Fatehpur News: पत्नी को पद दिलाने के लिए मुखलाल पाल को दिए थे 25 लाख, DIOS से लेकर शिक्षक संघ अध्यक्ष तक लगे आरोप
फतेहपुर में डीआईओएस दफ्तर के बाबू के आत्महत्या प्रयास के बाद सुसाइड नोट से बड़ा खुलासा हुआ है. पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल पर 25 लाख लेने का आरोप लगा है. DIOS, शिक्षक संघ अध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं.
Fatehpur UP News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक आत्महत्या के प्रयास ने पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र को सवालों के घेरे में ला दिया है. डीआईओएस कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक विनोद श्रीवास्तव द्वारा लिखे गए छह पन्नों के सुसाइड नोट में ऐसे आरोप सामने आए हैं, जिन्होंने जिले की सियासत और शिक्षा विभाग दोनों को हिला दिया है. इसमें पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल, DIOS और माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष पर पैसे और उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए गए हैं.
सुसाइड नोट बना पूरे मामले की धुरी, सात बिंदुओं में दर्ज आरोप
विनोद श्रीवास्तव द्वारा लिखा गया छह पन्नों का सुसाइड नोट अब इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन चुका है. इस नोट में सात अलग-अलग बिंदुओं में उन्होंने विस्तार से अपनी पीड़ा और आरोपों को दर्ज किया है. शुरुआत में ही उन्होंने साफ लिखा कि वह लगातार हो रहे उत्पीड़न और दबाव से टूट चुके हैं. नोट में कार्यालय के अंदर चल रही व्यवस्थाओं, अधिकारियों के व्यवहार और व्यक्तिगत स्तर पर झेली गई परेशानियों का विस्तार से उल्लेख है.
25 लाख की डील का आरोप, पत्नी को पद दिलाने का दिया गया झांसा
सुसाइड नोट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल पर लगाया गया है. विनोद श्रीवास्तव ने लिखा कि उनकी पत्नी को महिला आयोग में पद दिलाने का भरोसा दिलाया गया. इसके एवज में उनसे पांच किस्तों में कुल 25 लाख रुपये लिए गए. यह रकम उन्होंने सूद पर उधार लेकर दी थी. लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी न तो कोई पद मिला और न ही कोई ठोस जवाब मिला. आरोप यह भी है कि बाद में प्रदेश स्तर पर पद दिलाने का नया भरोसा दिया गया, लेकिन वह भी अधूरा रह गया.
DIOS पर वित्तीय अनियमितता और उत्पीड़न के आरोप
इन सभी कारणों से वह लगातार तनाव में थे. जिसके बाद लिपिक ने ये आत्मघाती कदम उठाया और नींद की गोलियां खाकर जान देने का प्रयास किया. मामले में माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष आलोक शुक्ला का नाम भी सामने आया है. सुसाइड नोट के अनुसार उनसे दो अलग-अलग चेक के माध्यम से कुल चार लाख रुपये लिए गए, इस आरोप ने पूरे प्रकरण को और अधिक गंभीर बना दिया है.
मुखलाल पाल और DIOS की सफाई, साजिश की बात
आरोपों के बाद पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है. उन्होंने कहा कि यह सब एक राजनीतिक साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि उन्हें बदनाम कर पार्टी से बाहर किया जा सके. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी ने पैसे दिए हैं तो उसका प्रमाण सामने लाया जाए.
वहीं DIOS राकेश कुमार ने भी सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने हर काम शासनादेश के अनुसार किया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित लिपिक लंबे समय से अवकाश पर थे और आरोप तथ्यहीन हैं. बताया जा रहा है कि पटल से हटने के कारण आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं.
अस्पताल में इलाज जारी, प्रशासनिक जांच तेज
घटना के बाद विनोद श्रीवास्तव को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अब उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है. एडीएम वित्त एवं राजस्व समेत कई अधिकारी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. विभागीय स्तर पर भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा.
