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Fatehpur News: फतेहपुर में 11 लोकेटरों सहित कई लोगों पर मुकदमा ! अभी कईयों पर गिर सकती है गाज

Fatehpur News: फतेहपुर में 11 लोकेटरों सहित कई लोगों पर मुकदमा ! अभी कईयों पर गिर सकती है गाज
फतेहपुर में खनिज परिवहन की लोकेशन देने वाले कई लोकेटरों पर दर्ज हुआ मुकदमा, ढाबा संचालक भी फंसे (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद खनन निरीक्षक की तहरीर पर पार्थ ढाबा संचालक, 11 लोकेटरों और कई वाहन मालिकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है. आरोप है कि ये लोग रात में अधिकारियों का पीछा कर खनिज वाहनों को लोकेशन देते थे. जांच बढ़ी तो कई और नाम सामने आ सकते हैं.

Fatehpur News: यूपी के फतेहपुर में अवैध खनन और लोकेटर गैंग की गतिविधियों पर एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई के बाद मामला और गहरा गया है. खनन निरीक्षक विपेंद्र कुमार राजभर ने सदर कोतवाली में पार्थ ढाबा संचालक सहित 11 लोकेटरों और कई कार मालिकों पर एफआईआर दर्ज कराई है. इन पर आरोप है कि ये लोग संगठित गिरोह की तरह खनिज वाहनों को पास कराते थे और चेकिंग टीम का पीछा कर लोकेशन शेयर करते थे.

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद खनन विभाग में मचा हड़कंप

यूपी एसटीएफ की हालिया कार्रवाई ने फतेहपुर जिले में सक्रिय लोकेटर नेटवर्क की पोल खोल दी है. इससे पहले 11 नवंबर को खनिज अधिकारी देशराज पटेल ने एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा, पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी और कई लोकेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसके बाद खनिज विभाग और एआरटीओ कार्यालय की जमकर फजीहत हुई थी. जिला प्रशासन की कमजोर भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए थे. अब नए केस ने साफ कर दिया है कि अवैध खनन का पूरा सिस्टम संगठित तरीके से चलता रहा और विभागीय निगरानी बेहद कमजोर थी.

चेकिंग के दौरान ढाबा संचालक और लोकेटरों का पीछा कर लोकेशन देना हुआ उजागर

खनन निरीक्षक विपेंद्र राजभर ने आरोप लगाया कि बीते दिनों रात में चेकिंग के दौरान कोराई मोड़ से दतौली तक काली कार सवार पार्थ ढाबा संचालक देवांश और दूसरी कार में बेरागढ़ीवा का रामू यादव अपने साथियों के साथ खनिज वाहनों को लोकेशन दे रहे थे. उनका काम था अधिकारियों की मौजूदगी का पता लगाना और वाहनों को सुरक्षित मार्ग दिलाना. यह गतिविधि पहले भी कई बार देखी गई, लेकिन इस बार चेकिंग में लोकेटरों का पूरा नेटवर्क सामने आ गया.

विद्यार्थी चौराहे पर स्कॉर्पियो में मिले संदिग्ध, पीछा करते पकड़े गए

11 नवंबर की रात शहर के विद्यार्थी चौराहे पर सफेद स्कॉर्पियो में रायबरेली निवासी कपिल तिवारी और आठ अन्य वाहनों में सवार लोगों के अधिकारी टीम का पीछा करने की पुष्टि हुई. पूछताछ में कार सवारों ने दावा किया कि उनकी गाड़ियां खनिज परिवहन में चलती हैं और वे इसी कारण इलाके में घूमते हैं. विरोध होने पर ये लोकेटर बवाल और मारपीट तक पर उतर आते थे. खनन विभाग ने इन्हें एक संगठित गिरोह बताया है, जिसका मुख्य उद्देश्य खनिज वाहनों को सुरक्षा देना था.

Read More: फतेहपुर बार चुनाव 2026: एक वोट ने पलटा समीकरण, बाबू सिंह यादव बने अध्यक्ष, अनुराग मिश्रा महामंत्री

संगठित गिरोह में शामिल कई नाम एफआईआर से बाहर, उठे सवाल

एफआईआर में यह भी सामने आया है कि लोकेशन के नाम पर वसूली करने वाला बेरागढ़ीवा का चर्चित लोकेटर एक बार फिर अपना नाम एफआईआर से बचाने में सफल रहा है. जबकि उसे खनन विभाग से लेकर स्थानीय पुलिस तक सभी अधिकारी जानते हैं. इसके चलते यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वह हर बड़े मामले में कार्रवाई से बाहर क्यों रह जाता है. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह व्यक्ति लोकेटर नेटवर्क का अहम हिस्सा है और कई अधिकारियों की छत्रछाया में बच निकलता रहा है.

