Fatehpur News: फतेहपुर में गजब मामला ! कपड़े बेचने वाला निकला करोड़पति, जांच में खुली सच्चाई
फतेहपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां ई-रिक्शा से कपड़े बेचने वाले गरीब युवक के नाम पर करोड़ों का कारोबार दिखाया गया. जीएसटी विभाग की जांच में फर्जी फर्म और कर चोरी का खुलासा हुआ है. मामले ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सामने आया यह मामला न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि सिस्टम की बड़ी खामियों को भी उजागर करता है. सदर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाला एक गरीब युवक, जो ई-रिक्शा से कपड़े बेचकर परिवार चलाता है, कागजों में करोड़ों का कारोबारी निकला. जब जीएसटी विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची तो हकीकत देखकर खुद अधिकारी भी दंग रह गए.
फटेहाल जिंदगी, लेकिन कागजों में करोड़ों का मालिक
सदर कोतवाली क्षेत्र के पठान मोहल्ला निवासी अंसार पुत्र गफ्तार की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. असल जिंदगी में अंसार एक साधारण व्यक्ति है, जो ई-रिक्शा से कपड़े बेचकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करता है. उसका घर भी बेहद जर्जर हालत में है.
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वही अंसार करोड़ों का कारोबार करने वाला उद्योगपति बन चुका है. “अंसार इंटरप्राइजेज” नाम की फर्म उसके नाम से संचालित हो रही है, जिसने पिछले वित्तीय वर्ष में करीब तीन करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की है और करोड़ों का टर्न ओवर है. खुलासा होते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई
छापेमारी में खुली हकीकत, टीम भी रह गई हैरान
बिजली बिल बना बड़ा सुराग, एक ही पते पर फर्म और घर
जांच के दौरान जीएसटी टीम को सबसे अहम सुराग बिजली विभाग से मिला. टीम के पास अंसार के नाम का एक बिजली बिल था, जिसमें दर्ज पता “166 पठान मोहल्ला आबूनगर” था. जब इस पते का मिलान फर्म के रजिस्ट्रेशन से किया गया, तो दोनों एक ही निकले.
इससे साफ हो गया कि किसी ने अंसार के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से जीएसटी पंजीकरण कराया. अधिकारियों का मानना है कि बिजली बिल जैसे दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यह फर्जी फर्म बनाई गई और उसी के आधार पर करोड़ों का लेन-देन दिखाया गया.
अंसार और पिता बोले हमें कुछ नहीं पता साहब
अंसार और उसके पिता गफ्तार ने अधिकारियों के सामने अपनी जो कहानी रखी, वह बेहद मार्मिक है. उन्होंने बताया कि वे दोनों ई-रिक्शा चलाकर और फेरी लगाकर किसी तरह परिवार का गुजारा करते हैं. उन्हें किसी भी तरह के व्यापार या फर्म की जानकारी नहीं है.
अंसार ने कहा कि अधिकारी आए और बोले कि तुम्हारी फर्म ने करोड़ों का घपला किया है, जबकि मेरी कोई फर्म ही नहीं है. पिता गफ्तार ने भी यही बात दोहराई और कहा कि वे पूरी जिंदगी मेहनत मजदूरी करते रहे हैं. इस घटना ने यह दिखा दिया कि कैसे गरीब और अनजान लोगों के नाम का इस्तेमाल कर बड़े अपराध किए जा रहे हैं.
पहले भी सामने आ चुका है फर्जी जीएसटी का बड़ा खेल
फतेहपुर में यह कोई पहला मामला नहीं है. कुछ दिन पहले ही एक और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था, जिसमें राखी सक्सेना के नाम पर फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया गया था और पता कानपुर दिखाया गया, जबकि यह फर्म कागजों में वेस्ट पेपर और स्क्रैप के कारोबार के लिए बनाई गई थी और कारोबार का पता जिले के जोनिहा में दिखाया गया.
वहीं मौके पर उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला. इसके बावजूद जीएसटी पोर्टल पर करीब 68 करोड़ रुपये का टर्नओवर और 12 करोड़ से ज्यादा की टैक्स देनदारी दिखाई गई. इस मामले में बिंदकी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच जारी है. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जिले में फर्जी फर्मों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है.
