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डिप्टी CM बृजेश पाठक का बड़ा एक्शन: 7 डॉक्टर बर्खास्त, कई अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई

डिप्टी CM बृजेश पाठक का बड़ा एक्शन: 7 डॉक्टर बर्खास्त, कई अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई
यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का एक्शन 7 डॉक्टरों की गई नौकरी कई कार्रवाई की जद में (फाइल फोटो): Image Credit Original Source

Brajesh Pathak News

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के डिप्टी CM और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है. लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे सात सरकारी डॉक्टरों को बर्खास्त कर दिया गया है. इसके साथ ही कई अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

UP Brajesh Pathak Action: प्रदेश की योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए लगातार सख्ती दिखा रही है. इसी कड़ी में डिप्टी CM और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने सात डॉक्टरों को बर्खास्त करने का बड़ा फैसला लिया है. ये सभी डॉक्टर लंबे समय से बिना अनुमति ड्यूटी से गैरहाजिर थे. यही नहीं, कई बार नोटिस और संपर्क करने के बावजूद उन्होंने काम पर लौटने की जहमत नहीं उठाई. अब स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें सेवा से हटा दिया है और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई की जा रही है.

गैरहाजिर रहने वाले सात डॉक्टरों पर गिरी गाज

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, सात सरकारी डॉक्टर बिना अनुमति लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे थे. इनमें झांसी जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकुल मिश्रा, अमेठी के बाजार शुक्ल न्यू सीएचसी के डॉ. विकास कुमार मिश्रा, अमेठी के जगदीशपुर न्यू सीएचसी के डॉ. विकास कुमार शर्मा, बरेली सीएमओ के अधीन तैनात डॉ. दीपेश गुप्ता, सीतापुर मिश्रिख सीएचसी की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रांत आनंद और हाथरस जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. मोहम्मद राफे शामिल हैं. इन सभी डॉक्टरों के खिलाफ कई बार नोटिस जारी हुए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

डिप्टी CM ने दिखाई सख्ती, दिए बर्खास्तगी के आदेश

डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए तुरंत कड़ा एक्शन लिया. उन्होंने सातों डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए. स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारी जो सरकारी नौकरी के बावजूद अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

पीलीभीत अस्पताल में लापरवाही पर भी कार्रवाई

डिप्टी CM ने सिर्फ गैरहाजिर डॉक्टरों पर ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में इलाज की गड़बड़ी पर भी कार्रवाई की है. पीलीभीत जिला महिला अस्पताल में मरीज को सही इलाज न मिलने की शिकायत पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार को आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. मरीजों को समय पर और सही इलाज दिलाने के लिए यह कदम उठाया गया है.

Read More: Uttar Pradesh: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सहायक अध्यापक बनने के लिए बीएड अनिवार्य, क्यों दी गई थी चुनौती

हमीरपुर CMO पर भी गिरी गाज

हमीरपुर के CMO डॉ. गीतम सिंह पर भी डिप्टी CM ने सख्ती दिखाई है. उन पर टेंडर प्रक्रिया की शर्तों की अनदेखी करने का आरोप है. इस मामले में डॉ. गीतम सिंह को आरोप पत्र देकर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है.

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बदायूं मेडिकल कॉलेज में भी कार्रवाई

बदायूं राजकीय मेडिकल कॉलेज में ENT के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक कुमार शाह पर भी कार्रवाई तय हो गई है. बताया जा रहा है कि वह 2023 से ही ड्यूटी से अनुपस्थित हैं. इस पर डिप्टी CM ने उन्हें भी आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए हैं. इससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग अब गैरजिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर लगातार शिकंजा कस रहा है.

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22 Aug 2025 By Vishwa Deepak Awasthi

डिप्टी CM बृजेश पाठक का बड़ा एक्शन: 7 डॉक्टर बर्खास्त, कई अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई

Brajesh Pathak News

UP Brajesh Pathak Action: प्रदेश की योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए लगातार सख्ती दिखा रही है. इसी कड़ी में डिप्टी CM और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने सात डॉक्टरों को बर्खास्त करने का बड़ा फैसला लिया है. ये सभी डॉक्टर लंबे समय से बिना अनुमति ड्यूटी से गैरहाजिर थे. यही नहीं, कई बार नोटिस और संपर्क करने के बावजूद उन्होंने काम पर लौटने की जहमत नहीं उठाई. अब स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें सेवा से हटा दिया है और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई की जा रही है.

गैरहाजिर रहने वाले सात डॉक्टरों पर गिरी गाज

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, सात सरकारी डॉक्टर बिना अनुमति लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे थे. इनमें झांसी जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकुल मिश्रा, अमेठी के बाजार शुक्ल न्यू सीएचसी के डॉ. विकास कुमार मिश्रा, अमेठी के जगदीशपुर न्यू सीएचसी के डॉ. विकास कुमार शर्मा, बरेली सीएमओ के अधीन तैनात डॉ. दीपेश गुप्ता, सीतापुर मिश्रिख सीएचसी की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रांत आनंद और हाथरस जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. मोहम्मद राफे शामिल हैं. इन सभी डॉक्टरों के खिलाफ कई बार नोटिस जारी हुए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

डिप्टी CM ने दिखाई सख्ती, दिए बर्खास्तगी के आदेश

डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए तुरंत कड़ा एक्शन लिया. उन्होंने सातों डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए. स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मचारी जो सरकारी नौकरी के बावजूद अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

पीलीभीत अस्पताल में लापरवाही पर भी कार्रवाई

डिप्टी CM ने सिर्फ गैरहाजिर डॉक्टरों पर ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में इलाज की गड़बड़ी पर भी कार्रवाई की है. पीलीभीत जिला महिला अस्पताल में मरीज को सही इलाज न मिलने की शिकायत पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार को आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. मरीजों को समय पर और सही इलाज दिलाने के लिए यह कदम उठाया गया है.

हमीरपुर CMO पर भी गिरी गाज

हमीरपुर के CMO डॉ. गीतम सिंह पर भी डिप्टी CM ने सख्ती दिखाई है. उन पर टेंडर प्रक्रिया की शर्तों की अनदेखी करने का आरोप है. इस मामले में डॉ. गीतम सिंह को आरोप पत्र देकर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है.

बदायूं मेडिकल कॉलेज में भी कार्रवाई

बदायूं राजकीय मेडिकल कॉलेज में ENT के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक कुमार शाह पर भी कार्रवाई तय हो गई है. बताया जा रहा है कि वह 2023 से ही ड्यूटी से अनुपस्थित हैं. इस पर डिप्टी CM ने उन्हें भी आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए हैं. इससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग अब गैरजिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर लगातार शिकंजा कस रहा है.

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