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Who Is K Vikram Rao: वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव का निधन ! निर्भीक पत्रकारिता के एक युग का अंत, CM योगी ने दी श्रद्धांजलि

Who Is K Vikram Rao: वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव का निधन ! निर्भीक पत्रकारिता के एक युग का अंत, CM योगी ने दी श्रद्धांजलि
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. के.विक्रम राव का निधन (फतेहपुर के कार्यक्रम में राव साहब फ्रंट फोटो ओरिजनल सोर्स): File Photo Yugantar Pravah

Dr K.Vikram Rao Journalist

वरिष्ठ पत्रकार और IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के. विक्रम राव का लखनऊ में निधन हो गया. वे निर्भीक पत्रकारिता के प्रतीक थे. उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी सहित कई हस्तियों ने शोक जताया. 2003 में फतेहपुर (Fatehpur) संगोष्ठी में उन्होंने लघु पत्रों की भूमिका पर जोर दिया था.

Who Is K Vikram Rao Journalist: भारत के प्रख्यात पत्रकार, इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और निर्भीक पत्रकारिता की मिसाल डॉ. के. विक्रम राव (K Vikram Rao) का सोमवार सुबह लखनऊ (Lucknow) के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वे 87 वर्ष के थे और कुछ समय से सांस की तकलीफ से पीड़ित थे. इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि उनके पीछे बड़ी बेटी विनीता, दो बेटे सुदेव, विश्वदेव और पत्नी डॉ. के सुधा राव छूट गई हैं उनके निधन से पूरे देश में पत्रकारिता जगत शोकग्रस्त है. उनके पुत्र के. विश्वदेव राव ने जानकारी देते हुए कहा,

"यह बताते हुए अत्यंत दुःख हो रहा है कि मेरे पिताजी डॉ. के. विक्रम राव का आज सुबह लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वे लंबे समय से सांस की बीमारी से जूझ रहे थे."

उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए मॉल एवेन्यू, लखनऊ स्थित 703 पैलेस कोर्ट अपार्टमेंट में रखा गया है. उनके बड़े पुत्र सुदेव राव के मुंबई से लखनऊ पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सम्पन्न होगी.

निधन से पहले भी लिखा था आर्टिकल 

राव साहब ने निधन से कुछ घंटे पहले तक लेखन कार्य किया और एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की थी. उनका जीवन पूरी तरह से संघर्ष, सैद्धांतिक पत्रकारिता और जनसरोकारों के लिए समर्पित रहा. उन्होंने देशभर में श्रमजीवी पत्रकारों की आवाज़ बुलंद की और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए लिखा:

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“वरिष्ठ पत्रकार डॉ. के. विक्रम राव जी का निधन अत्यंत दुःखद एवं पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति है. उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार के साथ हैं.”

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, समाजवादी पार्टी सहित अनेक राजनीतिक, सामाजिक व पत्रकार संगठनों ने भी गहरी संवेदना प्रकट की.

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फतेहपुर में जब छोटे अखबारों की ताकत पर बोले थे डॉ. राव

राज्य मुख्यालय लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रेमशंकर अवस्थी ने डॉ. राव के साथ अपने 35 वर्षों के गहरे संबंध को याद करते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी. उन्होंने बताया कि

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“डॉ. के. विक्रम राव भारतीय पत्रकारिता की जीवंत चेतना और श्रमजीवी पत्रकारों के सशक्त स्वर थे. मेरा उनसे लगभग 35 वर्षों का संबंध रहा है. उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित पत्रकार सम्मेलनों में भाग लिया और जनहित के मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता दी.”

अवस्थी जी ने बताया कि 29 जनवरी 2003 को फतेहपुर (Fatehpur) में आयोजित एक दो दिवसीय संगोष्ठी में राव साहब मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए थे. इस संगोष्ठी का विषय था "स्थानीय विकास में लघु समाचार पत्रों की भूमिका" यह आयोजन जिला प्रेस क्लब फतेहपुर एवं समाचार पत्र ‘काल संधि’ द्वारा प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया था.

राव साहब ने उस अवसर पर अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा था:

 “भारत की आज़ादी और लोकतंत्र की रक्षा में छोटे और मझोले समाचार पत्रों की भूमिका ऐतिहासिक रही है. आज भी पत्रकारिता की आत्मा इन्हीं पत्रों में जीवित है. बड़े मीडिया घरानों की तुलना में लघु पत्रों ने ज़मीनी सवालों को उठाने का साहस दिखाया है. इन्हें दरकिनार करना पत्रकारिता के अस्तित्व को चुनौती देना है.”

इस संगोष्ठी में अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया था, जिनमें स्वतंत्र भारत के संपादक स्व. अनूप श्रीवास्तव, साहित्यकार स्व. धनंजय अवस्थी, प्रेस क्लब अध्यक्ष अबू वक्र अनीस, तत्कालीन जिलाधिकारी (अब प्रमुख सचिव) डॉ. हरिओम, साहित्यकार डॉ. चंद्रकुमार पांडे, स्व. राम कृपाल त्यागी सहित दर्जनों पत्रकार और समाजसेवी मौजूद थे.

अवस्थी जी ने कहा कि: 

 “राव साहब केवल पत्रकार नहीं थे, वे विचारधारा के योद्धा थे. उनके साथ बिताया हर क्षण प्रेरणा देता है. फतेहपुर की वह स्मृति आज भी जेहन में जीवित है.”

