UPPCL News: यूपी में स्मार्ट मीटर के नाम पर 127 करोड़ की वसूली ! अब पैसे लौटाएगा बिजली विभाग
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर बिजली उपभोक्ताओं से की गई अतिरिक्त वसूली पर विद्युत नियामक आयोग ने बड़ा फैसला दिया है. करीब 3.67 लाख उपभोक्ताओं से लगभग 127 करोड़ रुपये अधिक वसूले गए थे. आयोग ने आदेश दिया है कि यह रकम उपभोक्ताओं के बिजली बिल में समायोजित कर लौटाई जाएगी.
UPPCL Smart Meter News: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर नए बिजली कनेक्शन के दौरान की गई अतिरिक्त वसूली को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने बिजली कंपनियों को आदेश दिया है कि 1 अप्रैल 2025 के बाद उपभोक्ताओं से लिए गए अतिरिक्त पैसे वापस किए जाएं और उन्हें बिजली बिलों में समायोजित किया जाए.
स्मार्ट मीटर के नाम पर करोड़ों की वसूली का खुलासा
यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू करने की प्रक्रिया के दौरान बिजली उपभोक्ताओं से भारी अतिरिक्त रकम वसूले जाने का मामला सामने आया है. उपभोक्ता परिषद की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने पाया कि बिजली वितरण कंपनियों ने नए कनेक्शन देते समय निर्धारित दर से अधिक शुल्क लिया.
आयोग ने कहा कि किसी भी तरह का शुल्क लेने से पहले उसकी दर का अनुमोदन नियामक आयोग से होना जरूरी है. लेकिन इस मामले में स्मार्ट मीटर की लागत के नाम पर जो पैसा लिया गया, उसकी कोई स्वीकृत दर तय नहीं थी. यही वजह है कि आयोग ने इस वसूली को नियमों के विरुद्ध माना और बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं को पूरी राशि वापस करने का निर्देश दिया.
सिंगल और थ्री फेज कनेक्शन पर ज्यादा पैसे लिए गए
आयोग ने स्पष्ट किया कि यह रकम स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत के नाम पर ली गई, लेकिन उसकी कोई अधिकृत दर तय नहीं थी. इसलिए बिजली कंपनियों द्वारा की गई यह वसूली वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी और इसे तुरंत सुधारना आवश्यक है.
3.67 लाख उपभोक्ता प्रभावित, 127 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश
जांच में सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया से प्रदेश के करीब 3.67 लाख नए बिजली उपभोक्ता प्रभावित हुए. इन उपभोक्ताओं से कुल मिलाकर लगभग 127 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि वसूली गई. आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह ने इस मामले को गंभीर मानते हुए आदेश दिया कि यह रकम उपभोक्ताओं को वापस की जाए.
आयोग ने बिजली कंपनियों से कहा कि प्रभावित उपभोक्ताओं का पूरा विवरण तैयार किया जाए और अतिरिक्त वसूली की गई राशि को उनके बिजली बिलों में समायोजित कर लौटाया जाए. आयोग ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना नियामक संस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
2019 की कॉस्ट डाटा बुक के आधार पर हो रही थी वसूली
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि यूपीपीसीएल और बिजली वितरण कंपनियां अभी भी 2019 की कॉस्ट डाटा बुक के आधार पर शुल्क वसूल रही थीं. जबकि नए कनेक्शन के लिए लगाए जा रहे मीटर स्मार्ट प्रीपेड तकनीक के थे.
इन मीटरों की लागत के लिए आयोग द्वारा अलग से कोई स्वीकृत दर निर्धारित नहीं की गई थी. आयोग ने कहा कि बिना मंजूरी के किसी नई तकनीक या उपकरण की लागत उपभोक्ताओं से वसूलना विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के खिलाफ है. इसलिए इस वसूली को गैरकानूनी माना गया और बिजली कंपनियों को भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की चेतावनी दी गई.
बिजली बिल में समायोजित होकर वापस मिलेंगे पैसे
आयोग ने अपने आदेश में साफ कहा है कि 1 अप्रैल 2025 के बाद जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त रकम वसूली गई है, उसे उनके बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा. यदि किसी उपभोक्ता के बिल में समायोजन के बाद भी कुछ राशि बचती है, तो उसे अगले बिलों में तब तक एडजस्ट किया जाएगा जब तक पूरी रकम वापस न हो जाए.
वहीं प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए यह अतिरिक्त राशि उनके खाते में क्रेडिट के रूप में दिखाई जाएगी. आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की है और उस दिन पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक को भी आयोग के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.
