
Fatehpur News: 11 महीने बाद पूरी तरह शुरू हुआ असनी-गेगासों गंगा पुल, भारी वाहनों की आवाजाही बहाल
फतेहपुर और रायबरेली को जोड़ने वाला असनी-गेगासों गंगा पुल 11 महीने बाद पूरी तरह भारी वाहनों के लिए खोल दिया गया है. दो दिनों तक 35 टन भार के साथ सफल टेस्टिंग के बाद एनएचएआई ने पुल पर आवागमन शुरू कर दिया. पुल के खुलने से व्यापार, परिवहन और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है.
Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में स्थित असनी-गेगासों गंगा पुल की मरम्मत और लोड टेस्टिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद गुरुवार दोपहर से भारी वाहनों का संचालन फिर शुरू कर दिया गया. करीब 11 महीने तक बंद रहने के कारण लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा था. पुल खुलने से अब परिवहन व्यवस्था सामान्य हो गई है.
11 महीने बाद शुरू हुआ भारी वाहनों का संचालन
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सितंबर 2025 में असनी-गेगासों गंगा पुल की मरम्मत के लिए भारी वाहनों का आवागमन बंद कर दिया था. पुल की मरम्मत का कार्य छह महीने में पूरा होना था, लेकिन आवश्यक निर्माण सामग्री समय पर उपलब्ध न होने के कारण इसमें लगभग 11 महीने का समय लग गया. अब मरम्मत पूरी होने के बाद पुल को पूरी तरह यातायात के लिए खोल दिया गया है.
35 टन भार के साथ दो दिन चली सफल टेस्टिंग

14 करोड़ रुपये से हुई पुल की मरम्मत
करीब 1.40 किलोमीटर लंबे असनी-गेगासों गंगा पुल की मरम्मत पर एनएचएआई ने लगभग 14 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. यह पुल फतेहपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, लखनऊ और कानपुर-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है. इसके चालू होने से क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा.
12 किलोमीटर अतिरिक्त सफर से मिली राहत
पुल बंद रहने के दौरान भारी वाहनों को लगभग 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी. इससे डीजल-पेट्रोल की खपत बढ़ने के साथ परिवहन लागत भी अधिक हो गई थी. अब पुल शुरू होने से समय, ईंधन और परिवहन खर्च में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ व्यापारियों और वाहन संचालकों को मिलेगा.
स्थानीय लोगों और व्यापारियों में खुशी
पुल खुलने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों, व्यापारियों और वाहन स्वामियों में खुशी का माहौल देखने को मिला. स्थानीय निवासी राजेश, कमलेश और प्रभाकर ने बताया कि 11 महीने बाद भारी वाहनों का संचालन शुरू होने से व्यापार को गति मिलेगी. साथ ही ईंधन की बचत होगी और दूर-दराज से आने वाले सामान की ढुलाई लागत भी कम हो जाएगी.