पत्रकारिता के एक युग का अंत, पत्रकारों में शोक 

डॉ. के. विक्रम राव (K Vikram Rao) का जीवन विचारों, साहस और सच्चाई को समर्पित था. वे सिर्फ पत्रकार नहीं थे, बल्कि पत्रकारिता के सिद्धांतों के जीवंत प्रतीक थे. उनका जाना न केवल एक व्यक्ति का जाना है, बल्कि एक युग का अंत है. आज हर ईमानदार पत्रकार की आंखें नम हैं. लेकिन उनकी लेखनी, उनका विचार और उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को दिशा देता रहेगा.

12 May 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

Who Is K Vikram Rao: वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव का निधन ! निर्भीक पत्रकारिता के एक युग का अंत, CM योगी ने दी श्रद्धांजलि

Dr K.Vikram Rao Journalist

Who Is K Vikram Rao Journalist: भारत के प्रख्यात पत्रकार, इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और निर्भीक पत्रकारिता की मिसाल डॉ. के. विक्रम राव (K Vikram Rao) का सोमवार सुबह लखनऊ (Lucknow) के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वे 87 वर्ष के थे और कुछ समय से सांस की तकलीफ से पीड़ित थे. इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. बताया जा रहा है कि उनके पीछे बड़ी बेटी विनीता, दो बेटे सुदेव, विश्वदेव और पत्नी डॉ. के सुधा राव छूट गई हैं उनके निधन से पूरे देश में पत्रकारिता जगत शोकग्रस्त है. उनके पुत्र के. विश्वदेव राव ने जानकारी देते हुए कहा,

"यह बताते हुए अत्यंत दुःख हो रहा है कि मेरे पिताजी डॉ. के. विक्रम राव का आज सुबह लखनऊ के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वे लंबे समय से सांस की बीमारी से जूझ रहे थे."

उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए मॉल एवेन्यू, लखनऊ स्थित 703 पैलेस कोर्ट अपार्टमेंट में रखा गया है. उनके बड़े पुत्र सुदेव राव के मुंबई से लखनऊ पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया सम्पन्न होगी.

निधन से पहले भी लिखा था आर्टिकल 

राव साहब ने निधन से कुछ घंटे पहले तक लेखन कार्य किया और एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की थी. उनका जीवन पूरी तरह से संघर्ष, सैद्धांतिक पत्रकारिता और जनसरोकारों के लिए समर्पित रहा. उन्होंने देशभर में श्रमजीवी पत्रकारों की आवाज़ बुलंद की और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए लिखा:

“वरिष्ठ पत्रकार डॉ. के. विक्रम राव जी का निधन अत्यंत दुःखद एवं पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति है. उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार के साथ हैं.”

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, समाजवादी पार्टी सहित अनेक राजनीतिक, सामाजिक व पत्रकार संगठनों ने भी गहरी संवेदना प्रकट की.

फतेहपुर में जब छोटे अखबारों की ताकत पर बोले थे डॉ. राव

राज्य मुख्यालय लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रेमशंकर अवस्थी ने डॉ. राव के साथ अपने 35 वर्षों के गहरे संबंध को याद करते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी. उन्होंने बताया कि

“डॉ. के. विक्रम राव भारतीय पत्रकारिता की जीवंत चेतना और श्रमजीवी पत्रकारों के सशक्त स्वर थे. मेरा उनसे लगभग 35 वर्षों का संबंध रहा है. उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित पत्रकार सम्मेलनों में भाग लिया और जनहित के मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता दी.”

अवस्थी जी ने बताया कि 29 जनवरी 2003 को फतेहपुर (Fatehpur) में आयोजित एक दो दिवसीय संगोष्ठी में राव साहब मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए थे. इस संगोष्ठी का विषय था "स्थानीय विकास में लघु समाचार पत्रों की भूमिका" यह आयोजन जिला प्रेस क्लब फतेहपुर एवं समाचार पत्र ‘काल संधि’ द्वारा प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया था.

राव साहब ने उस अवसर पर अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा था:

 “भारत की आज़ादी और लोकतंत्र की रक्षा में छोटे और मझोले समाचार पत्रों की भूमिका ऐतिहासिक रही है. आज भी पत्रकारिता की आत्मा इन्हीं पत्रों में जीवित है. बड़े मीडिया घरानों की तुलना में लघु पत्रों ने ज़मीनी सवालों को उठाने का साहस दिखाया है. इन्हें दरकिनार करना पत्रकारिता के अस्तित्व को चुनौती देना है.”

इस संगोष्ठी में अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया था, जिनमें स्वतंत्र भारत के संपादक स्व. अनूप श्रीवास्तव, साहित्यकार स्व. धनंजय अवस्थी, प्रेस क्लब अध्यक्ष अबू वक्र अनीस, तत्कालीन जिलाधिकारी (अब प्रमुख सचिव) डॉ. हरिओम, साहित्यकार डॉ. चंद्रकुमार पांडे, स्व. राम कृपाल त्यागी सहित दर्जनों पत्रकार और समाजसेवी मौजूद थे.

अवस्थी जी ने कहा कि: 

 “राव साहब केवल पत्रकार नहीं थे, वे विचारधारा के योद्धा थे. उनके साथ बिताया हर क्षण प्रेरणा देता है. फतेहपुर की वह स्मृति आज भी जेहन में जीवित है.”

पत्रकारिता के एक युग का अंत, पत्रकारों में शोक 

डॉ. के. विक्रम राव (K Vikram Rao) का जीवन विचारों, साहस और सच्चाई को समर्पित था. वे सिर्फ पत्रकार नहीं थे, बल्कि पत्रकारिता के सिद्धांतों के जीवंत प्रतीक थे. उनका जाना न केवल एक व्यक्ति का जाना है, बल्कि एक युग का अंत है. आज हर ईमानदार पत्रकार की आंखें नम हैं. लेकिन उनकी लेखनी, उनका विचार और उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को दिशा देता रहेगा.

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