Fatehpur News: पत्नी को पद दिलाने के लिए मुखलाल पाल को दिए थे 25 लाख, DIOS से लेकर शिक्षक संघ अध्यक्ष तक लगे आरोप
Fatehpur UP News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक आत्महत्या के प्रयास ने पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र को सवालों के घेरे में ला दिया है. डीआईओएस कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक विनोद श्रीवास्तव द्वारा लिखे गए छह पन्नों के सुसाइड नोट में ऐसे आरोप सामने आए हैं, जिन्होंने जिले की सियासत और शिक्षा विभाग दोनों को हिला दिया है. इसमें पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल, DIOS और माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष पर पैसे और उत्पीड़न से जुड़े आरोप लगाए गए हैं.
सुसाइड नोट बना पूरे मामले की धुरी, सात बिंदुओं में दर्ज आरोप
विनोद श्रीवास्तव द्वारा लिखा गया छह पन्नों का सुसाइड नोट अब इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन चुका है. इस नोट में सात अलग-अलग बिंदुओं में उन्होंने विस्तार से अपनी पीड़ा और आरोपों को दर्ज किया है. शुरुआत में ही उन्होंने साफ लिखा कि वह लगातार हो रहे उत्पीड़न और दबाव से टूट चुके हैं. नोट में कार्यालय के अंदर चल रही व्यवस्थाओं, अधिकारियों के व्यवहार और व्यक्तिगत स्तर पर झेली गई परेशानियों का विस्तार से उल्लेख है.
25 लाख की डील का आरोप, पत्नी को पद दिलाने का दिया गया झांसा
सुसाइड नोट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल पर लगाया गया है. विनोद श्रीवास्तव ने लिखा कि उनकी पत्नी को महिला आयोग में पद दिलाने का भरोसा दिलाया गया. इसके एवज में उनसे पांच किस्तों में कुल 25 लाख रुपये लिए गए. यह रकम उन्होंने सूद पर उधार लेकर दी थी. लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी न तो कोई पद मिला और न ही कोई ठोस जवाब मिला. आरोप यह भी है कि बाद में प्रदेश स्तर पर पद दिलाने का नया भरोसा दिया गया, लेकिन वह भी अधूरा रह गया.
DIOS पर वित्तीय अनियमितता और उत्पीड़न के आरोप
सुसाइड नोट में DIOS राकेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. विनोद ने कार्यालय के एक सभागार निर्माण में वित्तीय अनियमितता का जिक्र किया है. इसके अलावा उन्होंने अपने बेटे की संविदा नौकरी का सात महीने का वेतन न मिलने की बात भी लिखी. कार्यों के विभाजन में मनमानी और कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार के आरोप भी सामने आए हैं.
इन सभी कारणों से वह लगातार तनाव में थे. जिसके बाद लिपिक ने ये आत्मघाती कदम उठाया और नींद की गोलियां खाकर जान देने का प्रयास किया. मामले में माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष आलोक शुक्ला का नाम भी सामने आया है. सुसाइड नोट के अनुसार उनसे दो अलग-अलग चेक के माध्यम से कुल चार लाख रुपये लिए गए, इस आरोप ने पूरे प्रकरण को और अधिक गंभीर बना दिया है.
मुखलाल पाल और DIOS की सफाई, साजिश की बात
आरोपों के बाद पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है. उन्होंने कहा कि यह सब एक राजनीतिक साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि उन्हें बदनाम कर पार्टी से बाहर किया जा सके. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी ने पैसे दिए हैं तो उसका प्रमाण सामने लाया जाए.
वहीं DIOS राकेश कुमार ने भी सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने हर काम शासनादेश के अनुसार किया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित लिपिक लंबे समय से अवकाश पर थे और आरोप तथ्यहीन हैं. बताया जा रहा है कि पटल से हटने के कारण आरोप प्रत्यारोप लग रहे हैं.
अस्पताल में इलाज जारी, प्रशासनिक जांच तेज
घटना के बाद विनोद श्रीवास्तव को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अब उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है. एडीएम वित्त एवं राजस्व समेत कई अधिकारी अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. विभागीय स्तर पर भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा.