UP News: ओवरलोडिंग पर आईजी की सख्ती, फतेहपुर-बांदा की 18 चर्चित फर्में रडार पर, सूची में पूर्व विधायक भी शामिल
फतेहपुर और बांदा में मौरंग-गिट्टी की ओवरलोडिंग को लेकर आईजी ने सख्त रुख अपनाया है. 18 चर्चित फर्मों के ट्रक और डंपरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. सूची में पूर्व विधायक, भाजपा नेता और ढाबा संचालकों से जुड़ी फर्में भी शामिल बताई जा रही हैं.
UP News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर और बांदा जिलों में मौरंग और गिट्टी की ओवरलोडिंग पर अब आईजी की नजर सख्त हो गई है. एसटीएफ की कार्रवाई के बाद भी ओवरलोडिंग का सिलसिला जारी रहने पर आईजी ने नाराजगी जताते हुए 18 चर्चित फर्मों के ट्रक और डंपरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इस सूची में पूर्व विधायक, भाजपा नेता और कुछ ढाबा संचालकों से जुड़ी फर्मों के नाम भी सामने आए हैं.
आईजी के आदेश के बाद प्रशासन में हलचल
फतेहपुर और बांदा जिलों में लंबे समय से ओवरलोडिंग का मुद्दा प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. मौरंग और गिट्टी से लदे ट्रक अक्सर क्षमता से अधिक माल लेकर सड़कों पर दौड़ते देखे जाते हैं. कई बार इसको लेकर शिकायतें भी सामने आई हैं.
जब एसटीएफ की कार्रवाई के बावजूद इस पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी तो आईजी कार्यालय की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए. आईजी ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर 18 चर्चित फर्मों के ट्रक और डंपरों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है.
एसपी ने सीओ को भेजा पत्र, मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईजी के निर्देश मिलने के बाद फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी सर्किल अधिकारियों को पत्र भेजा है. इस पत्र में आईजी के आदेश का हवाला देते हुए चिन्हित फर्मों के वाहनों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
एसपी ने सभी सीओ से कहा है कि अपने-अपने क्षेत्र में चल रहे ट्रकों और डंपरों की जांच की जाए और यदि वे ओवरलोड पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए. साथ ही की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई जाए. प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की भी बात कही जा रही है.
एसटीएफ की छापेमारी में उजागर हुआ था पूरा नेटवर्क
फतेहपुर में ओवरलोडिंग के इस खेल का खुलासा पिछले वर्ष 11 नवंबर की रात एसटीएफ की छापेमारी के दौरान हुआ था. एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर छापेमारी की और थरियांव थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था.
जांच में सामने आया था कि ओवरलोडिंग के इस नेटवर्क में कई लोगों की भूमिका हो सकती है. मामले में कई लोगों को नामजद किया गया और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया. इस कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि जिले में ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक लगेगी, लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति में खास बदलाव नहीं आया.
एसटीएफ ने इन पर दर्ज कराया था मुकदमा
एसटीएफ की कार्रवाई के बाद मामले की जांच में कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे. आरोपों के बाद पीटीओ, एआरटीओ और खनिज अधिकारी के गनर को निलंबित किया गया था.
इसके अलावा मुकदमे में नामजद कुछ लोकेटर और ढाबा संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. जांच एजेंसियों का मानना था कि ओवरलोडिंग का यह खेल एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था, जिसमें विभिन्न स्तरों पर लोगों की भूमिका की जांच की जा रही थी. हालांकि इन कार्रवाइयों के बाद भी जिले में ओवरलोडिंग की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी.
कई बार भेजे गए रिमाइंडर, फिर भी नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई
सूत्रों की माने तो आईजी कार्यालय की ओर से इस मामले में लगातार पत्राचार किया गया. सबसे पहले 13 नवंबर को पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया था. इसके बाद 6 जनवरी, 21 जनवरी, 30 जनवरी और 18 फरवरी को रिमाइंडर भेजे गए.
इन पत्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि ओवरलोडिंग में संलिप्त 18 फर्मों के वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए. बावजूद इसके अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं हो सकी.
सूत्रों के मुताबिक कई ट्रकों पर संबंधित फर्मों के नाम भी लिखे हुए हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल नहीं है. इसके बावजूद कार्रवाई धीमी रहने पर आईजी ने एक बार फिर रिपोर्ट तलब की है.
टास्क फोर्स के समन्वय से कार्रवाई के निर्देश
आईजी ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई जिला टास्क फोर्स और सब डिवीजन टास्क फोर्स के समन्वय से की जाए. इस टास्क फोर्स में एसडीएम, सीओ, खनिज अधिकारी और एआरटीओ शामिल होते हैं. इन सभी विभागों को मिलकर चिन्हित फर्मों के ट्रकों और डंपरों की जांच करने और नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
मीडिया से बात करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक महेंद्र पाल सिंह का कहना है कि आईजी के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट भी मांगी गई है.
