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यूपी में ईंट भट्ठों की मनमानी: आबादी, स्कूल और अस्पतालों के पास खुले भट्ठे, कैग रिपोर्ट ने खोली पोल

यूपी में ईंट भट्ठों की मनमानी: आबादी, स्कूल और अस्पतालों के पास खुले भट्ठे, कैग रिपोर्ट ने खोली पोल
उत्तर प्रदेश में बिना मानक संचालित हो रहे ईंट भट्ठे रिपोर्ट में खुलासा (प्रतीकात्मक फोटो): Image Credit Original Source

Lucknow News In Hindi

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में ईंट भट्ठों के संचालन को लेकर कैग (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य में सैकड़ों ईंट भट्ठे आबादी, स्कूल, अस्पताल और यहां तक कि ऐतिहासिक धरोहरों के पास चल रहे हैं. नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही ने जन स्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर खतरे में डाल दिया है.

Uttar Pradesh News: यूपी में ईंट भट्ठों का संचालन सरकार के तय नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि कई जिलों में ईंट भट्ठे आबादी, अस्पताल और स्कूलों के आसपास खुलेआम चल रहे हैं. नियमों के मुताबिक भट्ठों को आबादी और संवेदनशील इलाकों से दूर होना चाहिए, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनन विभाग की लापरवाही से इनकी निगरानी तक नहीं की गई.

नियमों की अनदेखी, दूरी का पालन नहीं

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, दो ईंट भट्ठों के बीच 800 मीटर की न्यूनतम दूरी होना जरूरी है, लेकिन यह नियम धड़ल्ले से तोड़ा गया. 9 जिलों में 128 ईंट भट्ठे इस मानक का पालन किए बिना संचालित हो रहे हैं.

अमरोहा में 35, फतेहपुर में 29, संभल में 17, प्रयागराज और सहारनपुर में 15-15, कौशांबी में 10, सिद्धार्थनगर में 4, नोएडा में 2 और कानपुर देहात में 1 ईंट भट्ठा शामिल है. ये आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि नियम केवल कागजों में रह गए और जमीन पर इनका पालन नहीं हुआ.

आबादी और संवेदनशील क्षेत्रों में भट्ठों का संचालन

रिपोर्ट ने खुलासा किया कि नौ जिलों में 256 ईंट भट्ठे आवासीय इलाकों से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर चल रहे हैं. इससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है. इतना ही नहीं, 9 भट्ठे अस्पतालों के पास पाए गए, जो मरीजों के जीवन के लिए सीधे खतरा हैं. वहीं संभल जिले में 11 ईंट भट्ठे ऐतिहासिक धरोहरों के पास संचालित हो रहे हैं, जिससे इन इमारतों के संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बड़ी चूक

कैग रिपोर्ट ने यह भी साफ किया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनन विभाग के बीच तालमेल बिल्कुल नहीं है. इसी वजह से ईंट भट्ठों की निगरानी नहीं की गई और बिना मानक पूरे किए इन्हें चलने दिया गया. रिपोर्ट ने यह गंभीर सवाल खड़ा किया है कि जब ये भट्ठे सालों से चल रहे थे, तो अधिकारी आखिर किसकी अनुमति से आंख मूंदे बैठे रहे.

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पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर असर

विशेषज्ञों के मुताबिक ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं सीधे वायु प्रदूषण को बढ़ाता है. इसके कारण दमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है. स्कूल और अस्पताल के पास चल रहे भट्ठे सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन चुके हैं.

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जांच का वादा लेकिन कार्रवाई पर संशय

कैग रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जवाब मांगने पर जांच का भरोसा दिलाया है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब इतने बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तब अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की. क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर विभागीय मिलीभगत भी इस खेल का हिस्सा है. अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और बोर्ड इस रिपोर्ट के बाद कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं.

19 Aug 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

यूपी में ईंट भट्ठों की मनमानी: आबादी, स्कूल और अस्पतालों के पास खुले भट्ठे, कैग रिपोर्ट ने खोली पोल

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Uttar Pradesh News: यूपी में ईंट भट्ठों का संचालन सरकार के तय नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि कई जिलों में ईंट भट्ठे आबादी, अस्पताल और स्कूलों के आसपास खुलेआम चल रहे हैं. नियमों के मुताबिक भट्ठों को आबादी और संवेदनशील इलाकों से दूर होना चाहिए, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनन विभाग की लापरवाही से इनकी निगरानी तक नहीं की गई.

नियमों की अनदेखी, दूरी का पालन नहीं

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, दो ईंट भट्ठों के बीच 800 मीटर की न्यूनतम दूरी होना जरूरी है, लेकिन यह नियम धड़ल्ले से तोड़ा गया. 9 जिलों में 128 ईंट भट्ठे इस मानक का पालन किए बिना संचालित हो रहे हैं.

अमरोहा में 35, फतेहपुर में 29, संभल में 17, प्रयागराज और सहारनपुर में 15-15, कौशांबी में 10, सिद्धार्थनगर में 4, नोएडा में 2 और कानपुर देहात में 1 ईंट भट्ठा शामिल है. ये आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि नियम केवल कागजों में रह गए और जमीन पर इनका पालन नहीं हुआ.

आबादी और संवेदनशील क्षेत्रों में भट्ठों का संचालन

रिपोर्ट ने खुलासा किया कि नौ जिलों में 256 ईंट भट्ठे आवासीय इलाकों से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर चल रहे हैं. इससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है. इतना ही नहीं, 9 भट्ठे अस्पतालों के पास पाए गए, जो मरीजों के जीवन के लिए सीधे खतरा हैं. वहीं संभल जिले में 11 ईंट भट्ठे ऐतिहासिक धरोहरों के पास संचालित हो रहे हैं, जिससे इन इमारतों के संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बड़ी चूक

कैग रिपोर्ट ने यह भी साफ किया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनन विभाग के बीच तालमेल बिल्कुल नहीं है. इसी वजह से ईंट भट्ठों की निगरानी नहीं की गई और बिना मानक पूरे किए इन्हें चलने दिया गया. रिपोर्ट ने यह गंभीर सवाल खड़ा किया है कि जब ये भट्ठे सालों से चल रहे थे, तो अधिकारी आखिर किसकी अनुमति से आंख मूंदे बैठे रहे.

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर असर

विशेषज्ञों के मुताबिक ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं सीधे वायु प्रदूषण को बढ़ाता है. इसके कारण दमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियां तेजी से बढ़ सकती हैं. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है. स्कूल और अस्पताल के पास चल रहे भट्ठे सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन चुके हैं.

जांच का वादा लेकिन कार्रवाई पर संशय

कैग रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जवाब मांगने पर जांच का भरोसा दिलाया है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब इतने बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तब अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की. क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर विभागीय मिलीभगत भी इस खेल का हिस्सा है. अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और बोर्ड इस रिपोर्ट के बाद कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं.

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