Fatehpur News: फतेहपुर में गजब मामला ! कपड़े बेचने वाला निकला करोड़पति, जांच में खुली सच्चाई
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सामने आया यह मामला न सिर्फ हैरान करने वाला है बल्कि सिस्टम की बड़ी खामियों को भी उजागर करता है. सदर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाला एक गरीब युवक, जो ई-रिक्शा से कपड़े बेचकर परिवार चलाता है, कागजों में करोड़ों का कारोबारी निकला. जब जीएसटी विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची तो हकीकत देखकर खुद अधिकारी भी दंग रह गए.
फटेहाल जिंदगी, लेकिन कागजों में करोड़ों का मालिक
सदर कोतवाली क्षेत्र के पठान मोहल्ला निवासी अंसार पुत्र गफ्तार की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. असल जिंदगी में अंसार एक साधारण व्यक्ति है, जो ई-रिक्शा से कपड़े बेचकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करता है. उसका घर भी बेहद जर्जर हालत में है.
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वही अंसार करोड़ों का कारोबार करने वाला उद्योगपति बन चुका है. “अंसार इंटरप्राइजेज” नाम की फर्म उसके नाम से संचालित हो रही है, जिसने पिछले वित्तीय वर्ष में करीब तीन करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की है और करोड़ों का टर्न ओवर है. खुलासा होते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई
छापेमारी में खुली हकीकत, टीम भी रह गई हैरान
प्रयागराज से आई राज्य कर विभाग की टीम जब डिप्टी कमिश्नर राजेंद्र सिंह यादव के नेतृत्व में बीते दिनों अंसार के घर पहुंची, तो उन्हें किसी बड़े कारोबारी सेटअप की उम्मीद थी. लेकिन मौके पर जो स्थिति मिली, उसने सबको चौंका दिया. एक टूटा-फूटा मकान, सीमित संसाधनों में गुजर-बसर करता परिवार. पूछताछ के दौरान अंसार और उसके परिजनों ने साफ कहा कि उनका किसी भी फर्म या बड़े व्यापार से कोई संबंध नहीं है. अधिकारियों ने मौके पर ही उनके बयान दर्ज किए और आगे की जांच के लिए वापस लौट गए.
बिजली बिल बना बड़ा सुराग, एक ही पते पर फर्म और घर
जांच के दौरान जीएसटी टीम को सबसे अहम सुराग बिजली विभाग से मिला. टीम के पास अंसार के नाम का एक बिजली बिल था, जिसमें दर्ज पता “166 पठान मोहल्ला आबूनगर” था. जब इस पते का मिलान फर्म के रजिस्ट्रेशन से किया गया, तो दोनों एक ही निकले.
इससे साफ हो गया कि किसी ने अंसार के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से जीएसटी पंजीकरण कराया. अधिकारियों का मानना है कि बिजली बिल जैसे दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यह फर्जी फर्म बनाई गई और उसी के आधार पर करोड़ों का लेन-देन दिखाया गया.
अंसार और पिता बोले हमें कुछ नहीं पता साहब
अंसार और उसके पिता गफ्तार ने अधिकारियों के सामने अपनी जो कहानी रखी, वह बेहद मार्मिक है. उन्होंने बताया कि वे दोनों ई-रिक्शा चलाकर और फेरी लगाकर किसी तरह परिवार का गुजारा करते हैं. उन्हें किसी भी तरह के व्यापार या फर्म की जानकारी नहीं है.
अंसार ने कहा कि अधिकारी आए और बोले कि तुम्हारी फर्म ने करोड़ों का घपला किया है, जबकि मेरी कोई फर्म ही नहीं है. पिता गफ्तार ने भी यही बात दोहराई और कहा कि वे पूरी जिंदगी मेहनत मजदूरी करते रहे हैं. इस घटना ने यह दिखा दिया कि कैसे गरीब और अनजान लोगों के नाम का इस्तेमाल कर बड़े अपराध किए जा रहे हैं.
पहले भी सामने आ चुका है फर्जी जीएसटी का बड़ा खेल
फतेहपुर में यह कोई पहला मामला नहीं है. कुछ दिन पहले ही एक और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था, जिसमें राखी सक्सेना के नाम पर फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया गया था और पता कानपुर दिखाया गया, जबकि यह फर्म कागजों में वेस्ट पेपर और स्क्रैप के कारोबार के लिए बनाई गई थी और कारोबार का पता जिले के जोनिहा में दिखाया गया.
वहीं मौके पर उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला. इसके बावजूद जीएसटी पोर्टल पर करीब 68 करोड़ रुपये का टर्नओवर और 12 करोड़ से ज्यादा की टैक्स देनदारी दिखाई गई. इस मामले में बिंदकी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच जारी है. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जिले में फर्जी फर्मों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है.