माहौल है.

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