
सावन में सोमवार ही नहीं, संपत शनिवार भी हैं बेहद खास ! जानिए महत्व, पूजा विधि और शनि कृपा पाने के आसान उपाय
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. जहां सावन सोमवार का विशेष महत्व है, वहीं सावन के शनिवार भी धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माने जाते हैं. इन्हें संपत शनिवार कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव और शनिदेव की पूजा करने से धन, सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है.
Sampat shanivar Sawan: सावन का नाम आते ही सबसे पहले सोमवार के व्रत और भगवान शिव की पूजा का स्मरण होता है. लेकिन धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष के अनुसार सावन के शनिवार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. इन्हें संपत शनिवार कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव तथा शनिदेव की उपासना करने से आर्थिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
क्या है संपत शनिवार का महत्व?
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस पूरे महीने शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और विशेष रूप से सोमवार के दिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत-पूजन किया जाता है. हालांकि धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन के प्रत्येक शनिवार का भी विशेष महत्व बताया गया है. इन्हें संपत शनिवार कहा जाता है.

सावन में शनि पूजा क्यों मानी जाती है विशेष?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन जल तत्व का महीना माना जाता है. इस दौरान वायु तत्व अपेक्षाकृत कमजोर हो सकता है. वायु तत्व के स्वामी शनिदेव हैं. इसलिए सावन में शनिदेव की पूजा और उपासना करने से मानसिक तनाव, स्नायु तंत्र तथा पाचन संबंधी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है. साथ ही व्यक्ति का मन भी सकारात्मक बना रहता है.
संपत शनिवार की पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के प्रत्येक शनिवार सायंकाल पीपल के वृक्ष के पास जाकर सरसों के तेल का बड़ा दीपक जलाना शुभ माना जाता है.
इसके बाद सबसे पहले भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. फिर शनिदेव के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करें. पूजा पूर्ण होने के बाद किसी निर्धन या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं अथवा भोजन के लिए आर्थिक सहायता दें. अंत में भगवान शिव और शनिदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करें.
हवन और दान का विशेष उपाय
शनिवार की शाम नीम की लकड़ी से हवन करना भी शुभ माना गया है. हवन के दौरान काले तिल की 108 आहुति देते हुए "ॐ शं शनैश्चराय स्वाहा" मंत्र का जाप करें. हवन पूर्ण होने के बाद काले तिल, उड़द की दाल, काले वस्त्र या अन्य काली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है.
वर्षभर मिलती है शनिदेव की कृपा
धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु पूरे सावन माह के सभी शनिवार श्रद्धा और नियमपूर्वक शनिदेव की उपासना करता है तो उसे पूरे वर्ष शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसी कारण सावन के शनिवार को संपत शनिवार कहा जाता है और इन्हें धन, समृद्धि तथा शुभ फल देने वाला माना जाता है.
सावन में सोमवार ही नहीं, संपत शनिवार भी हैं बेहद खास ! जानिए महत्व, पूजा विधि और शनि कृपा पाने के आसान उपाय
Sampat shanivar Sawan: सावन का नाम आते ही सबसे पहले सोमवार के व्रत और भगवान शिव की पूजा का स्मरण होता है. लेकिन धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष के अनुसार सावन के शनिवार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. इन्हें संपत शनिवार कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव तथा शनिदेव की उपासना करने से आर्थिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
क्या है संपत शनिवार का महत्व?
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस पूरे महीने शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और विशेष रूप से सोमवार के दिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत-पूजन किया जाता है. हालांकि धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन के प्रत्येक शनिवार का भी विशेष महत्व बताया गया है. इन्हें संपत शनिवार कहा जाता है.
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की आराधना करने से दोनों देवों की कृपा प्राप्त होती है. इसके साथ भगवान विष्णु का भी आशीर्वाद मिलने की बात कही जाती है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
सावन में शनि पूजा क्यों मानी जाती है विशेष?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन जल तत्व का महीना माना जाता है. इस दौरान वायु तत्व अपेक्षाकृत कमजोर हो सकता है. वायु तत्व के स्वामी शनिदेव हैं. इसलिए सावन में शनिदेव की पूजा और उपासना करने से मानसिक तनाव, स्नायु तंत्र तथा पाचन संबंधी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है. साथ ही व्यक्ति का मन भी सकारात्मक बना रहता है.
संपत शनिवार की पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के प्रत्येक शनिवार सायंकाल पीपल के वृक्ष के पास जाकर सरसों के तेल का बड़ा दीपक जलाना शुभ माना जाता है.
इसके बाद सबसे पहले भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. फिर शनिदेव के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करें. पूजा पूर्ण होने के बाद किसी निर्धन या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं अथवा भोजन के लिए आर्थिक सहायता दें. अंत में भगवान शिव और शनिदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करें.
हवन और दान का विशेष उपाय
शनिवार की शाम नीम की लकड़ी से हवन करना भी शुभ माना गया है. हवन के दौरान काले तिल की 108 आहुति देते हुए "ॐ शं शनैश्चराय स्वाहा" मंत्र का जाप करें. हवन पूर्ण होने के बाद काले तिल, उड़द की दाल, काले वस्त्र या अन्य काली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है.
वर्षभर मिलती है शनिदेव की कृपा
धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु पूरे सावन माह के सभी शनिवार श्रद्धा और नियमपूर्वक शनिदेव की उपासना करता है तो उसे पूरे वर्ष शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसी कारण सावन के शनिवार को संपत शनिवार कहा जाता है और इन्हें धन, समृद्धि तथा शुभ फल देने वाला माना जाता है.