Fatehpur News: भ्रष्टाचार की परतें खोलने वाली 100 पेज की पत्रावली कलेक्ट्रेट से गायब ! मुख्यमंत्री योगी से शिकायत, सरकारी जमीनों पर बड़ा खेल
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता और आरएसएस कार्यकर्ता रवींद्र परमार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि सरकारी जमीनों, तालाबी संपत्तियों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की करीब 100 पेज की महत्वपूर्ण पत्रावली कलेक्ट्रेट से गायब हो गई है. उन्होंने पूरे प्रकरण को प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
Fatehpur News: फतेहपुर जिले में सरकारी जमीनों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र परमार ने आरोप लगाया है कि वर्षों से जुटाए गए दस्तावेजों, शिकायतों और साक्ष्यों पर आधारित करीब 100 पन्नों की महत्वपूर्ण पत्रावली कलेक्ट्रेट से गायब हो गई है. उनका दावा है कि यदि इन दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होती तो सरकारी भूमि, तालाबी संपत्तियों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते थे.
25 वर्षों से सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं परमार
रवींद्र परमार ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में बताया कि वह वर्ष 2000 से 2015 तक फतेहपुर में शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) के रूप में कार्यरत रहे. इस दौरान उन्होंने सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को भू-माफियाओं के कब्जे से बचाने का काम किया.

वर्षों की शिकायतों से बनाया था 100 पेज का दस्तावेज
रवींद्र परमार के मुताबिक उन्होंने अलग-अलग विभागों, राजस्व अभिलेखों, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर लगभग 100 पन्नों की विस्तृत पत्रावली तैयार की थी. उन्होंने बताया कि इस पत्रावली को 9 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र सिंह को सौंपी गई थी ताकि सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण और अनियमितताओं की जांच कराई जा सके. हालांकि, जिलाधिकारी के स्थानांतरण के बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका.
हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप
अधिवक्ता ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट को पूरे मामले से अवगत कराया था. हाईकोर्ट ने 5 फरवरी 2017 और 25 अप्रैल 2018 को जिलाधिकारियों को उनकी शिकायतों और अभिलेखों के निस्तारण के निर्देश दिए थे, लेकिन उन आदेशों को भी प्रशासन ने दबा दिया और कोई कार्रवाई नहीं की गई.
डीएम निधि गुप्ता से शिकायत, एडीएम ले गए पत्रावली
रवींद्र परमार ने बताया कि उन्होंने वर्तमान जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स से कई बार मुलाकात की और 14 मई तथा 22 मई 2026 को लिखित शिकायतें भी सौंपीं. उन्होंने कहा कि इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि तत्कालीन एडीएम अविनाश त्रिपाठी 100 पेज की पत्रावली अपने साथ ले गए हैं. हालांकि युगान्तर प्रवाह ने जब इस संबंध में डीएम निधि गुप्ता वत्स का पक्ष जानने के लिए कई बार दूरभाष से संपर्क किया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी, आगे उनका पक्ष आता है तो ख़बर में जोड़ दिया जाएगा.
सैकड़ों बीघे जमीन और तालाबी संपत्तियों का उल्लेख
रवींद्र परमार का कहना है कि इस पत्रावली में सैकड़ों बीघे सरकारी भूमि, तालाबों और कथित भूमि घोटालों से जुड़ी जानकारियां शामिल थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों की जांच होती तो भू-माफियाओं और उनसे जुड़े संभावित नेटवर्क का खुलासा हो सकता था. साथ ही उन्होंने कुछ मामलों को 'लैंड जिहाद' से भी जोड़ते हुए जांच की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में प्रशासन के साथ कई सफेदपोश लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं.
जनसुनवाई पोर्टल पर भी भेजी गई शिकायतें
अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने 20 फरवरी, 16 मार्च और 29 मई 2026 को जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायतें पहुंचाई हैं. इसके अलावा सदर तहसील में पारित आदेशों की समीक्षा, रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच और एक स्वतंत्र समिति के गठन की भी मांग की गई है. रवींद्र परमार ने कहा है कि यदि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो वह अनशन शुरू करेंगे.