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एफआईआर में शामिल कई अज्ञात, विवेचना में खुलेंगे नाम

खनन निरीक्षक विपेंद्र राजभर ने कहा कि जिन लोगों के नाम पुष्टि के साथ सामने आए, उन पर केस दर्ज कर दिया गया है. इसके अलावा कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है. राजभर के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और नाम सामने आ सकते हैं, क्योंकि लोकेटर नेटवर्क में दर्जनों लोग सक्रिय रहते हैं. एसटीएफ और खनन विभाग अब संयुक्त रूप से इस गिरोह की गतिविधियों का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं.

Read More: Fatehpur News: फतेहपुर कांड में फरार बबलू सिंगरौर पर एक लाख का इनाम ! बुलडोजर ने तोड़ दी हेकड़ी, सात टीमें दे रहीं दबिश

24 Nov 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Fatehpur News: फतेहपुर में 11 लोकेटरों सहित कई लोगों पर मुकदमा ! अभी कईयों पर गिर सकती है गाज

Fatehpur News: यूपी के फतेहपुर में अवैध खनन और लोकेटर गैंग की गतिविधियों पर एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई के बाद मामला और गहरा गया है. खनन निरीक्षक विपेंद्र कुमार राजभर ने सदर कोतवाली में पार्थ ढाबा संचालक सहित 11 लोकेटरों और कई कार मालिकों पर एफआईआर दर्ज कराई है. इन पर आरोप है कि ये लोग संगठित गिरोह की तरह खनिज वाहनों को पास कराते थे और चेकिंग टीम का पीछा कर लोकेशन शेयर करते थे.

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद खनन विभाग में मचा हड़कंप

यूपी एसटीएफ की हालिया कार्रवाई ने फतेहपुर जिले में सक्रिय लोकेटर नेटवर्क की पोल खोल दी है. इससे पहले 11 नवंबर को खनिज अधिकारी देशराज पटेल ने एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा, पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी और कई लोकेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसके बाद खनिज विभाग और एआरटीओ कार्यालय की जमकर फजीहत हुई थी. जिला प्रशासन की कमजोर भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए थे. अब नए केस ने साफ कर दिया है कि अवैध खनन का पूरा सिस्टम संगठित तरीके से चलता रहा और विभागीय निगरानी बेहद कमजोर थी.

चेकिंग के दौरान ढाबा संचालक और लोकेटरों का पीछा कर लोकेशन देना हुआ उजागर

खनन निरीक्षक विपेंद्र राजभर ने आरोप लगाया कि बीते दिनों रात में चेकिंग के दौरान कोराई मोड़ से दतौली तक काली कार सवार पार्थ ढाबा संचालक देवांश और दूसरी कार में बेरागढ़ीवा का रामू यादव अपने साथियों के साथ खनिज वाहनों को लोकेशन दे रहे थे. उनका काम था अधिकारियों की मौजूदगी का पता लगाना और वाहनों को सुरक्षित मार्ग दिलाना. यह गतिविधि पहले भी कई बार देखी गई, लेकिन इस बार चेकिंग में लोकेटरों का पूरा नेटवर्क सामने आ गया.

विद्यार्थी चौराहे पर स्कॉर्पियो में मिले संदिग्ध, पीछा करते पकड़े गए

11 नवंबर की रात शहर के विद्यार्थी चौराहे पर सफेद स्कॉर्पियो में रायबरेली निवासी कपिल तिवारी और आठ अन्य वाहनों में सवार लोगों के अधिकारी टीम का पीछा करने की पुष्टि हुई. पूछताछ में कार सवारों ने दावा किया कि उनकी गाड़ियां खनिज परिवहन में चलती हैं और वे इसी कारण इलाके में घूमते हैं. विरोध होने पर ये लोकेटर बवाल और मारपीट तक पर उतर आते थे. खनन विभाग ने इन्हें एक संगठित गिरोह बताया है, जिसका मुख्य उद्देश्य खनिज वाहनों को सुरक्षा देना था.

संगठित गिरोह में शामिल कई नाम एफआईआर से बाहर, उठे सवाल

एफआईआर में यह भी सामने आया है कि लोकेशन के नाम पर वसूली करने वाला बेरागढ़ीवा का चर्चित लोकेटर एक बार फिर अपना नाम एफआईआर से बचाने में सफल रहा है. जबकि उसे खनन विभाग से लेकर स्थानीय पुलिस तक सभी अधिकारी जानते हैं. इसके चलते यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वह हर बड़े मामले में कार्रवाई से बाहर क्यों रह जाता है. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह व्यक्ति लोकेटर नेटवर्क का अहम हिस्सा है और कई अधिकारियों की छत्रछाया में बच निकलता रहा है.

एफआईआर में शामिल कई अज्ञात, विवेचना में खुलेंगे नाम

खनन निरीक्षक विपेंद्र राजभर ने कहा कि जिन लोगों के नाम पुष्टि के साथ सामने आए, उन पर केस दर्ज कर दिया गया है. इसके अलावा कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है. राजभर के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और नाम सामने आ सकते हैं, क्योंकि लोकेटर नेटवर्क में दर्जनों लोग सक्रिय रहते हैं. एसटीएफ और खनन विभाग अब संयुक्त रूप से इस गिरोह की गतिविधियों का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं.

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