
Fatehpur News: फतेहपुर का हथगाम बनेगा पहला AI ब्लॉक ! अब मोबाइल पर मिलेगी अपने आप जानकारी, जानिए कैसे होगा काम
Fatehpur News In Hindi
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का हथगाम ब्लाक अब पहला एआइ निगरानी ब्लाक बनने जा रहा है. यहां बच्चों के जन्म से लेकर टीकाकरण तक की पूरी जानकारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए रिकॉर्ड और मॉनिटर की जाएगी और सीधे मोबाइल पर जानकारी मिलेगी.
Fatehpur News: यूपी के फतेहपुर जिले का हथगाम ब्लाक जल्द ही टेक्नोलॉजी की नई पहचान बनने जा रहा है. नीति आयोग ने इसे आकांक्षी ब्लाक के रूप में सूचीबद्ध किया है और अब यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बच्चों के जन्म और टीकाकरण की पूरी निगरानी होगी. खास बात यह है कि बच्चों से जुड़ी सभी जानकारियां सीधे माता-पिता के मोबाइल पर मैसेज और व्हाट्सएप नोटिफिकेशन के रूप में उपलब्ध कराई जाएंगी.
एआइ से बच्चों के जन्म और टीकाकरण की निगरानी
हथगाम ब्लाक में जन्म लेने वाले हर बच्चे का पूरा विवरण एआइ पोर्टल पर दर्ज होगा. बच्चे का जन्म कब हुआ, उसे कौन सा टीका कब लगना है और आगे कौन सा टीका कब लगेगा, इसकी पूरी जानकारी सिस्टम अपने आप रिकॉर्ड करेगा. यह सूचना सीधे माता-पिता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज और व्हाट्सएप नोटिफिकेशन के जरिए भेजी जाएगी. इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता आएगी बल्कि किसी भी बच्चे का टीकाकरण छूटने की संभावना भी समाप्त हो जाएगी.
नीति आयोग की पहल से आकांक्षी ब्लाक बना हथगाम

अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को दी जा रही ट्रेनिंग
डीएम रविंद्र सिंह कर रहे निगरानी
मीडिया को जानकारी देते हुए जिलाधिकारी रविंद्र सिंह ने कहा कि वो इस पूरे प्रोजेक्ट की सीधे निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि एआइ पोर्टल को शुरूआती चरण में बच्चों के जन्म और टीकाकरण से जोड़ा गया है. आने वाले समय में इसमें और भी स्वास्थ्य सेवाओं को शामिल किया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि अगले एक माह के भीतर यह पोर्टल पूरी तरह से शुरू कर दिया जाएगा, जिसके बाद यह ब्लाक देश में अपनी तरह की पहली मिसाल बनेगा.
एक मॉडल बनेगा हथगाम ब्लाक
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रोजेक्ट सफल हुआ तो आने वाले समय में अन्य जिलों और राज्यों के लिए हथगाम ब्लाक एक रोल मॉडल साबित हो सकता है. बच्चों के स्वास्थ्य और टीकाकरण से जुड़ी पारदर्शी व्यवस्था ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देगी और आकांक्षी जिलों की श्रेणी से बाहर आने में मदद करेगी.