Fatehpur News: भ्रष्टाचार की परतें खोलने वाली 100 पेज की पत्रावली कलेक्ट्रेट से गायब ! मुख्यमंत्री योगी से शिकायत, सरकारी जमीनों पर बड़ा खेल
Fatehpur News: फतेहपुर जिले में सरकारी जमीनों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र परमार ने आरोप लगाया है कि वर्षों से जुटाए गए दस्तावेजों, शिकायतों और साक्ष्यों पर आधारित करीब 100 पन्नों की महत्वपूर्ण पत्रावली कलेक्ट्रेट से गायब हो गई है. उनका दावा है कि यदि इन दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होती तो सरकारी भूमि, तालाबी संपत्तियों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते थे.
25 वर्षों से सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं परमार
रवींद्र परमार ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में बताया कि वह वर्ष 2000 से 2015 तक फतेहपुर में शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) के रूप में कार्यरत रहे. इस दौरान उन्होंने सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों को भू-माफियाओं के कब्जे से बचाने का काम किया.
उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा छोड़ने के बाद भी उनका अभियान नहीं रुका और वर्ष 2016 से निजी वकालत करते हुए उन्होंने तालाबों, चारागाहों और अन्य सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों को जिलाधिकारियों के सामने उठाते रहे हैं.
वर्षों की शिकायतों से बनाया था 100 पेज का दस्तावेज
रवींद्र परमार के मुताबिक उन्होंने अलग-अलग विभागों, राजस्व अभिलेखों, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर लगभग 100 पन्नों की विस्तृत पत्रावली तैयार की थी. उन्होंने बताया कि इस पत्रावली को 9 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी रविंद्र सिंह को सौंपी गई थी ताकि सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण और अनियमितताओं की जांच कराई जा सके. हालांकि, जिलाधिकारी के स्थानांतरण के बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका.
हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप
अधिवक्ता ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट को पूरे मामले से अवगत कराया था. हाईकोर्ट ने 5 फरवरी 2017 और 25 अप्रैल 2018 को जिलाधिकारियों को उनकी शिकायतों और अभिलेखों के निस्तारण के निर्देश दिए थे, लेकिन उन आदेशों को भी प्रशासन ने दबा दिया और कोई कार्रवाई नहीं की गई.
डीएम निधि गुप्ता से शिकायत, एडीएम ले गए पत्रावली
रवींद्र परमार ने बताया कि उन्होंने वर्तमान जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स से कई बार मुलाकात की और 14 मई तथा 22 मई 2026 को लिखित शिकायतें भी सौंपीं. उन्होंने कहा कि इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि तत्कालीन एडीएम अविनाश त्रिपाठी 100 पेज की पत्रावली अपने साथ ले गए हैं. हालांकि युगान्तर प्रवाह ने जब इस संबंध में डीएम निधि गुप्ता वत्स का पक्ष जानने के लिए कई बार दूरभाष से संपर्क किया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी, आगे उनका पक्ष आता है तो ख़बर में जोड़ दिया जाएगा.
सैकड़ों बीघे जमीन और तालाबी संपत्तियों का उल्लेख
रवींद्र परमार का कहना है कि इस पत्रावली में सैकड़ों बीघे सरकारी भूमि, तालाबों और कथित भूमि घोटालों से जुड़ी जानकारियां शामिल थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों की जांच होती तो भू-माफियाओं और उनसे जुड़े संभावित नेटवर्क का खुलासा हो सकता था. साथ ही उन्होंने कुछ मामलों को 'लैंड जिहाद' से भी जोड़ते हुए जांच की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में प्रशासन के साथ कई सफेदपोश लोगों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं.
जनसुनवाई पोर्टल पर भी भेजी गई शिकायतें
अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने 20 फरवरी, 16 मार्च और 29 मई 2026 को जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायतें पहुंचाई हैं. इसके अलावा सदर तहसील में पारित आदेशों की समीक्षा, रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच और एक स्वतंत्र समिति के गठन की भी मांग की गई है. रवींद्र परमार ने कहा है कि यदि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो वह अनशन शुरू करेंगे.